पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠवाà¤à¥à¤¥à¥à¤—ल! अगर आप तमिल लोगों को अपने जीवन के इस खास दिन पर à¤à¤•-दूसरे को इस तरह बधाई देते हà¥à¤ देखें-सà¥à¤¨à¥‡à¤‚ तो à¤à¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ न हों। वे बस ‘नया साल मà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤•’ कह रहे हैं!
पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠ(पà¥à¤¥à¥ का अरà¥à¤¥ है नया + अंडॠका अरà¥à¤¥ है वरà¥à¤·) या पà¥à¤¥à¥à¤µà¤°à¥à¤¶à¤® (पà¥à¤¥à¥ का अरà¥à¤¥ है नया और वरà¥à¤¶à¤® का अरà¥à¤¥ है वरà¥à¤·) या वरà¥à¤¶à¤¾ पिरपà¥à¤ªà¥ (वरà¥à¤¶à¤¾ का अरà¥à¤¥ है वरà¥à¤· और पिरपà¥à¤ªà¥ का अरà¥à¤¥ है जनà¥à¤®) तमिलनाडॠमें नठसाल के जनà¥à¤® के रूप में मनाया जाता है। यह तमिल सौर कैलेंडर के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चिथिरई महीने के पहले दिन पड़ता है।
पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠकब मनाया जाता है?
पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠआम तौर पर हर साल 14 या 15 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को पड़ता है। 2025 में, यह 14 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को था।
तमिल नव वरà¥à¤·, पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डà¥, उगादि से अलग दिन कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ मनाया जाता है?
तमिलनाडॠà¤à¤• सौर कैलेंडर- सौरमण कैलेंडर का पालन करता है। इस पà¥à¤°à¤•ार के कैलेंडर में सूरà¥à¤¯ की गति को वरà¥à¤· के समय की गणना के लिठआधार के रूप में उपयोग किया जाता है। हमारे पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ ने नठसाल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठउस दिन का उपयोग किया जब सूरà¥à¤¯ à¤à¥‚मधà¥à¤¯ रेखा पर बिलà¥à¤•à¥à¤² ऊपर होता है। 'विशà¥' शबà¥à¤¦ वासà¥à¤¤à¤µ में विशà¥à¤µà¤¦à¥à¤°à¥à¤¤à¥à¤¤ रेखा से आया है जिसका अरà¥à¤¥ है à¤à¥‚मधà¥à¤¯ रेखा। वह रेखा जो पृथà¥à¤µà¥€ को दो à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ करती है। यह दिन विषà¥à¤µ है।
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में विषà¥à¤µ 14 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² के आसपास होता था (आज, यह 21 मारà¥à¤š है)। यह अंतर विषà¥à¤µ की सटीकता के कारण है जिसके बारे में आप यहां और अधिक पढ़ सकते हैं। इस दिन के बाद सूरà¥à¤¯ उतà¥à¤¤à¤° की ओर (उतà¥à¤¤à¤°à¥€ गोलारà¥à¤§ में) चला जाता है। उगादि à¤à¤• अलग दिन पर पड़ता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह चंदà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¨ या चंदà¥à¤° कैलेंडर पर आधारित है।
कà¥à¤¯à¤¾ सूरà¥à¤¯ का पृथà¥à¤µà¥€ के बीच में होना कोई महतà¥à¤µ रखता है?
सौर कैलेंडर का पालन करने वालों के लिठयह वह बिंदॠथा जब सूरà¥à¤¯ दोनों गोलारà¥à¤§à¥‹à¤‚ के बीच में था। यह नठसाल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के लिठà¤à¤• आदरà¥à¤¶ बिंदॠथा। यह संतà¥à¤²à¤¨ का बिंदॠथा। खातों, जीवन, संबंधों, लकà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ और अपने उचà¥à¤š सà¥à¤µ का संतà¥à¤²à¤¨à¥¤ मूल रूप सेलोग पà¥à¤°à¤•ृति के अनà¥à¤°à¥‚प रहते थे।
तमिल लोग तमिल नव वरà¥à¤· पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠकैसे मनाते हैं?
आप घरों के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ दà¥à¤µà¤¾à¤° को रंग-बिरंगे कोलम (चावल के पाउडर से जमीन पर बनाठगठसà¥à¤‚दर डिजाइन) से सजा हà¥à¤† पाà¤à¤‚गे। कोलम के केंदà¥à¤° में à¤à¤• कà¥à¤¥à¥à¤µà¤¿à¤²à¥à¤²à¤•ॠया दीपक होता है जिसे जीवन में अंधकार को दूर करने के लिठजलाया जाता है। बहà¥à¤°à¤‚गी फूलों के साथ उतà¥à¤¸à¤µ का नजारा पूरा होता है।
वासà¥à¤¤à¤µ में, पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠसे à¤à¤• दिन पहले ही तैयारियां शà¥à¤°à¥‚ हो जाती हैं। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ और बेकार वसà¥à¤¤à¥à¤“ं को हटाकर अवà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को दूर करते हैं। इस तरह से वे पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ातà¥à¤®à¤• रूप से नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को दूर करते हैं। लोग पूजा ककà¥à¤· (पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ ककà¥à¤·) के सामने à¤à¤• टà¥à¤°à¥‡/पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ पर चावल, पान के पतà¥à¤¤à¥‡, सà¥à¤ªà¤¾à¤°à¥€, पैसे (सोने और चांदी के आà¤à¥‚षण और सिकà¥à¤•े), फूल और à¤à¤• दरà¥à¤ªà¤£ के साथ आम, केले और कटहल, कचà¥à¤šà¥‡ केले और अनà¥à¤¯ मौसमी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रखते हैं।
इनमें से पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वसà¥à¤¤à¥ का कà¥à¤¯à¤¾ महतà¥à¤µ है?
टà¥à¤°à¥‡ या पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ पर रखी गई वसà¥à¤¤à¥à¤“ं का यह मिशà¥à¤°à¤£ शà¥à¤ माना जाता है। नठसाल के दिन जब आप जागेंगे तो यह पहली चीज होगी जिस पर आपकी नजर पड़ेगी। इसे कनà¥à¤¨à¥€ या शà¥à¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ कहा जाता है।
आम और कटहल मौसमी फल हैं और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं। चावल पोषण का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं। पैसा धन और समृदà¥à¤§à¤¿ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करता है। और आà¤à¥‚षण सà¥à¤‚दरता और शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं। घर के बड़ों को उनके आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ और समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठआà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने के लिठपान के पतà¥à¤¤à¥‡ दिठजाते हैं। दरà¥à¤ªà¤£ जीवन में इन सà¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ चीजों को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बढ़ाता है! मूल रूप से यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ातà¥à¤®à¤• à¤à¥‡à¤‚ट है जो हमारे कृषि समाज को शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि देती है और उन सà¤à¥€ चीजों का सà¥à¤µà¤¾à¤—त करती है जो सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥, खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤², पूरà¥à¤£ और संपनà¥à¤¨ जीवन जीते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ कोई विशेष खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ है जो नठसाल के जशà¥à¤¨ के हिसà¥à¤¸à¥‡ के रूप में बनाया जाता है?
पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠपर बनाया जाने वाला सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‹à¤œà¤¨ वरà¥à¤¶à¤¾ पिरपà¥à¤ªà¥ मंगई पचड़ी है। यह पचड़ी कटे/तराशे टे हà¥à¤ कचà¥à¤šà¥‡ आम (खटà¥à¤Ÿà¥‡), गà¥à¤¡à¤¼ के टà¥à¤•ड़े (मीठे), नीम के पतà¥à¤¤à¥‡ (कड़वे), इमली (तीखी) और लाल मिरà¥à¤š (मसालेदार) से बनाई जाती है। मूल रूप से यह à¤à¤• नठसाल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ है जो उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि नया वरà¥à¤· जीवन के सà¤à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ या जायकों से à¤à¤°à¤¾ होगा। इसलिठआप à¤à¤• पूरà¥à¤£ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ जीवन का अनà¥à¤à¤µ करते हैं।
तमिल नववरà¥à¤· के दिन मीठे पलों को आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना समठमें आता है लेकिन कोई कड़वे पलों को कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना चाहेगा?
कड़वे पल मीठे पलों को और à¤à¥€ मीठा बना देते हैं। उनके बिना आप अचà¥à¤›à¥‡ पलों की उतनी सराहना नहीं करेंगे। साथ ही, यह उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करना वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• है कि जीवन अचà¥à¤›à¥‡ और बà¥à¤°à¥‡ दोनों समयों का मिशà¥à¤°à¤£ होगा।
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