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भारतीय प्रवासियों के साथ अमानवीय व्यवहार पर NAPM में नाराजगी, अमेरिकी सरकार की कड़ी निंदा

संगठन ने अमेरिका द्वारा भारतीय प्रवासियों को अमानवीय तरीके से भारत भेजने के कदम की तीखी आलोचना की है।

NAPM का लोगो /

राष्ट्रीय जन आंदोलनों का गठबंधन (NAPM) ने अमेरिका सरकार द्वारा भारतीय प्रवासियों के निर्वासन (डिपोर्टेशन) के दौरान किए गए अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे मौलिक मानवाधिकारों और गरिमा का उल्लंघन करार दिया। NAPM एक वैकल्पिक वैश्वीकरण (अल्टर-ग्लोबलाइजेशन) पर केंद्रित भारतीय कार्यकर्ता समूहों का गठबंधन है। यह विभिन्न नागरिक संगठनों और समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को एक साथ लाने का कार्य करता है। इस संगठन की सह-स्थापना प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने की थी।

संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक बयान में कहा, NAPM अमेरिका सरकार द्वारा भारतीय प्रवासियों (migrants) के निर्वासन के दौरान किए गए अपमानजनक और अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा करता है। यह मौलिक मानवाधिकारों और गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। NAPM भारतीय सरकार की भी आलोचना करता है, जो अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय इस अमानवीय व्यवहार को सही ठहरा रही है।

एक आधिकारिक बयान में, NAPM ने कहा, निर्वासन (डिपोर्टेशन) के इतिहास में यह एक और क्रूर और शर्मनाक घटना है, जो नस्लीय राजनीति के एक नए युग की शुरुआत दर्शाती है। संगठन ने आगे कहा, यह याद रखा जाना चाहिए कि यदि किसी देश का नागरिक किसी अन्य देश में कोई कानून तोड़ता भी है, तब भी उसके मूलभूत और अविच्छेद्य मानवाधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

अमृतसर में उतरा निर्वासित भारतीयों का विमान
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 5 फरवरी 2024 को अमृतसर में एक अमेरिकी सैन्य विमान उतरा, जिसमें 104 भारतीय प्रवासियों को निर्वासित कर भेजा गया था। रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि निर्वासित प्रवासियों को उड़ान के दौरान हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़ा गया था, जिससे भारत में व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।

भारतीय सरकार का बयान
इस मामले पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 6 फरवरी को राज्यसभा में सफाई दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के तहत किए गए निर्वासन में, 2012 से लागू एक तय प्रोटोकॉल के तहत हवाई यात्रा के दौरान restraints (हथकड़ियां/ बेड़ियां) का उपयोग किया जाता है। जयशंकर ने इसे अमेरिका की 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) के तहत सामान्य प्रक्रिया बताया।

NAPM ने भारतीय सरकार से अपील करते हुए कहा,भारतीय अधिकारियों को इस मामले में अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति (United Nations Human Rights Committee) में शिकायत दर्ज कराने के विकल्प तलाशने चाहिए। संगठन ने दोहराया कि हर देश के नागरिकों को उनके मौलिक मानवाधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही वे निर्वासन के अधीन हों।

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