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रिकर्स आइलैंड पर ICE की वापसी से बवाल, शेखर कृष्णन मेयर एडम्स से भिड़े

मेयर को भेजे गए पत्र में इस फैसले की तीखी आलोचना की गई है और इसे “कानून का घोर उल्लंघन तथा स्वार्थ से प्रेरित कदम” बताया गया है।

न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल के भारतीय-अमेरिकी सदस्य शेखर कृष्णन, जो डिस्ट्रिक्ट 25 का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन 30 से अधिक काउंसिल सदस्यों और स्थानीय अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने मेयर एरिक एडम्स से यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) को राइकर आइलैंड पर दोबारा कार्यालय खोलने की अनुमति देने वाले कार्यकारी आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

इस संबंध में मेयर को भेजे गए पत्र में इस फैसले की तीखी आलोचना की गई है और इसे “कानून का घोर उल्लंघन तथा स्वार्थ से प्रेरित कदम” बताया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश न्यूयॉर्क शहर के लंबे समय से चले आ रहे शरण कानूनों (Sanctuary Laws) को कमजोर करता है, जिन्होंने शहर में विश्वास और सुरक्षा को बढ़ावा दिया है। पत्र में लिखा है: “न्यूयॉर्क शहर के शरण कानून केवल हमारे मूल्यों को नहीं दर्शाते, बल्कि हमें सुरक्षित भी बनाते हैं। ये कानून न्यूयॉर्क वासियों को शहर की सेवाओं तक पहुँचने और व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास देते हैं।”

2014 में इन शरण कानूनों के तहत ICE को राइकर आइलैंड से हटाया गया था, जिससे वहां बंद प्रवासियों को निर्वासन (deportation) के लिए चुने जाने की प्रक्रिया पर रोक लगी थी। लेकिन अब मेयर एडम्स द्वारा जारी नया आदेश, एक दशक बाद ICE को दोबारा रिकर्स आइलैंड à¤®à¥‡à¤‚ सक्रिय होने की अनुमति देगा।

यह भी पढ़ें- à¤…मेरिका में ट्रांसनेशनल रेप्रेशन बिल से बढ़ी चिंता, हिंदू संगठनों का विरोध

काउंसिल सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यह कदम शहर की वर्षों की नीतिगत प्रगति को उलट देगा और हजारों प्रवासियों को एक बार फिर नगर जेल से संघीय हिरासत में पहुंचा सकता है। पत्र में बताया गया कि जब ICE पहले राइकर में मौजूद था, तब हर साल 3,000 से 4,000 लोग निर्वासित होते थे, जिनमें से कई अपने परिवारों और वकीलों से दूर रहते थे। इसके अलावा शहर को $50 मिलियन से अधिक की सालाना लागत भी झेलनी पड़ती थी।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह आदेश डोनाल्ड ट्रंप की कट्टरपंथी अप्रवासी नीतियों के अनुरूप है: “यह कार्यकारी आदेश न्यूयॉर्क की विविध प्रवासी आबादी में डर पैदा करने की कोशिश है और ट्रंप की नस्लवादी, अप्रवासी विरोधी नीतियों के आगे झुकने जैसा है।” पत्र में यह भी कहा गया है कि यह आदेश कानूनन मेयर के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह सिटी काउंसिल की विधायी शक्ति के खिलाफ जाता है: “न्यूयॉर्क सिटी में कानून बनाना काउंसिल का काम है, और हमने हमेशा साफ किया है कि हमारा शहर निर्वासन का समर्थक नहीं है।”

काउंसिल सदस्यों ने मेयर से तीन अहम मांगें रखी हैं:
कार्यकारी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए,
ICE की वापसी को लेकर संघीय सरकार से हुए सभी समझौतों और बातचीत को सार्वजनिक किया जाए,
शहर की जेलों में ICE की मौजूदगी और सहयोग पर बनी सभी नीतियों को सामने लाया जाए।
 

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