संसà¥à¤•ृत के पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ और BAPS सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– महामहोपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ डॉ. à¤à¤¦à¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¦à¤¾à¤¸ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ को 2024 के लिठसरसà¥à¤µà¤¤à¥€ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। उनकी किताब सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त सà¥à¤§à¤¾ के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ये पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिला है। ये समà¥à¤®à¤¾à¤¨ बीस साल से अधिक समय बाद फिर से संसà¥à¤•ृत साहितà¥à¤¯ को मिला है।
के.के. बिरला फाउंडेशन ने 1991 में सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ अवॉरà¥à¤¡ शà¥à¤°à¥‚ किया था। ये à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सबसे बड़े साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। हर साल ये अवॉरà¥à¤¡ किसी à¤à¤• बेहतरीन किताब को मिलता है। किताब समà¥à¤®à¤¾à¤¨ मिलने के पहले के 10 साल की अवधि के à¤à¥€à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤•ाशित होना चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा किताब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संविधान में शामिल 22 à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में से किसी में à¤à¥€ लिखी हो सकती है।
इस समà¥à¤®à¤¾à¤¨ के साथ 15 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का इनाम, à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤à¤¿ पतà¥à¤° और à¤à¤• पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ा शामिल है। इससे पहले ये समà¥à¤®à¤¾à¤¨ हरिवंश राय बचà¥à¤šà¤¨, महाशà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾ देवी और à¤à¤¸. à¤à¤². à¤à¥ˆà¤°à¤ªà¥à¤ªà¤¾ जैसे बड़े-बड़े लेखकों को मिल चà¥à¤•ा है। इस साल जसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ (रिटायरà¥à¤¡) अरà¥à¤œà¤¨ कà¥à¤®à¤¾à¤° सिकरी की अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ वाली सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ चयन परिषद ने ये फैसला किया है। इसमें कई और बड़े विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ à¤à¥€ शामिल थे।
'सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त सà¥à¤§à¤¾' 2022 में छपी थी। इसमें à¤à¤—वान सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताठगठअकà¥à¤·à¤°-पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® दरà¥à¤¶à¤¨ को समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ गया है। ये दरà¥à¤¶à¤¨ वेदांत का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ है। ये किताब पारंपरिक वडागà¥à¤°à¤‚थ शैली में लिखी गई है। इसमें इस दरà¥à¤¶à¤¨ की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ है और इसका बचाव à¤à¥€à¥¤ लोगों ने इसकी साफ à¤à¤¾à¤·à¤¾ और पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ दरà¥à¤¶à¤¨ को आज के जमाने से जोड़ने की बात की खूब तारीफ की है।
डॉ. à¤à¤¦à¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¦à¤¾à¤¸ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ने BAPS सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ रिसरà¥à¤š इंसà¥à¤Ÿà¤¿à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट के साथ काम करते हà¥à¤ संसà¥à¤•ृत के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में बहà¥à¤¤ बड़ा योगदान दिया है। उनकी 'सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ à¤à¤¾à¤·à¥à¤¯' नाम की पांच खंडों वाली किताब में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¤à¥à¤°à¤¯à¥€ (उपनिषद, à¤à¤—वदॠगीता और बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¸à¥‚तà¥à¤°) पर संसà¥à¤•ृत में वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ दी गई है। इससे अकà¥à¤·à¤°-पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® दरà¥à¤¶à¤¨ को सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° वेदांत परंपरा के तौर पर और à¤à¥€ मजबूती मिली है।
à¤à¤¦à¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¦à¤¾à¤¸ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ को पहले à¤à¥€ कई बड़े अवॉरà¥à¤¡ मिल चà¥à¤•े हैं। इनमें इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसरà¥à¤š (ICPR) का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉरà¥à¤¡, थाईलैंड की सिलà¥à¤ªà¤•ॉरà¥à¤¨ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ का वेदांत मारà¥à¤¤à¤‚ड समà¥à¤®à¤¾à¤¨ और काविकà¥à¤²à¤—à¥à¤°à¥ कालिदास संसà¥à¤•ृत विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से महामहोपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की उपाधि शामिल हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार ने आचारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤° की उपाधि से à¤à¥€ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया है। लखनऊ के बाबासाहेब à¤à¥€à¤®à¤°à¤¾à¤µ आंबेडकर विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने दरà¥à¤¶à¤¨ शासà¥à¤¤à¥à¤° में उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया। इसके अलावा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दरà¥à¤¶à¤¨à¤•ेसरी अवॉरà¥à¤¡, मैसूर विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° जी.à¤à¤®. मेमोरियल अवॉरà¥à¤¡ और शà¥à¤°à¥€ सोमनाथ संसà¥à¤•ृत विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से वेदांत पà¥à¤°à¤•ाश और अà¤à¤¿à¤¨à¤µ à¤à¤¾à¤·à¥à¤¯à¤•ार अवॉरà¥à¤¡ à¤à¥€ मिले हैं।
शà¥à¤°à¥€ काशी विदà¥à¤µà¤¤à¥ परिषद ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृत वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤•ारों की परंपरा में à¤à¤• आचारà¥à¤¯ के रूप में à¤à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी है। उनके पास M.A., Ph.D., D.Litt. और IIT खड़गपà¥à¤° से मानद D.Sc. की डिगà¥à¤°à¥€ है। महंत सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महाराज वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ और à¤à¤—वान सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ के छठे उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी हैं। वह अपने जà¥à¤žà¤¾à¤¨, विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ देते रहते हैं।
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