दीपावली के लिठदीपक पà¥à¤°à¤œà¥à¤œà¥à¤µà¤²à¤¿à¤¤ करते पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ महाराज। / BAPS
- तà¥à¤·à¤¾à¤° सोलंकी
हिंदू धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों और शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं में बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ पर अचà¥à¤›à¤¾à¤ˆ की जीत केवल à¤à¤• पौराणिक कथा नहीं है बलà¥à¤•ि à¤à¤• जीवंत दरà¥à¤¶à¤¨ है जो अनगिनत पीढ़ियों को धरà¥à¤® समà¥à¤®à¤¤ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता रहा है। रोशनी का हिंदू तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° दिवाली दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में लाखों लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बेहद खà¥à¤¶à¥€ और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ के साथ मनाया जाता है।
यह बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ पर अचà¥à¤›à¤¾à¤ˆ की विजय का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। यह 14 वरà¥à¤· के वनवास के बाद à¤à¤—वान राम और सीता जी की अयोधà¥à¤¯à¤¾ वापसी का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। जैसा कि रामायण की कहानी बताती है कि अयोधà¥à¤¯à¤¾ के लोगों ने अपने राजा और रानी के राजà¥à¤¯ में वापस आने का सà¥à¤µà¤¾à¤—त करने के लिठहजारों दीये जलाठथे। यह अंधेरे के अंत और धरà¥à¤® के à¤à¤• नठयà¥à¤— की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• था। दिवाली बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ पर सदाचार की आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• जीत और अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ तथा नकारातà¥à¤®à¤•ता को दूर करने वाले पà¥à¤°à¤•ाश को रेखांकित करती है।
यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° कई लोगों के लिठहिंदू नव वरà¥à¤· की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ à¤à¥€ करता है। घरों में दिवाली के दिन à¤à¤• पहला दीया जलाया जाता है और फिर उससे दूसरे दीयों को पà¥à¤°à¤œà¥à¤µà¤²à¤¿à¤¤ किया जाता है। यह इस बात का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है कि कैसे à¤à¤• छोटी सी लौ कई लोगों को रोशन कर सकती है, सामूहिक रूप से उस अंधेरे को दूर कर सकती है जो à¤à¤• समय वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था। यह काम à¤à¤• शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ अनà¥à¤¸à¥à¤®à¤¾à¤°à¤• के रूप में कारà¥à¤¯ करता है कि दिवाली केवल बाहरी उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में नहीं है, बलà¥à¤•ि यह à¤à¤• आंतरिक पà¥à¤°à¤•ाश का पोषण करने के बारे में à¤à¥€ है जो पूरे वरà¥à¤· जन-जन का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ कर सकता है।
इसके अनà¥à¤°à¥‚प दिवाली को आतà¥à¤®-चिंतन और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• नवीनीकरण के समय के रूप में देखा जाता है। यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपने अंदर à¤à¤¾à¤‚कने और अपने आंतरिक पà¥à¤°à¤•ाश को बनाठरखने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§ होने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करता है। यह लोगों को धरà¥à¤® का पालन करने और इस बात पर विचार करने की याद दिलाता है कि वे मन और हृदय की पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ को कैसे बनाठरख सकते हैं, जिसका उदाहरण à¤à¤—वान राम हैं। कई लोगों के लिठयह आंतरिक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ परम पावन पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महाराज की शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है जो अकà¥à¤¸à¤° कहते थे- दूसरों की खà¥à¤¶à¥€ में, हमारी अपनी खà¥à¤¶à¥€ होती है। उनका संदेश दिवाली की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ से गहराई से मेल खाता है। यह संदेश लोगों से अपने आंतरिक पà¥à¤°à¤•ाश को दूसरों तक बढ़ाने का आगà¥à¤°à¤¹ करता है। इससे बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ पर अचà¥à¤›à¤¾à¤ˆ, खà¥à¤¶à¥€ और दया का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पैदा होता है।
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महाराज ने अपने कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से अपनी शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं का उदाहरण दिया है। वरà¥à¤· 2002 में जब आतंकवादियों ने सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ अकà¥à¤·à¤°à¤§à¤¾à¤® मंदिर (गांधीनगर) पर हमला किया था (जिसमें à¤à¤• साधà¥, दरà¥à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ निरà¥à¤¦à¥‹à¤· नागरिक और कई राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सशसà¥à¤¤à¥à¤° बल मारे गà¤) तब पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महाराज ने सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ जनता से शांति बनाठरखने और खोठहà¥à¤ लोगों के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करने की अपील की ताकि बढ़ते जातीय तनाव को कम किया जा सके। शांति, सदà¥à¤à¤¾à¤µ और कà¥à¤·à¤®à¤¾ के लिठउनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के हजारों लोगों के दिल और दिमाग में गूंज उठी। संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका के कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€ à¤à¤‚थनी वीनर और जरà¥à¤®à¤¨à¥€ में आतंकवाद विरोधी समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ दोनों ने उनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को आतंकवाद के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आदरà¥à¤¶ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के रूप में उदà¥à¤§à¥ƒà¤¤ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उस शांतिपूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को 'अकà¥à¤·à¤°à¤§à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾' नाम दिया। इस तरह के विचारशील संकेत उदाहरण देते हैं कि कैसे अंधेरे समय के दौरान à¤à¥€ निसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¤à¤¾, सहिषà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ और सदà¥à¤à¤¾à¤µ की रोशनी उजà¥à¤œà¥à¤µà¤² रूप से चमक सकती है। इससे दूसरों को आराम और आशा मिलती है।
उनके आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी परम पावन महंत सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ महाराज सेवा और करà¥à¤£à¤¾ की इस विरासत को जारी रखते हैं। उनकी शिकà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚ इस बात पर जोर देती हैं कि दूसरों की लौ जलाना (चाहे करà¥à¤£à¤¾à¤®à¤¯à¥€ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से, सेवा कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से या देखà¤à¤¾à¤² के छोटे इशारों के माधà¥à¤¯à¤® से) दूर-दूर तक खà¥à¤¶à¥€ फैलाता है। वह अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को याद दिलाते हैं कि निसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¤à¤¾ को à¤à¤µà¥à¤¯ होने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं है। सरल, रोजमरà¥à¤°à¤¾ की गतिविधियों का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ गहरा हो सकता है इसलिठदूसरों पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालें और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को गहरा करें। वह लोगों को उन तरीकों के बारे में सोचने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करते हैं जिनसे वे न केवल दिवाली के दौरान बलà¥à¤•ि हर बातचीत और रिशà¥à¤¤à¥‡ में पूरे साल अपनी रोशनी साà¤à¤¾ कर सकें।
जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के घरों में जलाठगठदीये न केवल à¤à¤—वान राम की वापसी का जशà¥à¤¨ मनाà¤à¤‚गे बलà¥à¤•ि तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° की रोशनी को उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ से परे ले जाने के लिठà¤à¤• अनà¥à¤¸à¥à¤®à¤¾à¤°à¤• के रूप में à¤à¥€ काम करेंगे। दूसरों की खà¥à¤¶à¥€ और à¤à¤²à¤¾à¤ˆ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करके लोग पूरे वरà¥à¤· दिवाली की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को बनाठरख सकते हैं। इस तरह अंतिम दीया बà¥à¤à¤¨à¥‡ के बाद à¤à¥€ तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° के वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• अरà¥à¤¥ को जीया और अनà¥à¤à¤µ किया जा सकता है। इस दिवाली हम सà¤à¥€ दूसरों के लिठमारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ करने और निसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ à¤à¤¾à¤µ से जीने से मिलने वाली असीम खà¥à¤¶à¥€ की खोज करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ हों।
(लेखक बीà¤à¤ªà¥€à¤à¤¸ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾ के सदसà¥à¤¯ और डलास, टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ के फिनटेक बिजनेस सलाहकार हैं)
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