सिख धरà¥à¤® के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥ नानक देव जी का 555वां पà¥à¤°à¤•ाश परà¥à¤µ गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° सिनसिनाटी गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ साहिब की गà¥à¤°à¥ नानक सोसायटी में सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बड़ी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ के साथ मनाया गया। समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ ने इस शà¥à¤ अवसर पर तीन दिनों तक विशेष कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ का आयोजन किया।
à¤à¤¾à¤ˆ मेहल सिंह, à¤à¤¾à¤ˆ गà¥à¤°à¤²à¤¾à¤² सिंह और à¤à¤¾à¤ˆ जà¥à¤—राज सिंह के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कविशरी जतà¥à¤¥à¥‡ (समूह) को समारोह में à¤à¤¾à¤— लेने के लिठआमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया गया था। दूसरे दिन, निशान साहिब समारोह के बाद पंज पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ (पांच पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡) के नेतृतà¥à¤µ में और शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥ गà¥à¤°à¤‚थ साहिब जी की पवितà¥à¤° उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के साथ à¤à¤• नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ का आयोजन किया गया। नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ साहिब के आसपास के कई आवासीय इलाकों से होकर गà¥à¤œà¤°à¤¾à¥¤ इसमें डेटन जैसे पड़ोसी शहरों और इंडियाना तथा केंटकी जैसे राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से à¤à¥€ लोग शामिल हà¥à¤à¥¤
जà¥à¤²à¥‚स के दौरान पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ गà¥à¤°à¤‚थी à¤à¤¾à¤ˆ जगबीर सिंह जी के बेटे, 10वीं ककà¥à¤·à¤¾ के छातà¥à¤° शाहबाज़ सिंह और इंडियाना के गतका समूह के साथ जगजीत सिंह के मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ में छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और वयसà¥à¤•ों ने पारंपरिक सिख मारà¥à¤¶à¤² आरà¥à¤Ÿ गतका का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया। हाल ही में गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ साहिब में गतका ककà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚ शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆ थीं और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों ने अपने सीमित पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ समय के बावजूद उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय कौशल का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया। रासà¥à¤¤à¥‡ में सिख निवासियों ने संगत (मणà¥à¤¡à¤²à¥€) को गरà¥à¤® दूध, पानी, फल और मिठाई सहित लंगर (मà¥à¤«à¥à¤¤ सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨) की पेशकश की।
इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ अमेरिकियों को à¤à¥€ सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ का अà¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¤¨ करने और सिख धरà¥à¤® के बारे में अधिक जानने के लिठअपने घरों से बाहर निकलते देखा गया। उनके मेलजोल और परसà¥à¤ªà¤° संवाद ने अधिक सांसà¥à¤•ृतिक समठऔर सदà¥à¤à¤¾à¤µ को बढ़ावा दिया।
अंतिम दिन अखंड पाठसाहिब (गà¥à¤°à¥ गà¥à¤°à¤‚थ साहिब का निरंतर पाठ) à¤à¥‹à¤— समारोह के साथ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® संपनà¥à¤¨ हà¥à¤à¥¤ मà¥à¤–à¥à¤¯ गà¥à¤°à¤‚थी और उपदेशक à¤à¤¾à¤ˆ जगबीर सिंह जी ने गà¥à¤°à¥ नानक देव जी के जीवन और शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं पर जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤°à¥à¤§à¤• पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ दिया। à¤à¤¾à¤ˆ गà¥à¤°à¤¬à¤‚त सिंह, à¤à¤¾à¤ˆ जीत सिंह और à¤à¤¾à¤ˆ रविंदर सिंह के कीरà¥à¤¤à¤¨ जतà¥à¤¥à¥‡ ने गà¥à¤°à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ की मधà¥à¤° पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दीं। à¤à¤¾à¤ˆ मेहल सिंह जी के समूह ने अपनी à¤à¤¾à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कविता से संगत को मंतà¥à¤°à¤®à¥à¤—à¥à¤§ कर दिया।
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान लगातार लंगर चलता रहा। पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन समिति ने नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ और अनà¥à¤¯ गतिविधियों के दौरान उनके समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठसà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों, संगत और वेसà¥à¤Ÿ चेसà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤²à¤¿à¤¸ विà¤à¤¾à¤— का आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया।
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