वकà¥à¤°à¤¤à¥à¤‚ड महाकाय सूरà¥à¤¯à¤•ोटि समपà¥à¤°à¤... सà¥à¤¬à¤¹ के 7 बजे हैं। इस वरà¥à¤· के हिंदू विरासत यà¥à¤µà¤¾ शिविर (वरिषà¥à¤ सतà¥à¤°) के 160 शिविरारà¥à¤¥à¥€ इस खà¥à¤²à¥€-चमकदार सà¥à¤¬à¤¹ à¤à¤• शाखा के दौरान शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• पà¥à¤°à¤¥à¤¾ सà¥à¤®à¤°à¤£ का पाठकर रहे हैं। पà¥à¤°à¤¥à¤® वरà¥à¤· के परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ शान पारेख कहते हैं कि सूरà¥à¤¯ नमसà¥à¤•ार के दौरान सà¤à¥€ के à¤à¤• साथ आने से सà¥à¤¬à¤¹ की ताजा शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ वासà¥à¤¤à¤µ में à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ दिन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ करने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है।
इस वरà¥à¤· HHYC (हिंदू हेरिटेज यूथ कैंप) की 1984 में पहली बार सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के बाद से इसकी सफल यातà¥à¤°à¤¾ की 40वीं वरà¥à¤·à¤—ांठहै। हर साल हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के यà¥à¤µà¤¾ HHYC के लिठà¤à¤• साथ आते हैं। यह चौथी से 12वीं ककà¥à¤·à¤¾ के छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤• गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤®à¤•ालीन शिविर है। शिविरारà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अकà¥à¤¸à¤° इसे 'वरà¥à¤· के सबसे अचà¥à¤›à¥‡ पांच दिन' के रूप में उदà¥à¤§à¥ƒà¤¤ किया जाता है।
पिछले 4 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से HHYC को हर साल शिविर सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ की जगह बदलनी पड़ती थी मगर इस साल HHYC को अपनी 40वीं वरà¥à¤·à¤—ांठपर कोलंबस, टेकà¥à¤¸à¤¸ में अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ ठिकाने द टेकà¥à¤¸à¤¸ हिंदू कैंपसाइट में उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤· के रूप में राहत मिली है। टेकà¥à¤¸à¤¸ हिंदू कैंपसाइट (THC) के उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ के साथ HHYC के पास अब आने वाली पीढ़ियों के लिठà¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ कैंप अनà¥à¤à¤µ का अवसर है।
यह न केवल शिविर के अनà¥à¤à¤µ हैं जो परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं और शिविरारà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को हर साल इसके लिठवापस लाते हैं, बलà¥à¤•ि यह à¤à¤• हमेशा बनी रहने वाली मितà¥à¤°à¤¤à¤¾ है जो वे अपने समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लोगों के साथ विकसित करते हैं। हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में चौथे वरà¥à¤· के परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ और वरिषà¥à¤ वितà¥à¤¤ छातà¥à¤° अमन पटेल कहते हैं कि इन 5 दिनों में हम जो समय बिताते हैं वह जीवन बदल देता है...और यह वह समय है जिसकी यादें लंबे समय तक बनी रहती हैà¤à¥¤
HHYC का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ हिंदू यà¥à¤µà¤¾à¤“ं को à¤à¤• साथ लाकर उनà¥à¤¹à¥‡ अपने धरà¥à¤® की समृदà¥à¤§à¤¿ और इससे जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ लोक वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° के बारे में जानकारी देना है। à¤à¤• उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ समानधरà¥à¤®à¥€ लोगों के साथ मितà¥à¤°à¤¤à¤¾ कायम करना à¤à¥€ है ताकि वह जीवन में मददगार बने। यह à¤à¤• तरह की सहायता पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ है जिसे शिविर परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं और साथी शिविरारà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ समान रूप से विकसित किया जाता है। कैंप करने वाले यà¥à¤µà¤¾ परसà¥à¤ªà¤° संबंध विकसित करते हैं और खà¥à¤¦ को साà¤à¤¾ हिंदू-अमेरिकी पहचान के साथ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ पाते हैं।
शिविर में दिन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ और शिविरारà¥à¤¥à¥€ सूरà¥à¤¯ नमसà¥à¤•ार करने के लिठबासà¥à¤•ेटबॉल कोरà¥à¤Ÿ में à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ होने से करते हैं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है परामरà¥à¤¶à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ योग, वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® और मनोरंजक खेलों का आयोजन करते हैं। शाम को à¤à¤œà¤¨ संधà¥à¤¯à¤¾ जैसा माहौल रहता है। यहां फिर सब लोग साथ होते हैं। शिविर के दिनों में डॉजबॉल, गरबा, टैलेंट शो या होली-दिवाली जैसी उतà¥à¤¸à¤µ गतिविधियों का आयोजन होता रहता है।
(ऋतà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤¡à¥à¤ªà¥à¤—ंती ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨, टेकà¥à¤¸à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में à¤à¤• उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ वरिषà¥à¤ हैं)
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