अमेरिका के हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ में शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥à¤µà¤¯à¥à¤°à¤ªà¥à¤ªà¤¨ मंदिर में अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ रोहिणी का à¤à¤µà¥à¤¯ तरीके से आयोजन किया गया। इसे जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। जिसमें à¤à¤—वान कृषà¥à¤£ के जनà¥à¤® का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करने के लिठबड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में à¤à¤•à¥à¤¤ जमा हà¥à¤à¥¤ समारोह की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ शोà¤à¤¾ यातà¥à¤°à¤¾ से हà¥à¤ˆà¥¤
इस दौरान शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥à¤µà¤¯à¥à¤°à¤ªà¥à¤ªà¤¨ की मूरà¥à¤¤à¤¿ को सजाठगठरथ में मंदिर के चारों ओर ले जाया गया। à¤à¤œà¤¨ और पारंपरिक वादà¥à¤¯à¤¯à¤‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ की धà¥à¤µà¤¨à¤¿ गूंज रही थी। जà¥à¤²à¥‚स का समापन रथ के मंदिर में वापस लाठजाने के साथ हà¥à¤†à¥¤ इसके बाद दीप आरधना समारोह हà¥à¤†à¥¤ सैकड़ों à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ ने इस अनà¥à¤·à¥à¤ ान में à¤à¤¾à¤— लिया, जिससे मंदिर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से गूंज उठा।
समारोह का à¤à¤• विशेष आकरà¥à¤·à¤£ शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥à¤µà¤¯à¥à¤°à¤ªà¥à¤ªà¤¨ को चंदन का उपयोग करके उनà¥à¤¨à¥€ कनà¥à¤¨à¤¾à¤¨, कृषà¥à¤£ के दिवà¥à¤¯ बाल रूप के रूप में सजाना था। मंदिर ने सांसà¥à¤•ृतिक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ की à¤à¤• शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला à¤à¥€ आयोजित की। इसमें गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के यà¥à¤µà¤¾ कलाकारों ने पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया। पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के नृतà¥à¤¯, गायन और वादà¥à¤¯ संगीत शामिल थे, जो समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की समृदà¥à¤§ सांसà¥à¤•ृतिक विविधता और कलातà¥à¤®à¤• विरासत को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हैं।
इस आयोजन में विशेष अतिथियों ने पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ अनà¥à¤·à¥à¤ ानों को पूरा किया और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं की सराहना की। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का समापन महिलाओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठपारंपरिक लोक नृतà¥à¤¯ के साथ हà¥à¤†à¥¤
अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ रोहिणी (जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€) का खगोलीय, आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, सांसà¥à¤•ृतिक और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤µ का महतà¥à¤µ है। यह à¤à¤—वान कृषà¥à¤£ के जनà¥à¤® का जशà¥à¤¨ मनाता है। मथà¥à¤°à¤¾ नरेश कंस के अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° का अंत करने वाले दिवà¥à¤¯ हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª को समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ करता है। à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤ªà¤¦ की रोहिणी नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° और अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ तिथि पर मनाया जाने वाला यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° कृषà¥à¤£ के जनà¥à¤®, दिवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤® और धारà¥à¤®à¤¿à¤•ता के अवतार होने का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मनाठजाने वाले उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ में आम तौर पर उपवास, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ गीत, नृतà¥à¤¯ और कृषà¥à¤£ के जीवन का पà¥à¤¨à¤°à¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन शामिल होता है। जैसे महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में दही हांडी और केरल में उरियडी। इस दौरान मंदिरों को सजाया जाता है, पूजाà¤à¤‚ की जाती हैं। कृषà¥à¤£ के पसंदीदा पकवान तैयार किठजाते हैं। केरल में, उनà¥à¤¨à¥€ कनà¥à¤¨à¤¾à¤¨ का रूप कृषà¥à¤£ की मासूमियत और आनंद का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° कृषà¥à¤£ के उपदेशों और दिवà¥à¤¯ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का à¤à¤• गहरा सà¥à¤®à¤°à¤£à¤ªà¤¤à¥à¤° है।
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