बहà¥à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृतिवाद के संदेश और à¤à¤• समृदà¥à¤§ लोकतंतà¥à¤° के लिठसांसà¥à¤•ृतिक पहचान को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने के लिठइंडिया हाउस फाउंडेशन और इंडिया कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ सेंटर ने कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में शनिवार, 7 जून को 'संगत: आतà¥à¤®à¤¾, à¤à¤•ता और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ का à¤à¤• संगीतमय समागम' का आयोजन किया।
200 से अधिक लोगों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वाले इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में कलाकारों और सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• नेताओं ने à¤à¤¾à¤— लिया और इस बात पर चरà¥à¤šà¤¾ की कि सांसà¥à¤•ृतिक पहचान और कलातà¥à¤®à¤• अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लोकतंतà¥à¤° को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने में कैसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उपकरण के रूप में काम कर सकती हैं।
जैसे-जैसे बहà¥à¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•वाद, बहिषà¥à¤•ार की राजनीति और बहà¥à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृतिवाद पर हमले लोकतांतà¥à¤°à¤¿à¤• मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और समावेशी नागरिक à¤à¤¾à¤—ीदारी का समरà¥à¤¥à¤¨ करने वाले सामाजिक ताने-बाने को खतरे में डाल रहे हैं, समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ विविधता में à¤à¤•ता का संदेश साà¤à¤¾ करने के लिठà¤à¤•जà¥à¤Ÿ होते हैं।
शाम का मà¥à¤–à¥à¤¯ आकरà¥à¤·à¤£ अफगान अमेरिकी रबाब कलाकार कैस à¤à¤¸à¥à¤¸à¤¾à¤° और सिख अमेरिकी संगीतकार सनी सिंह के बीच सांगीतिक सहयोग था। उनका पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ संगत, सदियों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ संगीत परंपराओं और सिख, सूफी और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ विरासत की आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• कविताओं पर आधारित है, जो धारà¥à¤®à¤¿à¤• और सांसà¥à¤•ृतिक रेखाओं के पार à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ का à¤à¤• शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ संदेश देता है। इस पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में वायलिन वादक रोजीहट ईव और तबला वादक जà¥à¤à¤¾à¤° सिंह à¤à¥€ शामिल थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤µà¤° और हारमोनियम के साथ मधà¥à¤° धà¥à¤¨à¥‹à¤‚ का मिशà¥à¤°à¤£ किया।
इंडिया हाउस फाउंडेशन की कारà¥à¤¯à¤•ारी निदेशक निदा हसन ने कहा कि संगत à¤à¤• पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ से कहीं बढ़कर था। यह à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ और à¤à¤•ता का समागम था। à¤à¤¯ से विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ होती दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में कैस और सनी ने हमें याद दिलाया कि संगीत सà¥à¤®à¤°à¤£, उपचार और à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ का à¤à¤• कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी कारà¥à¤¯ हो सकता है।
सनी सिंह, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हाल ही में à¤à¤¸à¥à¤¸à¤¾à¤° के साथ संगत परियोजना शà¥à¤°à¥‚ की, अपने काम के पीछे की तातà¥à¤•ालिकता को समà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। वे कहते हैं कि कोई à¤à¥€ देश बिना विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि और पहचान वाले समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के नागरिक जीवन में समान तरीके से à¤à¤¾à¤— लिठखà¥à¤¦ को लोकतंतà¥à¤° नहीं कह सकता। सतà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¦à¥€ और वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µà¤µà¤¾à¤¦à¥€ हाशिये पर पड़े लोगों पर निरà¥à¤à¤° करते हैं, चाहे वे धारà¥à¤®à¤¿à¤• अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤• हों, जाति-उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¿à¤¤ लोग हों, या समलैंगिक और टà¥à¤°à¤¾à¤‚सजेंडर लोग हों, जो निराशा और निराशा महसूस करते हैं और नागरिक à¤à¤¾à¤—ीदारी से अलग हो जाते हैं। इसलिठयह हमारी जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है कि हम अपने समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ को संगठित करें और सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि हम जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहें और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• लोकतंतà¥à¤° के लिठशकà¥à¤¤à¤¿ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करें।
सांगीतिक पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के बाद निदा हसन ने लोकतांतà¥à¤°à¤¿à¤• समाजों को बनाठरखने में बहà¥à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृतिवाद की à¤à¥‚मिका पर à¤à¤• संवाद का नेतृतà¥à¤µ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संवाद कितना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
निदा ने कहा कि जब अलग-अलग पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि-संसà¥à¤•ृति, धरà¥à¤®, नसà¥à¤²-के लोग à¤à¤• साथ आते हैं, à¤à¤•-दूसरे की कहानियां सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं और à¤à¤•-दूसरे से सीखते हैं तो यह उन पूरà¥à¤µà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ को तोड़ने में मदद करता है जो अकà¥à¤¸à¤° अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ के डर से पैदा होते हैं।
हसन ने लोकतंतà¥à¤° की रकà¥à¤·à¤¾ में कला और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की शकà¥à¤¤à¤¿ के बारे में à¤à¥€ बताया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि कला और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ à¤à¤• साथ चलते हैं। साथ मिलकर वे à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करते हैं, साà¤à¤¾ मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को बढ़ाते हैं और उन ताकतों के खिलाफ़ आवाज उठाते हैं जो संसà¥à¤•ृति को मिटाना या à¤à¤•रूप बनाना चाहती हैं।
कला और आयोजन दोनों हमें याद दिलाते हैं कि सांसà¥à¤•ृतिक पहचान सà¥à¤¥à¤¿à¤° नहीं है। यह कà¥à¤› à¤à¤¸à¤¾ है जिसे हम पोषित करते हैं, साà¤à¤¾ करते हैं और आगे बढ़ाते हैं, यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ कि हमारे इतिहास और आवाजें जीवित और पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक बनी रहें।
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