मेवाड़ के राजा महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª जयंती के उपलकà¥à¤·à¥à¤¯ में 'मैं à¤à¤¾à¤°à¤¤ हूं' ने मà¥à¤‚बई की फिलà¥à¤® सिटी के बॉलीवà¥à¤¡ पारà¥à¤• में à¤à¤• नाटक का आयोजन किया। इस नाटक का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ राजपूत नेता दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ देशà¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और वीरता जैसे मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को संजोना था।
मैं à¤à¤¾à¤°à¤¤ हूं... टीम ने बिजय, शोà¤à¤¾, अरà¥à¤£ मà¥à¤‚दà¥à¤°à¤¾, निशा, गोविंद के नेतृतà¥à¤µ में 2024 में à¤à¥€ इसी तरह का उतà¥à¤¸à¤µ आयोजित किया था। तब à¤à¥€ नाटà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ को लोगों ने खासा पसंद किया था।
यह नाटक महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª के जीवन का उतà¥à¤¸à¤µ था और उनके जीवन के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं पर पà¥à¤°à¤•ाश डालता था। इसमें पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª के बचपन और à¤à¤• राजकà¥à¤®à¤¾à¤° तथा à¤à¤• राजा के रूप में उनके सामने आने वाली चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का वरà¥à¤£à¤¨ किया गया।
महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª मेवाड़ के à¤à¤• राजपूत शासक थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने साहस और देशà¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ को मूरà¥à¤¤ रूप देते हà¥à¤ मà¥à¤—लों के वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ का जमकर विरोध किया। 1576 में हलà¥à¤¦à¥€ घाटी के यà¥à¤¦à¥à¤§ में उनका रà¥à¤– à¤à¤¾à¤°à¥€ बाधाओं के खिलाफ अटूट अवजà¥à¤žà¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• बना हà¥à¤† है। आधà¥à¤¨à¤¿à¤• राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में जनà¥à¤®à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª, सिसोदिया राजपूत वंश के 13वें राजा थे।
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