नà¥à¤¯à¥‚ यॉरà¥à¤• के हरिदास और शारदा कोटाहवाला ने अमृतसर में वरिंदर à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ की तरफ से आयोजित 12वें आंखों के कैंप को सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¸à¤° किया। ये कैंप उन लोगों को फà¥à¤°à¥€ आंखों की जांच और चशà¥à¤®à¥‡ देने के लिठथा, जिनकी आंखों की रोशनी कमजोर है। ये à¤à¤¸à¥‡ लोग हैं जो इलाज का खरà¥à¤šà¤¾ उठा नहीं सकते। इनमें बà¥à¤œà¤¼à¥à¤°à¥à¤— लोग à¤à¥€ शामिल थे, जो कमजोर रोशनी की वजह से अपनी रोजमरà¥à¤°à¤¾ की जिंदगी में मà¥à¤¶à¥à¤•िलों का सामना कर रहे थे। इसके अलावा à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ थे जिनको कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤°à¥‚म में बà¥à¤²à¥ˆà¤•बोरà¥à¤¡ साफ नहीं दिखता था। जिस कारण उनकी पढ़ाई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो रही थी।
अमृतसर के रहने वाले और नà¥à¤¯à¥‚ यॉरà¥à¤• के नासाउ काउंटी के पूरà¥à¤µ कमिशà¥à¤¨à¤° वरिंदर à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ ने अपने पिता की याद में जनवरी 2023 में पहला आंखों का शिविर शà¥à¤°à¥‚ किया था। उनके पिता ने हमेशा से à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ बà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤‚ड सà¥à¤•ूल के दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¬à¤¾à¤§à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की काफी मदद की थी। इस पहले शिविर में पंजाब की कई बड़ी हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ शामिल हà¥à¤ˆ थीं। इनमें सांसद गà¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ सिंह औजला, पंजाब के पूरà¥à¤µ उप मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ओम पà¥à¤°à¤•ाश सोनी और उस वकà¥à¤¤ के अमृतसर के कमिशà¥à¤¨à¤° संदीप रिषि शामिल थे।
वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• जरूरतमंदों तक ही फायदा पहà¥à¤‚चे, इसके लिठपहले पूरी तरह से जांच की जाती है कि कौन आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से कमजोर है। इसके बाद चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ लोगों की आंखों की जांच कंपà¥à¤¯à¥‚टर और परंपरागत तरीकों से की जाती है। जिन लोगों को मायोपिया, हाइपरऑपिया, या à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¥à¤® जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤° चशà¥à¤®à¥‡ के नंबर बताते हैं। मरीज अपनी पसंद के फà¥à¤°à¥‡à¤® à¤à¥€ चà¥à¤¨ सकते हैं। आखिर में, नेतà¥à¤° शिविर में ही सबको चशà¥à¤®à¥‡ बांटे जाते हैं।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से अब तक अमृतसर में 12 नेतà¥à¤° शिविर आयोजित किठजा चà¥à¤•े हैं, जिनसे लगà¤à¤— 1200 लोगों को लाठहà¥à¤† है। हर महीने नेतà¥à¤° शिविर लगाठजाते हैं। हालांकि जब मौसम बेहद खराब होता है तो शिविर नहीं लगाया जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तब इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• रूप से चलाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल और बहà¥à¤¤ महंगा पड़ता है।
अमृतसर के à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ समाजसेवी सतीश देवगन ने à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ परिवार की तारीफ करते हà¥à¤ कहा, 'ये नà¥à¤¯à¥‚ यॉरà¥à¤• में हजारों मील दूर बैठे हैं, मगर अपने पैतृक पंजाब के जरूरतमंद लोगों का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखते हैं।' देवगन आगे कहते हैं कि कोटाहवालों का ये नेक काम और à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से हैं और पिछले छह दशकों से नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• में बस गठहैं, फिर à¤à¥€ अमृतसर के जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं।
कोटाहवाला परिवार, नà¥à¤¯à¥‚ यॉरà¥à¤• और à¤à¤¾à¤°à¤¤ दोनों जगह अपने परोपकारी कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठजाने जाते हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनके चैरिटेबल कामों के लिठकई पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार और समà¥à¤®à¤¾à¤¨ मिल चà¥à¤•े हैं। लॉनà¥à¤— आइलैंड के à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ परिवार दिलà¥à¤²à¥€ में AWB फूड बैंक à¤à¥€ चलाते हैं। यह बैंक होटलों, à¤à¤¯à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨à¥à¤¸ और इंडसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ किचन से बचा हà¥à¤† खाना इकटà¥à¤ ा करता है और उसे गरीब और असहाय लोगों में बांटता है। à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ की दिवंगत मां आजà¥à¤žà¤¾à¤µà¤‚ती à¤à¤²à¥à¤²à¤¾ के नाम पर बना यह AWB फूड बैंक 1991 में शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† है।
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