पेनà¥à¤¸à¤¿à¤²à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कॉलेज कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ हतà¥à¤¯à¤¾ के आरोप में 40 साल से जेल की सजा काट रहे सà¥à¤¬à¥à¤°à¤®à¤£à¥à¤¯à¤® वेदम के लिठनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की मांग उठाई है। 40 साल पहले अपने दोसà¥à¤¤ की हतà¥à¤¯à¤¾ में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दोषी ठहराया गया था। हालांकि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तब गà¥à¤¹à¤¾à¤° लगाई थी कि यह हतà¥à¤¯à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नहीं की। दशकों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ हतà¥à¤¯à¤¾ के इस मामले ने कà¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कॉलेज को à¤à¤•à¤à¥‹à¤° दिया था। मामले में सबूतों की नई ने इस मामले को फिर से लोगों के जेहन में जिंदा कर दिया है। मामले की ताजा सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ 6-7 फरवरी को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ काउंसिल में निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ है।
मामला कà¥à¤¯à¤¾ है
दिसंबर 1980 में थॉमस किनà¥à¤¸à¤° (19) अचानक लापता हो गया था और महीनों बाद उसका शव बरामद हà¥à¤†à¥¤ उसके सिर के पीछे गोली के घाव थे। उस समय 21 साल के सà¥à¤¬à¥à¤°à¤®à¤£à¥à¤¯à¤® वेदम किनà¥à¤¸à¤° के पूरà¥à¤µ रूममेट और सहपाठी थे। उन पर फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ-डिगà¥à¤°à¥€ हतà¥à¤¯à¤¾ का आरोप लगाया गया और उसे पैरोल के बिना आजीवन कारावास की सजा दे दी गई।
वेदम के बचाव पकà¥à¤· के वकील गोपाल बालाचंदà¥à¤°à¤¨ ने मामले को फिर से खोलने के लिठकहा है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हाल ही में पता चला कि गोली के खोल और घाव के आकार सहित सबूत, जो वेदम को दोषी ठहरा सकते थे, कथित तौर पर 80 के दशक में मूल परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के दौरान रोक दिठगठथे।
मà¥à¤•दमे में à¤à¤«à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ के मेडिकल परीकà¥à¤·à¤• की रिपोरà¥à¤Ÿ से पता चला है कि किनà¥à¤¸à¤° की खोपड़ी में गोली का घाव वेदम की 25-कैलिबर बंदूक से बनाठजाने वाले घाव से बिलà¥à¤•à¥à¤² अलग हैं।
बालचंदà¥à¤°à¤¨ ने कहा, "सबूत उस बात का समरà¥à¤¥à¤¨ करते हैं जो वेदम हमेशा से कहता रहा है कि उसने हतà¥à¤¯à¤¾ नहीं की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, “वे (à¤à¤«à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ) जानबूà¤à¤•र असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ बातें कर रहे थे और जितना संà¤à¤µ हो उतना कम खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ कर रहे थे। हम केस के दोबारा खà¥à¤²à¤¨à¥‡ पर खà¥à¤¶ हैं और वेदम को इंसाफ दिलाने के लिठपूरा जोर लगा देंगे।"
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की रैलियां
वेदम परिवार, जो सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कॉलेज में पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ में से थे, ने इंसाफ के लिठà¤à¤• बार फिर आवाज बà¥à¤²à¤‚द की है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कॉलेज में पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ निवासियों में से à¤à¤•, à¤à¥‚षण जयराव, जो वेदम परिवार को जानते थे, ने कहा, "यह सहना बहà¥à¤¤ कठिन था - विशेष रूप से इस देश में नठहोने के कारण - à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ को कैद में रखा जाना। जब आप कà¥à¤› समय के बाद लोगों को इसके बारे में बात करते हà¥à¤ सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ करते हैं, तब à¤à¥€ आप यह विचार उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने में विफल रहते हैं कि वेदम ने कà¥à¤› गलत किया है।"
वेदम की बहन सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ ने कहा, "à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ उस फैसले से बहà¥à¤¤ दà¥à¤–ी हो गया था। अदालत की तारीख नजदीक आने के साथ, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ को उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि इस बार नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ होगा।"
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