à¤à¤¾à¤°à¤¤ की समृदà¥à¤§ सांसà¥à¤•ृतिक धरोहर को नमन करते हà¥à¤ HindiUSA सेंट लà¥à¤ˆà¤¸ ने अपने तीसरे सालाना सांसà¥à¤•ृतिक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® 'हमारी विरासत, हमारी पहचान' का आयोजन बेहद गरà¥à¤µ और उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ के साथ किया। इस à¤à¤µà¥à¤¯ समारोह में 450 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहमान, परिवार, विशिषà¥à¤Ÿ अतिथि और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लोग शामिल हà¥à¤à¥¤ सà¤à¥€ ने HindiUSA परिवार के नौजवान बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जीवंत किठगठà¤à¤¾à¤°à¤¤ के गौरवशाली इतिहास की रोमांचक यातà¥à¤°à¤¾ को देखा और महसूस किया।
ढाई घंटे का ये कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® à¤à¤• रंगीन à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• तसà¥à¤µà¥€à¤° की तरह सामने आया। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ चंदà¥à¤°à¤—à¥à¤ªà¥à¤¤ मौरà¥à¤¯ और समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ अशोक की दूरदरà¥à¤¶à¥€ नेतृतà¥à¤µ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ से हà¥à¤ˆà¥¤ फिर पृथà¥à¤µà¥€ राज चौहान, महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª, तानाजी मालसà¥à¤°à¥‡, छतà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शिवाजी महाराज और रानी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€à¤¬à¤¾à¤ˆ के अदमà¥à¤¯ साहस की दासà¥à¤¤à¤¾à¤¨ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ गई। सावितà¥à¤°à¥€à¤¬à¤¾à¤ˆ फà¥à¤²à¥‡ जैसे सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•ों के योगदान और महातà¥à¤®à¤¾ गांधी के शाशà¥à¤µà¤¤ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को à¤à¥€ बड़े ही सलीके और गहराई से पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के जांबाज सैनिकों को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤• जोशीली पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ ने सà¤à¥€ के रगों में देशà¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ की लहरें दौड़ा दीं। आखिरी परफॉरà¥à¤®à¥‡à¤‚स 'सà¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤Ÿ ऑफ इंडिया' ने तो समा ही बांध दिया। इसे HindiUSA के शिकà¥à¤·à¤•ों ने पेश किया था और दरà¥à¤¶à¤•ों पर इसकी गहरी छाप बनी रही।
इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को और à¤à¥€ खास बनाया शिकागो में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वाणिजà¥à¤¯ दूतावास के सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• मामलों के काउंसिल हेड विनोद गौतम और चेसà¥à¤Ÿà¤°à¤«à¥€à¤²à¥à¤¡ सिटी के काउंसिल सदसà¥à¤¯ गैरी बà¥à¤¦à¥‚र की मौजूदगी ने। इनकी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ ने à¤à¤• बार फिर साबित किया कि सांसà¥à¤•ृतिक शिकà¥à¤·à¤¾ कितनी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है और HindiUSA इस दिशा में समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ पर कितना गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डाल रहा है।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के दौरान à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पल आया जब HindiUSA के पांच छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को सील ऑफ बाइलिटरेसी (दà¥à¤µà¤¿à¤à¤¾à¤·à¥€à¤¯ दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ पदक) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया। इनमें से दो छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ ने à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚सà¥à¤¡ सील हासिल किया, जो अपने आप में मिसौरी राजà¥à¤¯ के इतिहास में पहली उपलबà¥à¤§à¤¿ है। ये à¤à¤• चमकता उदाहरण है कि जब छातà¥à¤°, माता-पिता और शिकà¥à¤·à¤• मिलकर à¤à¤• साà¤à¤¾ लकà¥à¤·à¥à¤¯ के लिठजà¥à¤Ÿà¤¤à¥‡ हैं, तो हिंदी à¤à¤¾à¤·à¤¾ को ऊंचाइयों तक ले जाना असंà¤à¤µ नहीं रह जाता।
इस सफल शाम के पीछे 65 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों की दिन-रात मेहनत छिपी थी, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बैकसà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ सपोरà¥à¤Ÿ से लेकर रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, ऑडियो-वीडियो, सजावट और मेहमानों के सà¥à¤µà¤¾à¤—त तक हर छोटी-बड़ी चीज का बारीकी से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा। नतीजा ये रहा कि पूरा कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® à¤à¤•दम सहज और अविसà¥à¤®à¤°à¤£à¥€à¤¯ बन गया।
आज से सात साल पहले महज 22 छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के साथ मयंक जैन और डॉ. अंशॠजैन ने जिस संसà¥à¤¥à¤¾ की नींव रखी थी, वो अब मिडवेसà¥à¤Ÿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° का सबसे बड़ा गैर-सरकारी, सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित हिंदी à¤à¤¾à¤·à¤¾ सà¥à¤•ूल बन चà¥à¤•ा है। HindiUSA सेंट लà¥à¤ˆà¤¸ निरंतर à¤à¤• मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• की à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾ रहा है। जो गरà¥à¤µ, पहचान और जड़ों से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ को à¤à¤•-à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡, à¤à¤•-à¤à¤• परिवार और à¤à¤•-à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ के जरिठसहेज रहा है।
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