शॉमà¥à¤¬à¤°à¥à¤— में नेशनल इंडिया हब के हॉल में रविवार, 6 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को उस समय पंजाबी संसà¥à¤•ृति की जीवंत à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ गूंज रही थी जब मधà¥à¤¯-पशà¥à¤šà¤¿à¤® से पंजाबी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ पंजाबी साहितà¥à¤¯ और विरासत पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने के साथ अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मातृà¤à¤¾à¤·à¤¾ दिवस मनाने के लिठà¤à¤•जà¥à¤Ÿ हà¥à¤†à¥¤ शाम 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक चलने वाला यह कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® कविता, गदà¥à¤¯ और शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ विचारों का à¤à¤• समृदà¥à¤§ मिशà¥à¤°à¤£ था। इसके बाद सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• रातà¥à¤°à¤¿à¤à¥‹à¤œ का आयोजन किया गया।
यूà¤à¤¸ मिडवेसà¥à¤Ÿ के पंजाबी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित इस समारोह में पंजाबी के गहरे सांसà¥à¤•ृतिक और साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• महतà¥à¤µ को रेखांकित किया गया। पंजाबी 5,500 साल पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समृदà¥à¤§ इतिहास वाली à¤à¤¾à¤·à¤¾ है। इस वरà¥à¤· का उतà¥à¤¸à¤µ विशेष महतà¥à¤µ रखता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मातृà¤à¤¾à¤·à¤¾ दिवस की रजत जयंती की 25वीं वरà¥à¤·à¤—ांठके साथ मेल खाता है। इसे पहली बार 1999 में यूनेसà¥à¤•ो दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤ˆ और सांसà¥à¤•ृतिक विविधता को बढ़ावा देने के लिठघोषित किया गया था।
इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में कई पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पंजाबी लेखक, कवि और विचारक शामिल हà¥à¤à¥¤ इनमें साहितà¥à¤¯ अकादमी और संगीत नाटक अकादमी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार विजेता डॉ. आतà¥à¤®à¤œà¥€à¤¤, रविंदर सिंह सहरा, राज लाली बटाला, कशिश होशियारपà¥à¤°à¥€, साजिद चौधरी, आबिद रशीद, रकींद कौर, गà¥à¤°à¤²à¥€à¤¨ कौर, ताहिरा रिदा, अमृत पाल कौर, गà¥à¤°à¤¬à¤–à¥à¤¶ रंधावा और गà¥à¤²à¤¾à¤® मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤«à¤¾ अंजà¥à¤® शामिल थे। उनकी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ ने दरà¥à¤¶à¤•ों पर गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ छोड़ा, जो अपनी जड़ों से फिर से जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ के लिठउतà¥à¤¸à¥à¤• थे।
मà¥à¤–à¥à¤¯ अतिथि शà¥à¤°à¥€ सोमनाथ घोष ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मंच पर पंजाबी बोलते देख गहरी खà¥à¤¶à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ की और इसे अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मातृà¤à¤¾à¤·à¤¾ दिवस की सचà¥à¤šà¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बताया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाबी और बंगाली सहित कई कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚ वैशà¥à¤µà¤¿à¤• आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और डिजिटल ताकतों के कारण दबाव में हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आगà¥à¤°à¤¹ किया कि हमें अपनी à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और बढ़ावा देने के लिठपà¥à¤°à¥Œà¤¦à¥à¤¯à¥‹à¤—िकी, विशेष रूप से à¤à¤†à¤ˆ का उपयोग करना चाहिà¤à¥¤
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के मà¥à¤–à¥à¤¯ संरकà¥à¤·à¤• और पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दिवस समà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार विजेता दरà¥à¤¶à¤¨ सिंह धालीवाल ने à¤à¥€ इसी तरह की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ कीं। धालीवाल ने कहा कि पंजाबी सिरà¥à¤«à¤¼ à¤à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾ नहीं है। यह हमारी परंपराओं, गीतों, लोकगीतों और रोज़मरà¥à¤°à¤¾ की अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की आतà¥à¤®à¤¾ है। इसे पोषित करना हमारा करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है, खासकर विदेश में पल रही यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी के लिà¤à¥¤
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के मà¥à¤–à¥à¤¯ समनà¥à¤µà¤¯à¤• डॉ. हरजिंदर सिंह खैरा और संयोजक राज लाली बटाला ने समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ को à¤à¤• साथ लाने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆà¥¤ आयोजन टीम के अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ कमलेश कपूर (संयà¥à¤•à¥à¤¤ समनà¥à¤µà¤¯à¤•), राजिंदर सिंह मागो, कà¥à¤²à¤œà¥€à¤¤ दयालपà¥à¤°à¥€, गà¥à¤°à¤®à¥à¤– सिंह à¤à¥à¤²à¥à¤²à¤°, चरणदीप सिंह, जसमीत सिंह, सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ जसबीर मान, पीà¤à¤¸ मान, अमन कà¥à¤²à¥à¤²à¤°, जिगरदीप सिंह ढिलà¥à¤²à¥‹à¤‚, नरिंदर सरा, राजिंदर दयाल, सà¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ सलà¥à¤²à¤¨, हरजिंदर जिंदी और अमरदेव बंदेशा शामिल थे।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में जपनीत खैरा (महा पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤œà¤•), गà¥à¤²à¤œà¤¼à¤¾à¤° सिंह मà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€, à¤à¥‚पिंदर सिंह धालीवाल, लकी सहोता, मà¥à¤–à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤° सिंह (हैपà¥à¤ªà¥€ हीर), परमिंदर सिंह गोलà¥à¤¡à¥€, अमरीक सिंह (अमर कारà¥à¤ªà¥‡à¤Ÿ), डॉ. विकà¥à¤°à¤® गिल, पी.à¤à¤¸. मान, दरà¥à¤¶à¤¨ सिंह गà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¾à¤², बà¥à¤°à¤¿à¤œ शरà¥à¤®à¤¾, सरवन सिंह मिशà¥à¤µà¤¾à¤•ा, पाल सिंह खलील, कमलेश कपूर, दविंदर à¤à¤¸. रंगी और जसकरण धालीवाल जैसे पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤œà¤•ों के उदार योगदान को à¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया गया।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में 31.14 मिलियन से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लोग पंजाबी बोलते हैं, लेकिन इसकी वैशà¥à¤µà¤¿à¤• पहà¥à¤‚च बहà¥à¤¤ दूर तक फैली हà¥à¤ˆ है। कनाडा, यूके, यूà¤à¤¸, ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ और दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के दूसरे हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में पंजाबी बोलने वाले जीवंत समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ हैं। इस तरह के आयोजन पहली पीढ़ी के आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और उनके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इससे यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ होता है कि यह à¤à¤¾à¤·à¤¾ पीढ़ियों तक फलती-फूलती रहे।
इस मौके पर à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ मीडिया यूà¤à¤¸à¤ के चेयरमैन और संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• सà¥à¤°à¥‡à¤¶ बोदीवाला ने कहा कि मैं पूरी आयोजन समिति, खासकर सांसà¥à¤•ृतिक राजदूतों, कवियों, विचारकों और यà¥à¤µà¤¾à¤“ं के अथक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को सलाम करता हूं, जो पंजाबी à¤à¤¾à¤·à¤¾ को न केवल जीवित रख रहे हैं, बलà¥à¤•ि विदेशी धरती पर à¤à¥€ इसे आगे बढ़ा रहे हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login