à¤à¤•ता और सांसà¥à¤•ृतिक विविधता की à¤à¤¾à¤‚की पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ सिनसिनाटी और नजदीकी शहर डेटन के सिखों ने 'सिनसिनाटी फेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤² ऑफ फेथà¥à¤¸' में उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ और आसà¥à¤¥à¤¾ के साथ हिसà¥à¤¸à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ की। सातवें वारà¥à¤·à¤¿à¤• उतà¥à¤¸à¤µ का आयोजन 'इकà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¤¨' दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के à¤à¥€à¤¤à¤° आसà¥à¤¥à¤¾ और परंपराओं की समृदà¥à¤§à¤¿ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ के लिठकिया गया था। इस वरà¥à¤· के उतà¥à¤¸à¤µ में 13 विशà¥à¤µ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करने वाले 30 से अधिक आसà¥à¤¥à¤¾ संगठन शामिल हà¥à¤à¥¤
सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ समीप सिंह गà¥à¤®à¤Ÿà¤¾à¤²à¤¾ ने बताया कि उतà¥à¤¸à¤µ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ बहà¥-विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ सेवा के साथ हà¥à¤ˆà¥¤ सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ीय जयपाल सिंह (उतà¥à¤¸à¤µ के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤•) की पतà¥à¤¨à¥€ आसीस कौर ने सिख धरà¥à¤® की मूल शिकà¥à¤·à¤¾à¤“ं को साà¤à¤¾ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गà¥à¤°à¥ गà¥à¤°à¤‚थ साहिब का à¤à¤• पाठकरते हà¥à¤ कहा कि 'मà¥à¤à¥‡ कोई दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ नहीं दिखता, मà¥à¤à¥‡ कोई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¥à¤µà¤‚दà¥à¤µà¥€ नहीं दिखता, मà¥à¤à¥‡ हर किसी से पà¥à¤¯à¤¾à¤° है।' कौर ने सारà¥à¤µà¤à¥Œà¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤® और सà¥à¤µà¥€à¤•ृति के इस धारà¥à¤®à¤¿à¤• संदेश पर जोर दिया।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पंजाब में à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥€ फतेहगढ़ साहिब के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– गà¥à¤°à¤‚थी जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥€ हरपाल सिंह जी à¤à¥€ इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में शामिल हà¥à¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अपनी सराहना वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हà¥à¤ कहा कि मैं उनकी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को सलाम करता हूं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे अपनी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और पहचान को वैशà¥à¤µà¤¿à¤• मंच पर लाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं। वे अपने काम से समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ का नाम ऊंचा करें, गà¥à¤°à¥ साहिब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ दें।
à¤à¤¾à¤ˆ बिकà¥à¤°à¤®à¤œà¥€à¤¤ सिंह, à¤à¤¾à¤ˆ चरणबीर सिंह रबाबी और à¤à¤¾à¤ˆ पà¥à¤°à¤à¤œà¥‹à¤¤ सिंह ने सिख संगत के साथ शबद कीरà¥à¤¤à¤¨ 'सà¤à¤¾à¤ जीया समाल अपनी-अपनी मिहार कर' का पाठकिया। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ सतà¥à¤° के दौरान सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ से बीबी मेहर कौर ने 'मूल मंतà¥à¤°' गाया और दिलरà¥à¤¬à¤¾ का उपयोग करके 'वाहेगà¥à¤°à¥' का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ किया।
समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने सिख पगड़ी ( जिसे 'दसà¥à¤¤à¤¾à¤°' के नाम से जाना जाता है) के गहन महतà¥à¤µ के बारे में सिखाने के लिठपगड़ी बांधने के सतà¥à¤° à¤à¥€ आयोजित किà¤à¥¤ सिख सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों ने आगंतà¥à¤•ों को पगड़ी बांधने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से समानता, विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ और सिख मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•वाद पर जोर दिया। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और वयसà¥à¤•ों सहित आगंतà¥à¤•ों को तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ लेते और सिर पर पगड़ी बांधकर गरà¥à¤µ से घूमते देखा गया।
सिनसिनाटी के मेयर आफताब पà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¾à¤² ने सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की सराहना करते हà¥à¤ कहा कि सà¤à¥€ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ के लोग शांति और करà¥à¤£à¤¾ का जशà¥à¤¨ मनाने के लिठयहां à¤à¤• साथ आठहैं। मà¥à¤à¥‡ अपनी सिख विरासत और लंगर की पà¥à¤°à¤¥à¤¾ पर गरà¥à¤µ है, जो सिख विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है कि à¤à¤—वान की नजर में हर कोई समान है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ में देखी जाने वाली यह परंपरा समानता और à¤à¤•ता की हमारी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है। मà¥à¤à¥‡ सिनसिनाटी में सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ और इस अंतरधारà¥à¤®à¤¿à¤• परंपरा पर गरà¥à¤µ है।
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