विविधता से à¤à¤°à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ à¤à¤• जीवंत देश है, जहां तरह‑तरह की परंपराà¤à¤‚ हैं। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में बसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इन सबका जशà¥à¤¨ बड़े शौक से मनाते हैं। हर राजà¥à¤¯ का अपना खास तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° और अंदाज है, जो सबको जोड़कर रखता है। ये तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤•ता के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• हैं।
सूरà¥à¤¯ देव की पूजा देश के कई कोनों में होती है—दकà¥à¤·à¤¿à¤£ में पोंगल से लेकर उतà¥à¤¤à¤° में मकर संकà¥à¤°à¤¾à¤‚ति तक। सूरज ही रोशनी, ऊरà¥à¤œà¤¾ और जीवन का सबसे बड़ा सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। हिंदू धरà¥à¤® में सूरà¥à¤¯ या आदितà¥à¤¯ को बहà¥à¤¤ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ देवता माना जाता है। योग में à¤à¥€ ‘सूरà¥à¤¯ नमसà¥à¤•ार’ के जरिठसूरज को नमन किया जाता है। यह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ और विनती की à¤à¤• परंपरा है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सौर तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°:
• मकर संकà¥à¤°à¤¾à¤‚ति
• तारीख: 14 जनवरी 2025
• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°: पूरे देश में
• महतà¥à¤µ: यह सांसà¥à¤•ृतिक, धारà¥à¤®à¤¿à¤• और कृषि से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ बड़ा तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° है। तमिलनाडॠमें इसे पोंगल कहा जाता है। लोग पूजा करते हैं, पतंग उड़ाते हैं। मकर संकà¥à¤°à¤¾à¤‚ति विकास, समृदà¥à¤§à¤¿ और नई शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। इसी दिन से फसल कटाई का मौसम शà¥à¤°à¥‚ होता है। किसान शà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अदा करते हैं और अचà¥à¤›à¥€ पैदावार की दà¥à¤† करते हैं। यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° सरà¥à¤¦à¥€ के खतà¥à¤® होने का à¤à¥€ इशारा है। लोग अलाव जलाते हैं और तिल के लडà¥à¤¡à¥‚‑गà¥à¤¡à¤¼ जैसी खास मिठाइयां बनाते हैं। पंजाब और हरियाणा में यही दिन लोहड़ी के साथ मनाया जाता है।
• पोंगल
• तारीख: 14 जनवरी
• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°: तमिलनाडà¥
• महतà¥à¤µ: पोंगल फसल कटाई का तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° है। ‘पोंगल’ शबà¥à¤¦ तमिल के ‘पोंग॒ से आया है, जिसका मतलब है उबलकर छलक पड़ना। यह खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤²à¥€, समृदà¥à¤§à¤¿ और फसल के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कृतजà¥à¤žà¤¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। तमिलनाडॠमें यह जनवरी के मधà¥à¤¯ में मनाया जाता है और सूरà¥à¤¯ देव को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ होता है।
• उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤¯à¤£
• तारीख: 11 – 14 जनवरी
• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°: गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤
• महतà¥à¤µ: यह सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अंत और वसंत की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ में, यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° सà¤à¥€ आकार और आकार की पतंगें उड़ाने के बारे में है। परिवार अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ पतंग उड़ाने और अपने पड़ोसियों के खिलाफ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ करने के लिठछतों पर इकटà¥à¤ ा होते हैं। विशेष à¤à¥‹à¤œà¤¨ और मिठाई तैयार की जाती है।
• बसंत पंचमी
• तारीख: 2 फरवरी
• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°: देशà¤à¤° में
• महतà¥à¤µ: यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° वसंत ऋतॠके आगमन का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। à¤à¤•à¥à¤¤ देवी सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ की पूजा करते हैं, पीले कपड़े पहनते हैं, पतंग उड़ाते हैं और मिठाई का आनंद लेते हैं। à¤à¤•à¥à¤¤ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और सफलता के लिठदेवी का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ पाने के लिठसरसà¥à¤µà¤¤à¥€ वंदना का पाठकरते हैं। वे देवी के सामने अपनी किताबें, पेन, संगीत वादà¥à¤¯à¤¯à¤‚तà¥à¤° और पीले फूल à¤à¥€ रखते हैं। बसंत पंचमी नई शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है - चाहे वह शिकà¥à¤·à¤¾ हो, विवाह हो या वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ शà¥à¤°à¥‚ करना हो। यह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और रचनातà¥à¤®à¤•ता से à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ है।
• छठपूजा
• तारीख: दिवाली के 6 दिन बाद
• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°: बिहार, à¤à¤¾à¤°à¤–ंड, उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶
• महतà¥à¤µ: à¤à¤•à¥à¤¤ जीवित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को जीवन और पà¥à¤°à¤•ाश पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने के लिठà¤à¤—वान सूरà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हैं। à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ का मानना है कि जब वे सूरà¥à¤¯ देव को पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤šà¥à¤°à¤¤à¤¾, आंतरिक शकà¥à¤¤à¤¿, विकास और सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है। यह जीवन में समृदà¥à¤§à¤¿ और सफलता के साथ-साथ अचà¥à¤›à¤¾ शारीरिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ à¤à¥€ लाता है। सूरà¥à¤¯ देव को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हिंदू तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° दो बार मनाया जाà¤à¤—ा - चैती छठ3 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को और कारà¥à¤¤à¤¿à¤• छठ7 नवंबर को।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login