नवरातà¥à¤°à¤¿ के दस दिनों में देवी जीवंत हो जाती हैं। दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकी परिवार 3, 5 या 9 सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ वाले अथवा सीढ़ियों के आसन सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हैं और उन पर गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ या मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ रखते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡ सामूहिक रूप से 'गोलू' कहा जाता है।
गीता 10 साल की उमà¥à¤° में अपने माता-पिता के साथ बे à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ चली गई थ। तब से वहीं रह रही हैं और अपने दो लड़कों का पालन-पोषण कर रही हैं। वे कहती हैं कि अमावसà¥à¤¯à¤¾ के पहले दिन गोलू की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की जाती है।
बकौल गीता- मà¥à¤à¥‡ याद है कि नवरातà¥à¤°à¤¿ के दिनों में, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में, यह à¤à¤• खà¥à¤²à¤¾ घर था। पड़ोसी हर शाम दीपक जलाते थे और पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते थे। बचà¥à¤šà¥‡ गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को देखने और मिठाई लेने के लिठघर-घर जाया करते थे। कà¤à¥€-कà¤à¥€ उस घर की महिला बदले में गीत या à¤à¤œà¤¨ की फरमाइश कर देती थी। देवी घर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करती थीं और 10 दिनों तक उनका वहां वास रहता था। यह उनका निजी रिशà¥à¤¤à¤¾ है। ईशà¥à¤µà¤°à¥€à¤¯ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• है। मà¥à¤à¥‡ लगता है कि हम इसे अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ मेलजोल बढ़ाने और अपनी संसà¥à¤•ृति को साà¤à¤¾ करने के à¤à¤• अवसर के रूप में देखते हैं।
बे à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ माता-पिता अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के बीच से घर पर नवरातà¥à¤°à¤¿ उतà¥à¤¸à¤µ आयोजित करने के लिठसमय निकालते हैं। वरà¥à¤· के गोलू पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के लिठथीम तैयार करने के लिठमहीनों से योजना चलती है।
इस वरà¥à¤· जया रूपनगà¥à¤‚टा के परिवार ने अपने गोलू की थीम के रूप में 'तिरà¥à¤ªà¤¤à¤¿ मंदिर' को चà¥à¤¨à¤¾ है। रूपनगà¥à¤‚टा कहती हैं कि मैं अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बताना चाहती हूं कि तिरूपति का मंदिर इतना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है और यह जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर है उसके पीछे की कहानी कà¥à¤¯à¤¾ है।
बचà¥à¤šà¥‡ रंगीन गोलू या मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और हरेक गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ के पीछे की कहानी से आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं। जीवन में बहà¥à¤¤ पहले ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को संसà¥à¤•ृति से परिचित कराया जाता है और परंपराà¤à¤‚ उन तक पहà¥à¤‚चाई जाती हैं। रूपनगà¥à¤‚टा के परिवार के दादा ने बताया था कि ऑडियो विजà¥à¤…ल सहायता लोगों को जानकारी बनाठरखने में मदद करती है।
राम के पास दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और परिवारों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गोलू से मिलने के लिठआमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किठजाने की सà¥à¤–द यादें हैं। वे बताते हैं कि हमें सà¥à¤‚दल (à¤à¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ चने) मिलते थे। चने का नाशà¥à¤¤à¤¾ उनके बचपन की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ थी। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• घर में सरसों के बीज, करी पतà¥à¤¤à¥‡, हींग, लाल मिरà¥à¤š और अदरक के साथ पिसा हà¥à¤† नारियल, उबली हà¥à¤ˆ दाल की सबà¥à¤œà¥€ बनाने की अपनी विधि होती थी। जब देवी à¤à¥à¤°à¤®à¤£ करती हैं तो पà¥à¤¯à¤¾à¤œ का उपयोग नहीं किया जाता।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ थीम à¤à¤• रंग या à¤à¤• ही à¤à¤—वान पर आधारित होती है। उदाहरण के लिठशिव। इंडिश कà¥à¤°à¤¿à¤à¤¶à¤‚स के मालिक का कहना है कि हम गोलू सजावट बेच रहे हैं जिसे मालिक खà¥à¤¦ बनाता है और पूरे अमेरिका में à¤à¥‡à¤œà¤¤à¤¾ है।
दोसà¥à¤¤ और परिवार à¤à¤•-दूसरे के घर खाना खाने जाते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• संगीत या à¤à¤œà¤¨ गाते हà¥à¤ सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं और गोलू पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा करते हैं। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• परिवार बारी-बारी से गोलू संधà¥à¤¯à¤¾ की मेजबानी करता है और यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करता है कि सà¤à¥€ दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को सांसà¥à¤•ृतिक पकà¥à¤· दिखाने का मौका मिले।
गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¤¾ और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ पर मेफीलà¥à¤¡ की सीà¤à¤®à¤“ कामिनी रमानी लिखती हैं- बॉमà¥à¤¬à¥‡ में à¤à¤• दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परिवार में पले-बढ़े होने के कारण नवरातà¥à¤°à¤¿ का मतलब गोलू को रखना, गà¥à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के उतà¥à¤¸à¤µ के पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ को सीढ़ियों में वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ करना था। गोलू रखने के सांसà¥à¤•ृतिक कारण कहानी कहने, समà¥à¤¦à¤¾à¤¯, रचनातà¥à¤®à¤•ता, शिकà¥à¤·à¤¾ और परंपरा के उतà¥à¤¸à¤µ के साथ गहराई से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं।
रूपनगà¥à¤‚टा परिवार ने हमेशा अपने गोलू के माधà¥à¤¯à¤® से और अपनी यातà¥à¤°à¤¾ के जरिये साà¤à¤¾ सीख की कहानियां बताई हैं। वे बताती हैं कि जिस वरà¥à¤· हम गà¥à¤°à¥€à¤¸ गठउस वरà¥à¤· परिवार ने घर के à¤à¤• कोने में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं की à¤à¤¾à¤‚की लगाई। à¤à¤• अनà¥à¤¯ वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ के महलों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हà¥à¤†à¥¤
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login