पिटà¥à¤¸à¤¬à¤°à¥à¤— के मोनरोविले में हिंदू-जैन मंदिर ने à¤à¤• à¤à¤µà¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के साथ अपनी à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• 40वीं वरà¥à¤·à¤—ांठमनाई। यह अमेरिका में धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤•ता और सांसà¥à¤•ृतिक विरासत के à¤à¤• सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤• पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• के रूप में इसकी à¤à¥‚मिका की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करता है। 1984 में परमारà¥à¤¥ निकेतन, ऋषिकेश (à¤à¤¾à¤°à¤¤) के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· परम पूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ चिदानंद सरसà¥à¤µà¤¤à¥€à¤œà¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ यह मंदिर न केवल अमेरिका के सबसे पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ हिंदू मंदिरों में से à¤à¤• है बलà¥à¤•ि दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में à¤à¤¸à¥‡ पहले मंदिर के रूप में अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ है जहां हिंदू और जैन à¤à¤• साथ पूजा करते हैं।
यही नहीं यह विशà¥à¤µ के à¤à¤¸à¥‡ पहले मंदिर के रूप में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित है जहां जैन धरà¥à¤® के दोनों संपà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯-शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾à¤‚बर और दिगंबर à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और पूजा में साà¤à¤¾ à¤à¤•जà¥à¤Ÿ होते हैं। हिंदू-जैन मंदिर का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ 1980 में शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† और चार साल बाद इसका आधिकारिक उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ 1984 में हà¥à¤†à¥¤ मंदिर 10 à¤à¤•ड़ के हरे-à¤à¤°à¥‡ जंगल के बीच शोà¤à¤¾à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है।
इस माह का उतà¥à¤¸à¤µ इतिहास और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ की गहरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ से ओतपà¥à¤°à¥‹à¤¤ रहा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि संपूरà¥à¤£ गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° पिटà¥à¤¸à¤¬à¤°à¥à¤— समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ मंदिर की सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ विरासत का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करने के लिठà¤à¤•तà¥à¤° हà¥à¤† था। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ शà¥à¤ 'शिखर पूजा' से हà¥à¤ˆà¥¤ यह पूजा à¤à¤• पवितà¥à¤° अनà¥à¤·à¥à¤ ान है जिसमें पूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ और साधà¥à¤µà¥€ à¤à¤—वतीजी ने कà¥à¤°à¥‡à¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से पांच गà¥à¤‚बदों की ऊंचाई तक पहà¥à¤‚चकर मंदिर के शिखरों पर पवितà¥à¤° जल चढ़ाया। इस अनà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤¨ में मंदिर की कारà¥à¤¯à¤•ारी समिति और नà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ बोरà¥à¤¡ के सदसà¥à¤¯ शामिल रहे।
शिखर पूजा के बाद पूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€, साधà¥à¤µà¥€à¤œà¥€ और मंदिर के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के नेतृतà¥à¤µ में à¤à¤• पवितà¥à¤° हवन/यजà¥à¤ž किया गया। इसमें सà¤à¥€ के लिठशांति, समृदà¥à¤§à¤¿ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के साथ-साथ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में à¤à¤•ता और सदà¥à¤à¤¾à¤µ का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ मांगा गया। समारोह के बाद पूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ और साधà¥à¤µà¥€ à¤à¤—वतीजी के पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ हà¥à¤à¥¤ इसमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मंदिर के à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• अतीत को याद किया और पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ में विशà¥à¤µà¤¾à¤¸, à¤à¤•ता और सांसà¥à¤•ृतिक संरकà¥à¤·à¤£ के गढ़ के रूप में इसकी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला।
पूजà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ ने मंदिर के मिशन के सार को सामने रखते हà¥à¤ à¤à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• और कावà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• संदेश दिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि यह मंदिर केवल पूजा का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ नहीं है। यह à¤à¤•ता का à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। साधà¥à¤µà¥€ à¤à¤—वतीजी ने मंदिर की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की समà¥à¤®à¥‹à¤¹à¤• कहानी सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ जब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ न केवल संखà¥à¤¯à¤¾ में कम थे बलà¥à¤•ि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गलत मानकर उनके साथ à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ किया जाता था।
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