ढोल ताशा की बीटà¥à¤¸ ने हाल के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ से दूर अमेरिका के à¤à¥€ कई शहरों को अपनी गूंज से गà¥à¤‚जायमान कर दिया है। बोसà¥à¤Ÿà¤¨ से लेकर बालà¥à¤Ÿà¥€à¤®à¥‹à¤° तक और उससे à¤à¥€ आगे, महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° की इस पारंपरिक कला की लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ में लगातार वृदà¥à¤§à¤¿ हो रही है। इसका शà¥à¤°à¥‡à¤¯ उन समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ समूहों को जाता है जो इस पारंपरिक कला की ऊरà¥à¤œà¤¾ को अमेरिकी जीवन में उतारने में जà¥à¤Ÿà¥‡ हैं।
नà¥à¤¯à¥‚ इंगà¥à¤²à¥ˆà¤‚ड में, इंडिया सोसाइटी ऑफ वॉरà¥à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° (आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚) का सिमà¥à¤«à¤¨à¥€ ढोल ताशा लेजिम गà¥à¤°à¥à¤ª अपने इलाके में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सांसà¥à¤•ृतिक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ का सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ अंग बन चà¥à¤•ा है। आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ के सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों ने तीन साल पहले इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की थी। इस इस गà¥à¤°à¥à¤ª में 65 से अधिक मेंबर हो गठहैं, जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं। ये गà¥à¤°à¥à¤ª बोसà¥à¤Ÿà¤¨ के फैनà¥à¤‡à¤² मारà¥à¤•ेट पà¥à¤²à¥‡à¤¸, हैच मेमोरियल शेल और वॉरà¥à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° आरà¥à¤Ÿ मà¥à¤¯à¥‚जियम समेत तमाम जगहों पर 25 से अधिक पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दे चà¥à¤•ा है।
आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ सिमà¥à¤«à¤¨à¥€ समूह को जो चीज अलग करती है, वह है उनका नजरिया। वे ढोल ताशे की पारंपरिक बीटà¥à¤¸ का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करते हैं, साथ ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अनà¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ की धà¥à¤¨à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ इसमें शामिल करते हैं जैसे कि पंजाब और गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के पैटरà¥à¤¨à¥¤ यह मिशà¥à¤°à¤£ गà¥à¤°à¥à¤ª के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की विविध सांसà¥à¤•ृतिक पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है।
आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ सिमà¥à¤«à¤¨à¥€ गà¥à¤°à¥à¤ª के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• अरविंद किनà¥à¤¹à¤¿à¤•र कलाकारों के जà¥à¤¨à¥‚न की डोर "à¤à¤•च नशा, ढोल ताशा!" (केवल à¤à¤• जà¥à¤¨à¥‚न: ढोल ताशा!) को थामकर आगे बढ़ते हैं। यह सरल लेकिन शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ पूरे गà¥à¤°à¥à¤ª के उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ और समरà¥à¤ªà¤£ को रेखांकित करती है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगातार पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करती है।
आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ के वॉलंटियर रंजीत मà¥à¤²à¥‡ का संगीत से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त नाता है। वह कहते हैं कि जब मैं अपना ढोल बजाता हूं, ताशे की थाप पर टà¥à¤¯à¥‚निंग करता हूं तो मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि मैं वापस अपने बचपन में पहà¥à¤‚चकर मà¥à¤‚बई में à¤à¤µà¥à¤¯ गणेश उतà¥à¤¸à¤µ समारोह में à¤à¤¾à¤— ले रहा हूं। उस पल मैं पूरी तरह से उस अनà¥à¤à¤µ में डूब जाता हूं। उस पल में खà¥à¤¦ को पूरी तरह से समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करके आनंद लेता हूं।
ISW सिमà¥à¤«à¤¨à¥€ ढोल ताशा लेज़िम गà¥à¤°à¥à¤ª सिरà¥à¤« परफॉरà¥à¤®à¥‡à¤‚स का नाम नहीं है, यह सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• निरà¥à¤®à¤¾à¤£ का जरिया है। वे नियमित रूप से कला के अनà¥à¤¯ रूपों से à¤à¥€ संबंध बनाते हैं। इनमें केरल का चेंदा मेलम गà¥à¤°à¥à¤ª और आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ वोकल à¤à¤¨à¤¸à¥‡à¤‚बल गà¥à¤°à¥à¤ª शामिल है। इनका सांसà¥à¤•ृतिक संयोजन अकेले ढोल ताशा से परे है। वे कला सीखने वालों के लिठवरà¥à¤•शॉप आयोजित करते हैं। समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ को à¤à¤•जà¥à¤Ÿ करने और ढोल, ताशा और लेज़िम की खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को दूर दूर तक फैलाने के लिठनठलोगों का सà¥à¤µà¤¾à¤—त करते हैं।
साउथ के मैरीलैंड में देखें तो आवरà¥à¤¤à¤¨ ढोल ताशा बरची धà¥à¤µà¤œ पाठक गà¥à¤°à¥à¤ª à¤à¥€ खासी तरकà¥à¤•ी कर रहा है। बालà¥à¤Ÿà¥€à¤®à¥‹à¤° मराठी मंडल समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 2021 में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ आवरà¥à¤¤à¤¨ आठलोगों के छोटे से गà¥à¤°à¥à¤ª से अब 40 सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¤• मजबूत समूह बन चà¥à¤•ा है। पà¥à¤£à¥‡ की संगीतमय विरासत में निहित पारंपरिक ढोल ताशा पैटरà¥à¤¨ के लिठमशहूर आवरà¥à¤¤à¤¨ परंपरा और नवीनता के मिशà¥à¤°à¤£ से लोगों के दिलों में जगह बना रहा है।
आवरà¥à¤¤à¤¨ की वॉलंटियर रà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ वडाडेकर à¤à¤¾à¤µà¥à¤•ता के साथ कहती हैं कि मैरीलैंड में अवरतन की ढोल ताशा की परफॉरà¥à¤®à¥‡à¤‚स मेरे सà¥à¤•ूल जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¬à¥‹à¤§à¤¿à¤¨à¥€ के दिनों की यादें ताजा कर देती है। यहां अमेरिका में उन पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ यादों को फिर से जीवंत करना बहà¥à¤¤ खास है।
आवरà¥à¤¤à¤¨ को हाला ही में नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• शहर में आयोजित इंडिया डे परेड में परफॉरà¥à¤®à¥‡à¤‚स के लिठआमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया गया था, जहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी अनूठी बीटà¥à¤¸ और उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ से समां बांध दिया था। अब गà¥à¤°à¥à¤ª आगामी गणेश उतà¥à¤¸à¤µ के दौरान तीन पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ में अपनी कला का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करेगा और इलाके के लोगों में हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ धà¥à¤¨ छेड़ने को तैयार है।
ढोल ताशा की लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ सिरà¥à¤« बोसà¥à¤Ÿà¤¨ और बालà¥à¤Ÿà¥€à¤®à¥‹à¤° तक सीमित नहीं है। अमेरिका में à¤à¤¸à¥‡ कई गà¥à¤°à¥à¤ª फल-फूल रहे हैं जो ढोल ताशा की सांसà¥à¤•ृतिक परंपरा को नठऔर रोमांचक तरीकों से आगे बढ़ाते हà¥à¤ महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ आवाज़ को नठइलाकों तक पहà¥à¤‚चा रहे हैं। हरेक समूह कला में अपनी विविधता का रंग घोल रहा है, लेकिन ढोल ताशा के गहरे जà¥à¤¨à¥‚न और संगीत के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‡à¤® का धागा इन सà¤à¥€ को à¤à¤• सूतà¥à¤° में बांधे हà¥à¤ है।
आईà¤à¤¸à¤¡à¤¬à¥à¤²à¥à¤¯à¥‚ गà¥à¤°à¥à¤ª के आयोजकों में से à¤à¤• राजेश खरे कहते हैं कि ढोल ताशा लोगों को à¤à¤• साथ लाने का à¤à¤• अनूठा तरीका है। चाहे आप खà¥à¤¦ इसमें शामिल हों या बस सà¥à¤¨ रहे हों, ये बीटà¥à¤¸ हमारे अंदर की गहराई तक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤§à¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¤ होती हैं, à¤à¤• साà¤à¤¾ तरंग पैदा करती हैं जो हमें à¤à¤• समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के रूप में à¤à¤•जà¥à¤Ÿ करती है।
पूरे अमेरिका में ढोल ताशा गà¥à¤°à¥à¤ª इस वकà¥à¤¤ उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ में है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गणपति उतà¥à¤¸à¤µ आने वाला है। शोà¤à¤¾à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤“ं में सबसे आगे रहकर "गणपति बपà¥à¤ªà¤¾ मोरया!" की गूंज के साथ अपने पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ से à¤à¥€à¤¡à¤¼ में जोश जगाने के लिठतैयार है।
ढोल ताशा अब अमेरिका का हिसà¥à¤¸à¤¾ बन गया है और समय के साथ इसकी धà¥à¤¨ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिलों की गहराइयों को छू रही है।
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