सिख असेंबली के सदसà¥à¤¯ गà¥à¤°à¤¤à¥‡à¤œ सिंह का कहना है कि 40 साल पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² 'सिखों की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को कà¥à¤šà¤²à¤¨à¥‡' के लिठकिया गया था। गà¥à¤°à¤¤à¥‡à¤œ 1984 और उसके बाद के 'शहीदों' के समà¥à¤®à¤¾à¤¨ में कैपिटल हिल में आयोजित पहली सिख नरसंहार पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में बोल रहे थे।
वह कहते हैं कि 40 साल पहले (6 जून) à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना की ताकत का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बहà¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ तरीके से सिखों की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को कà¥à¤šà¤²à¤¨à¥‡ के लिठकिया गया था। 1984 में ऑपरेशन बà¥à¤²à¥‚ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤° के दौरान मारे गठसिख नेता जरनैल सिंह का जिकà¥à¤° करते हà¥à¤ गà¥à¤°à¤¤à¥‡à¤œ ने कहा कि उनमें कà¥à¤¦à¤¾à¤² को कà¥à¤¦à¤¾à¤² कहने का साहस था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 40 साल पहले हमारा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ इस ओर दिलाया था कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सिखों के साथ दोयम दरà¥à¤œà¥‡ के नागरिकों जैसा वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° किया जा रहा है। हम à¤à¤¾à¤°à¤¤ का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग बने रहना चाहते हैं लेकिन केवल समान नागरिक के रूप में। हमने à¤à¤¾à¤°à¤¤ को अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ से आजादी दिलाने के लिठ90 से अधिक शीश बलिदान सà¥à¤µà¤°à¥‚प दिये हैं। लेकिन हमारे साथ इस तरह का वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ किया जा रहा है?
अमेरिका की सिख असेंबली à¤à¤• अमेरिका-आधारित धारà¥à¤®à¤¿à¤• संगठन है जो à¤à¤•ता को बढ़ावा देने और सिख राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के अधिकारों और मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§ है। संगठन की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥ˆà¤¯à¤¾à¤®à¤¾ पाल सिंह को पकड़ने के लिठ17 मारà¥à¤š, 2023 को पंजाब में 80,000 अरà¥à¤§à¤¸à¥ˆà¤¨à¤¿à¤• बलों की तैनाती के जवाब में की गई थी। इस घटना ने 1980 के दशक की याद दिलाने वाले सवाल खड़े कर दिà¤à¥¤ लगà¤à¤— चार दशक बीत जाने के बावजूद उदासीनता और अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कायम रही। इसके जवाब में असेंबली ने वाशिंगटन, डी.सी. में कैपिटल हिल में पूरà¥à¤£à¤•ालिक पैरवी पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ किà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में à¤à¤• वकà¥à¤¤à¤¾ ने कहा कि कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट अमेरिका का à¤à¤•मातà¥à¤° राजà¥à¤¯ है जिसने कानून पारित करके और 1 नवंबर को सिख नरसंहार सà¥à¤®à¤°à¤£ दिवस के रूप में नामित करके सिख नरसंहार को आधिकारिक तौर पर मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी है।
वकà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने à¤à¤• उदà¥à¤§à¤°à¤£ पढ़ते हà¥à¤ कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट महासà¤à¤¾ की मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पर à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ाश डाला जिसमें कहा गया था- यह सà¤à¥€ को पता है कि कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट महासà¤à¤¾ सिख आजादी की घोषणा की 36 वीं वरà¥à¤·à¤—ांठकी मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ में विशà¥à¤µ सिख संसद को अपनी हारà¥à¤¦à¤¿à¤• बधाई देती है। हम पंजाब के अमृतसर में सिखों के राजनीतिक केंदà¥à¤° में सरपत खालसा नामक सामूहिक सिख राषà¥à¤Ÿà¥à¤° सà¤à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 29 अपà¥à¤°à¥ˆà¤², 1986 को पारित à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में आपके, आपके दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और परिवार के साथ हैं।
वकà¥à¤¤à¤¾à¤“ं में से à¤à¤• ने बताया कि हालांकि कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के गलियारे सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लिठनठनहीं हैं। सिख जीवन के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं में अगà¥à¤°à¤£à¥€ रहे हैं। जब पहले à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ होने, पहले दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ होने और पहले सिख होने की बात आती है तो दिलीप सिंह सोहन 50 के दशक में कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के इन गलियारों में जाने वाले पहले कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€ थे। लेकिन हमें यह पहचानने में इतना समय कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ लगा कि सतà¥à¤¤à¤¾ कहां है। कà¥à¤› हद तक हम हमें सà¤à¥€ आघात और आघात के परिणाम देने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार को दोषी ठहरा सकते हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login