अयोधà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ का à¤à¤• पौराणिक शहर है, जिसे वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में अयोधà¥à¤¯à¤¾ के रूप में जाना जाता है। यह हिंदà¥à¤“ं के परम आराधà¥à¤¯ à¤à¤—वान राम का जनà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। अयोधà¥à¤¯à¤¾ को हिंदà¥à¤“ं के लिठसात सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तीरà¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ में से पहला माना जाता है। अयोधà¥à¤¯à¤¾ को à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• रूप से साकेत के नाम से à¤à¥€ जाना जाता था। आदि पà¥à¤°à¤¾à¤£ में कहा गया है कि अयोधà¥à¤¯à¤¾ को साकेत कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसकी शानदार इमारतें इनकी बाहों के रूप में शानदार पताकाà¤à¤‚ थीं।
'रघॠवामसा' में कालिदास ने अयोधà¥à¤¯à¤¾ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है। इसका विवरण तीन चरणों में है। पहले चरण की अयोधà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤• राजधानी शहर थी, सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से किलेबंद और चार दà¥à¤µà¤¾à¤° थे। इस सेंस में आंतरिक शहर के ले-आउट को à¤à¥€ चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। सड़कों के कई संदरà¥à¤, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रूप से पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤°à¥à¤—, रठिया, उइवेसा और राजपथ के रूप में कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ किया गया है। बसà¥à¤¤à¥€ के केंदà¥à¤° में राजशाही सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ इस परिकलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ को विशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯à¤¤à¤¾ देता है।
कालीदास ने सफेद धà¥à¤²à¥‡ हà¥à¤ à¤à¤µà¤¨à¥‹à¤‚, अचà¥à¤›à¥€ तरह से सà¥à¤¸à¤œà¥à¤œà¤¿à¤¤ घरों और परिषद हॉल का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है, जो इस शहरी केंदà¥à¤° की à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• समृदà¥à¤§à¤¿ और शकà¥à¤¤à¤¿ को और अधिक रेखांकित करता है। कालिदास की उदà¥à¤¯à¤¾à¤¨ शहरी योजना के महतà¥à¤µ को पारà¥à¤•ों और शहर के बाहर वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• उदà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के संदरà¥à¤à¥‹à¤‚ से चितà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया गया है।
अयोधà¥à¤¯à¤¾ न केवल à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• केंदà¥à¤° था, बलà¥à¤•ि वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• रूप से à¤à¥€ समृदà¥à¤§ था। सरयू नदी में नौकायन करने वाले जहाजों से इसकी जानकारी मिलती है। यहां की शाही सड़कें समृदà¥à¤§ दà¥à¤•ानों से अटी पड़ी थीं। महरà¥à¤·à¤¿ वालà¥à¤®à¥€à¤•ि दशरथ के राजà¥à¤¯ का वरà¥à¤£à¤¨ सरयू नदी के तट पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कोशल नाम का à¤à¤• महान राजà¥à¤¯ से करते हैं जो बहà¥à¤¤ समृदà¥à¤§ है और अयोधà¥à¤¯à¤¾ इसमें सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ थी। मानवों के राजा मनॠने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ इस नगरी (अयोधà¥à¤¯à¤¾ की) का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आगे वरà¥à¤£à¤¨ किया है कि 'दशरथ ने अयोधà¥à¤¯à¤¾ को अपना निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बनाया, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इंदà¥à¤° ने सà¥à¤µà¤°à¥à¤— को अपना निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बनाया।
वालà¥à¤®à¥€à¤•ि रामायण के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° कोशल राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में धन और धानà¥à¤¯ (खादà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¨) से संपनà¥à¤¨ था। कोशल सामà¥à¤°à¤¾à¤œà¥à¤¯ के à¤à¥€à¤¤à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ अयोधà¥à¤¯à¤¾ शहर दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ था। शहर शाही राजमारà¥à¤—ों की चमक से चकाचौंध था जो फूलों से à¤à¤°à¥‡ हà¥à¤ थे। शहर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ दà¥à¤µà¤¾à¤° और तोरणदà¥à¤µà¤¾à¤° से घिरा हà¥à¤† था। शहर बगीचों से घिरा हà¥à¤† था, रतà¥à¤¨à¥‹à¤‚ से जड़े महल और अचà¥à¤›à¥€ तरह से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ घर थे।
वालà¥à¤®à¥€à¤•ि रामायण के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° शहर अनà¥à¤¨ से à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† था और पानी का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ गनà¥à¤¨à¥‡ के रस की तरह मीठा था। अयोधà¥à¤¯à¤¾ शहर को किले की दीवारों और खाई दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया गया था। इसे शहर के बाहर दो योजन तक मजबूत à¤à¥€ किया गया था। अपने नाम के अनà¥à¤°à¥‚प यह अ-योधà¥à¤¯à¤¾ था, जो अजेय शहर था। सà¤à¥€ लोग सà¥à¤–ी, समृदà¥à¤§ और अचà¥à¤›à¥‡ चरितà¥à¤° के थे।
अलवर से कà¥à¤²à¤¶à¥‡à¤–रà¤à¤µà¤¾à¤° ने शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा में कई छंद गाठहैं। उनका कहना है कि अयोधà¥à¤¯à¤¾ किलेबंद दीवारों से घिरा हà¥à¤† है जो आकाश तक उठती हैं। अयोधà¥à¤¯à¤¾ का वरà¥à¤£à¤¨ कंब रामायण में बहà¥à¤¤ ही अनूठा है। वह पूछता है, कà¥à¤¯à¤¾ अयोधà¥à¤¯à¤¾ शहर है, पृथà¥à¤µà¥€ का चेहरा है। कà¥à¤¯à¤¾ यह विवाह का बहà¥à¤¤ लंबा शà¥à¤ धागा है? कà¥à¤¯à¤¾ यह सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर पहना जाने वाला रतà¥à¤¨ जड़ित हार है? कà¥à¤¯à¤¾ यह रहने की जगह है? कà¥à¤¯à¤¾ यह कमल है जिसमें लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ रहती हैं? कà¥à¤¯à¤¾ यह à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पहने गठरतà¥à¤¨à¥‹à¤‚ से जड़ी सोने की डिबà¥à¤¬à¥€ है? कà¥à¤¯à¤¾ यह देवों की नगरी के ऊपर का नगर है? हम कैसे बता सकते हैं कि कौन सा है?
कंब रामायण में आगे कहा गया है कि इसकी चारदीवारी वेदों के समान हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनका अंत नहीं देखा जा सकता, वे देवों की तरह हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे à¤à¥€ देवों की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में पहà¥à¤‚च गठहैं, वे ऋषियों की तरह हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे बाहरी मोहà¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं, वे देवी दà¥à¤°à¥à¤—ा की तरह हैं जो हिरण पर सवारी करती हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे दोनों शहर की रकà¥à¤·à¤¾ करती हैं।
वे देवी काली की तरह हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दोनों यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिठà¤à¤¾à¤²à¥‡ पकड़ते हैं (à¤à¤¾à¤²à¥‡ दीवारों से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ होते हैं) और à¤à¤—वान की तरह हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उन दोनों तक पहà¥à¤‚चना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। अयोधà¥à¤¯à¤¾, इसकी सà¥à¤‚दरता, समृदà¥à¤§à¤¿, लोगों के दयालॠरवैये, शासकों की बहादà¥à¤°à¥€ ने सà¤à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में सà¤à¥€ कवियों को मोहित किया है।
(लेखक डॉ. के. दयानिधि, मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, चेनà¥à¤¨à¤ˆ में वैषà¥à¤£à¤µ धरà¥à¤® विà¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं)
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