वह अशोक कà¥à¤®à¤¾à¤° थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1952 की रोमांटिक कॉमेडी 'तमाशा' के सेट पर मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ को कमाल अमरोही से मिलवाया था। अमरोही के लिठमीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ ने पहले (बचपन में तसà¥à¤µà¥€à¤° देखकर) जो आकरà¥à¤·à¤£ महसूस किया था वह तब और पà¥à¤°à¤¬à¤² हो गया जब वह उनसे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त रूप से मिलीं। अमरोही à¤à¥€ उस खूबसूरत किशोरी पर फिदा थे जिसने शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ और छंदों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अपना पà¥à¤¯à¤¾à¤° साà¤à¤¾ किया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ को अपनी निरà¥à¤®à¤¾à¤£à¤¾à¤§à¥€à¤¨ फिलà¥à¤® अनारकली में मà¥à¤–à¥à¤¯ à¤à¥‚मिका की पेशकश की और कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ ने इसे सहरà¥à¤· सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया। लेकिन इसके तà¥à¤°à¤‚त बाद, 21 मई, 1951 को महाबलेशà¥à¤µà¤° से मà¥à¤‚बई लौटते समय मीना à¤à¤• à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• कार दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ का शिकार हो गईं।
बà¥à¤°à¥€ तरह घायल होने के कारण मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ को पà¥à¤£à¥‡ के à¤à¤• असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में चार महीने बिताने पड़े। इस दरमà¥à¤¯à¤¾à¤¨ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में उनके निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ और निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• उनसे मिलने आते थे लेकिन कà¥à¤› समय बाद वह सिलसिला थम गया। अलबतà¥à¤¤à¤¾, केवल कमाल अमरोही आते रहे। वह उसके बिसà¥à¤¤à¤° के पास चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª बैठे रहते थे। मगर उस सनà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¥‡ में पà¥à¤¯à¤¾à¤° पल रहा था। हालांकि कमाल विवाहित थे और उनके तीन बचà¥à¤šà¥‡ थे जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने छोड़ने से इनकार कर दिया था। मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ के पिता अली बखà¥à¤¶ को यह पà¥à¤¯à¤¾à¤° मंजूर नहीं था। लेकिन फिर à¤à¥€ दोनों फोन के जरिये जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहे और à¤à¤• दिन साल 1952 में दोनों ने निकाह कर लिया। इतà¥à¤¤à¥‡à¤«à¤¾à¤• से उस दिन वेलेंटाइन डे था।
हालांकि जलà¥à¤¦ ही अफवाहें फैल गईं कि मीना और कमाल के 'सà¥à¤µà¤°à¥à¤—' में सब कà¥à¤› ठीक नहीं चल रहा। और इसकी मà¥à¤–à¥à¤¯ वजह मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ का काम था। 'दिल अपना और पà¥à¤°à¥€à¤¤ पराई' की सफलता के बावजूद, जिसे अमरोही ने बनाया था और मà¥à¤—ल-à¤-आजम, जिसे उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने संयà¥à¤•à¥à¤¤ रूप से लिखा था, उनका करियर उमà¥à¤®à¥€à¤¦ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• आगे नहीं बढ़ पाया। जबकि बैजू बावरा, परिणीता, आजाद, मेम साहब, रासà¥à¤¤à¤¾ और हलाकू के बाद मीना का करियर फल-फूल रहा था। इन हालात के बाद से दोनों में दूरियां बढ़ने लगीं।
कमाल और मीना 12 साल तक à¤à¤• साथ थे। फिर à¤à¤• दिन मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ 'पिंजरे की पंछी' की शूटिंग के लिठगईं और फिर घर नहीं लौटीं। ताजदार (पहली पतà¥à¤¨à¥€ से कमाल अमरोही के बेटे) के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• उसके पिता अपनी मंजू को वापस घर लाने के लिठउसकी बहन मधॠके घर गठथे लेकिन उसने उसकी तमाम मिनà¥à¤¨à¤¤à¥‹à¤‚ के बावजूद अपने कमरे का दरवाजा खोलने से à¤à¥€ इनकार कर दिया। अंततः वह उसे यह कहकर चले आये कि वह वापस नहीं आà¤à¤‚गे। हां उनके दरवाजे उसके (मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€) लिठहमेशा खà¥à¤²à¥‡ रहेंगे। लेकिन मीना नहीं लौटीं। उनका जीवन à¤à¥€ कोई नहीं सà¥à¤§à¤°à¤¾à¥¤
करिअर à¤à¥€ नीचे जा रहा था। मीना के नाम के साथ कà¥à¤› और आदमियों के चरà¥à¤šà¥‡ होने लगे थे। इनमें सावन कà¥à¤®à¤¾à¤° टाक और गà¥à¤²à¤œà¤¾à¤° के अलावा पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से धरà¥à¤®à¥‡à¤‚दà¥à¤° का नाम लिया जाता था। मगर तब मीना कà¥à¤®à¤¾à¤° शराब पीने लगीं थीं। और कमाल अमरोही से अलग होकर तो कà¥à¤› जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ही पीने लगी थीं। तबीयत à¤à¥€ नासाज रहने लगी थी। अंत में जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इलाज के लिठलंदन और सà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¥à¤œà¤°à¤²à¥ˆà¤‚ड ले जाया गया तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लीवर सिरोसिस का पता चला, जिसके कारण 38 वरà¥à¤· की आयॠमें उनका असामयिक निधन हो गया। लेकिन उससे पहले पाकीजा आई थी।
à¤à¤• नौसिखिया लड़की के इरà¥à¤¦-गिरà¥à¤¦ घूमती संगीतमय रोमांटिक डà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾ की शूटिंग जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1956 में शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆà¥¤ इसमें कमाल अमरोही लेखक, निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ और निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• थे और मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ मà¥à¤–à¥à¤¯ à¤à¥‚मिका में थीं। मारà¥à¤š 1964 तक वह पहले ही अपने डà¥à¤°à¥€à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ पर 40 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ खरà¥à¤š कर चà¥à¤•े थे। वह पाकीजा के आधे रासà¥à¤¤à¥‡ में थे, जब उनकी पतà¥à¤¨à¥€ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़ दिया और फिलà¥à¤® रà¥à¤• गई। à¤à¤¸à¥€ कई अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ थीं जो बीमार मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ के लिठखà¥à¤¶à¥€-खà¥à¤¶à¥€ आगे आ जातीं, लेकिन ताजदार के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, उनके पिता ने कà¤à¥€ à¤à¥€ उसकी 'छोटीअमà¥à¤®à¥€' की जगह किसी और को लेने के बारे में नहीं सोचा।
लेकिन जब मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ को विदेश में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ से पता चला कि उनके पास जीने के लिठसिरà¥à¤« छह महीने बचे हैं तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ठान लिया कि वह अपना सारा करà¥à¤œ चà¥à¤•ाठबिना और हर लंबित परियोजना को पूरा किठबिना इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से नहीं जाà¤à¤‚गी। इनमें पाकीजा à¤à¥€ शामिल थी। इसलिठ1969 में (उनके घर छोड़ने के 5 साल और 12 दिन बाद) मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ पाकीजा के सेट पर लौट आईं।
अंततः शूटिंग नवंबर, 1971 में पूरी हà¥à¤ˆ और फिलà¥à¤® का पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° 4 फरवरी, 1972 को मà¥à¤‚बई के मराठा मंदिर थिà¤à¤Ÿà¤° में हà¥à¤†à¥¤ हालांकि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में फिलà¥à¤® को अचà¥à¤›à¤¾ रेसà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¸ नहीं मिला। मगर कमाल को अपनी फिलà¥à¤® पर यकीन था। पाकीजा ने गोलà¥à¤¡à¤¨ जà¥à¤¬à¤²à¥€ मनाई और मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ को अमर बना दिया, जिनका 9 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद, 31 मारà¥à¤š, 1972 को निधन हो गया। कई लोग à¤à¤¸à¥‡ थे जो हिंदी सिनेमा की टà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‡à¤¡à¥€ कà¥à¤µà¥€à¤¨ के लिठशोक मना रहे थे। उनमें से वह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ था जो अंत तक उसका पति बना रहा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अलग हà¥à¤ जोड़े ने कà¤à¥€ औपचारिक रूप से तलाक नहीं लिया था।
11 फरवरी 1993 को कमाल अमरोही ने अंतिम सांस ली। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मीना कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ के बगल में ही दफà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ गया। और 21 साल बाद चंदन और उसकी मंजू फिर से à¤à¤• हो गà¤à¥¤ इस बार हमेशा के लिà¤à¥¤
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