à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ की 77वीं सालगिरह का जशà¥à¤¨ देश-विदेश में हर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤‚शी मना रहा है। आइठइस मौके पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी लेखकों के कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¥à¤– उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के बारे में बताते हैं। ये किताबें à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ उपमहादà¥à¤µà¥€à¤ª और डायसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¾ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ दोनों के बारे में अचà¥à¤›à¥€ जानकारी पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती हैं। इन फिकà¥à¤¶à¤¨ और नॉन फिकà¥à¤¶à¤¨ कृतियों से à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अतीत, वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ और उसकी विरासत की समठबढाने में मदद मिल सकती है।
Raj (गीता मेहता)
गीता मेहता का राज à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ है जो 19वीं शताबà¥à¤¦à¥€ के अंत और 20वीं शताबà¥à¤¦à¥€ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में à¤à¤• कालà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रियासत की राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ की जिंदगी पर आधारित है। नायक की यातà¥à¤°à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से गीता मेहता बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ उपनिवेशवाद, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ आंदोलन और उस समय के सामाजिक परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की जटिलताओं से रूबरू कराती हैं।
Loot (तानà¥à¤¯à¤¾ जेमà¥à¤¸)
18वीं शताबà¥à¤¦à¥€ के इरà¥à¤¦à¤—िरà¥à¤¦ घूमता à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ 'लूट' à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बढ़ई की कहानी है जो à¤à¤• फà¥à¤°à¤¾à¤‚सीसी के यहां काम करता है। उसे à¤à¤• सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ के लिठà¤à¤• ऑटोमैटिक मशीन बनाने का काम सौंपा जाता है। यह कहानी उपनिवेशवाद की खूनी विरासत की à¤à¤• परीकà¥à¤·à¤¾ है, जो 50 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में महादà¥à¤µà¥€à¤ªà¥‹à¤‚ में खेली गई थी। जेमà¥à¤¸ की यह उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ कृति इतिहास की जटिलता और लूटी गई कलाकृतियों पर घूमती है। इसे 2023 में फिकà¥à¤¶à¤¨ शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में नेशनल बà¥à¤• अवारà¥à¤¡ के लिठà¤à¥€ लॉनà¥à¤—लिसà¥à¤Ÿ किया जा चà¥à¤•ा है।
The Lucky Ones (ज़ारा चौधरी)
यह समकालीन à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® विरोधी हिंसा की पीड़ित ज़ारा चौधरी का मरà¥à¤®à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥€ संसà¥à¤®à¤°à¤£ है। इसमें वह राजनीतिक और पारिवारिक इतिहास को जोड़ती हैं जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ की इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ विरासत की अनूठी छवि पेश करता है। यह à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ महिला के विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ की कहानी है जो अपनी शरà¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर अपनी जमीन, परिवार और आसà¥à¤¥à¤¾ को कायम रखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती है।
A Thousand Times Before (आशा थंकी)
यह दिल दहला देने वाली पारिवारिक कहानी महिलाओं की तीन पीढ़ियों को कवर करती है। विà¤à¤¾à¤œà¤¨ यà¥à¤— के à¤à¤¾à¤°à¤¤ से लेकर आधà¥à¤¨à¤¿à¤• बà¥à¤°à¥à¤•लिन तक 'ठथाउज़ेंड टाइमà¥à¤¸ बिफोर' विरासत, सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त जीवन पर à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• घटनाओं के सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ की à¤à¤• समà¥à¤®à¥‹à¤¹à¤• कहानी है।
The Covenant of Water (अबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤® वरà¥à¤—ीज)
अबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤® वरà¥à¤—ीज की 'द कोवनेंट ऑफ वॉटर' à¤à¤• à¤à¤ªà¤¿à¤• उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ है जो पाठकों को à¤à¤¾à¤°à¤¤ के केरल में मालाबार तट पर ले जाता है। यह उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ करीब आठदशकों के समयकाल में à¤à¤• रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ दà¥à¤– से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ परिवार की तीन पीढ़ियों की जिंदगी पर आधारित है, जिसमें हर पीढ़ी का कम से कम à¤à¤• सदसà¥à¤¯ डूब जाता है। यह उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ अतीत के साथ à¤à¤• गहरा संबंध बनाता है और à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤µà¤‚ सामाजिक तानेबाने का चितà¥à¤°à¤£ पेश करता है।
This Land Is Our Land: An Immigrant's Manifesto (सà¥à¤•ेतॠमेहता)
'दिस लैंड इज आवर लैंड' में सà¥à¤•ेतॠमेहता ने इमिगà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के विवादासà¥à¤ªà¤¦ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ को छà¥à¤† है। नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• में à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤‚शी लड़के के रूप में अपने अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ और वैशà¥à¤µà¤¿à¤• रिपोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग के आधार पर मेहता दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ विरोधी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पेश करते हैं। वह à¤à¤¸à¤¾ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ नजरिया दिखाते हैं जो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास और डायसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¾ के संदरà¥à¤ में गहराई से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤§à¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¤ होता है।
The Glass Palace(अमिताव घोष)
द गà¥à¤²à¤¾à¤¸ पैलेस à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ है जो à¤à¤• सदी से अधिक समय तक फैला है। इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ 1885 में बरà¥à¤®à¤¾ पर बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ आकà¥à¤°à¤®à¤£ से होती है। अमिताव à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯, बरà¥à¤®à¥€ लोगों और बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ परिवारों की कहानियों को à¤à¤• साथ बà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं। उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£ पूरà¥à¤µ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ में बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ शासन के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ का विशद चितà¥à¤°à¤£ पेश करता है।
Missed Translations: Meeting the Immigrant Parents Who Raised Me (सोपान देब)
सोपान देब का यह संसà¥à¤®à¤°à¤£ अपनी पहचान और परिवार की ममसà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥€ खोज करता है। नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• टाइमà¥à¤¸ के लेखक और हासà¥à¤¯ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ देब अपने 30वें जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ पर महसूस करते हैं कि उनकी दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ संसà¥à¤•ृति गरà¥à¤µ और असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ दोनों की वजह रही है। माता-पिता की आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ यातà¥à¤°à¤¾ और शादी में अनबन के बीच देब नà¥à¤¯à¥‚जरà¥à¤¸à¥€ में अपनी परवरिश को अलग नजर से देखते हैं। यह किताब आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ अनà¥à¤à¤µ और सांसà¥à¤•ृतिक असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾ की अनदेखी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर मारà¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚ब पेश करती है।
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