इस महीने के पà¥à¤°à¤¥à¤® पकà¥à¤· में आतंकवाद के खिलाफ à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने जिस जंग का à¤à¤²à¤¾à¤¨ किया था वह यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम के चलते थम अवशà¥à¤¯ गई है मगर जारी रहने वाली है। कम से कम à¤à¤¾à¤°à¤¤ की ओर से तो जरूर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वह आतंकवाद की आग में बरसों से जल रहा है और अपने हजारों निरà¥à¤¦à¥‹à¤· नागरिकों को खो à¤à¥€ चà¥à¤•ा है। आतंकवाद का जितना खामियाजा à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने उठाया है, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के किसी अनà¥à¤¯ देश ने न उठाया होगा। इसी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¤¾à¤°à¤¤ की ओर से आतंकवाद के विरà¥à¤¦à¥à¤§ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ और उसके कबà¥à¤œà¥‡ वाले कशà¥à¤®à¥€à¤° में लकà¥à¤·à¤¿à¤¤ हमला सटीक रहा और à¤à¤• तरह से उसका 'तातà¥à¤•ालिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥‹à¤§' à¤à¥€ पूरा हà¥à¤†à¥¤ मगर दहशतगरà¥à¤¦à¥€ के जिस दंश को दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥‡à¤² रही है उस लड़ाई का निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• दिशा न पकड़ना खेदजनक है। à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच टकराव का रà¥à¤• जाना और वकà¥à¤¤ रहते समगà¥à¤° यà¥à¤¦à¥à¤§ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ न होना अचà¥à¤›à¥€ बात है किंतॠआतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक नहीं जीती जा सकती जब तब उसको पोषित करने वालों का पहले सफाया न किया जाà¤à¥¤ जब दाना-पानी नहीं मिलेगा तो आतंकवाद का राकà¥à¤·à¤¸ à¤à¥€ दम तोड़ देगा। लेकिन दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से à¤à¤¸à¤¾ नहीं है। आतंकवाद से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की कामना मौखिक तौर पर तो की जा रही है लेकिन उसे धरती से उखाड़ने के सामूहिक पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कहीं दिखाई नहीं देते।
यह à¤à¥€ पढ़ें : ऑपरेशन सिंदूर का संदेश
न जाने कितने पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ हैं जो à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम की इस घड़ी में उà¤à¤° रहे हैं। सबसे बड़ा पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ तो यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम को लेकर ही है। यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम पर à¤à¤¾à¤°à¤¤ का रà¥à¤– अलग है, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ का दावा कà¥à¤› और है और अमेरिका की मà¥à¤¨à¤¾à¤¦à¥€ कà¥à¤› और ही साबित करना चाह रही है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ का कहना है कि पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ ने उससे हमले रोकने का आगà¥à¤°à¤¹ किया था, जिसे उसने माना। वहीं, इस पूरे पà¥à¤°à¤•रण में शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में न-न करने वाला अमेरिका अचानक से 'निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤•' की à¤à¥‚मिका में आ गया। अमेरिका के आगे आने से à¤à¤¾à¤°à¤¤ का दावा संदेह में घिर गया और à¤à¤¾à¤°à¤¤ का कथन अमेरिकी दावे को नाकाबिले-यकीन बना रहा है। तो फिर यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम कैसे हà¥à¤†, यह अगला सवाल है। हर कोई सच जानना चाहता है। आखिर बढ़ते टकराव को किसने रोका। यह दोनों देशों की मरà¥à¤œà¥€ या मजबूरी थी अथवा अमेरिका का दबाव। यह तो à¤à¤• तरह से सियासत हो गई कि कà¥à¤› पता ही नहीं चल रहा कि परमाणà¥-संपनà¥à¤¨ दो चिर-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¥à¤µà¤‚दà¥à¤µà¥€ à¤à¤•-दूसरे के खिलाफ मैदान और आसमान में आग उगलते-उलगते अचानक शांत कैसे हो गये। यह à¤à¥€ सही है कि यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम हो गया है लेकिन असमंजस, संदेह, à¤à¤• अनजाना à¤à¤¯ और घात-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤˜à¤¾à¤¤ का माहौल पड़ोसियों के बीच और उनके अवाम में बना हà¥à¤† है। आग बà¥à¤à¥€ नहीं, अंदर धधक रही है। à¤à¤¸à¥‡ में सà¥à¤•ून कैसे संà¤à¤µ है यह सबसे अहम पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ है।
जहां तक आतंकवाद की बात है तो पहलगाम हमले की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लगà¤à¤— सà¤à¥€ देशों ने निंदा की। यहां तक कि चीन ने à¤à¥€, मगर खà¥à¤²à¤•र साथ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ का दिया। तà¥à¤°à¥à¤•ी और अजरबैजान à¤à¥€ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के साथ दिखे। और दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ देखिठआतंकवाद के खिलाफ निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• जंग शà¥à¤°à¥‚ करने वाले à¤à¤¾à¤°à¤¤ के साथ कोई à¤à¥€ मà¥à¤²à¥à¤• खà¥à¤²à¤•र आवाज बà¥à¤²à¤‚द करता न दिखा। जब आप आतंकी घटना की निंदा करते हैं तो उसको पनाह देने वाला उससे à¤à¥€ बड़ा गà¥à¤¨à¤¹à¤—ार हà¥à¤†à¥¤ आतंकवाद के खिलाफ नतीजे वाली लड़ाई में यूं à¤à¤¾à¤°à¤¤ का अकेले पड़ जाना दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की संवेदनशीलता और उसके इरादों पर बड़ा सवाल है। सवाल है कि कà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ वाकई आतंकवाद से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ चाहती है। अगर हां तो फिर सब अपनी-अपनी जंग अकेले कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ लड़ रहे हैं। मंच पर साथ रहे वाले जमीन पर साथ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं हैं। अगर बात आतंकवाद के सरपरसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की है तो इससे बड़ा सà¥à¤¬à¥‚त और कà¥à¤¯à¤¾ होगा कि अमेरिका पर आतंकी हमला करने वाले को 'महाबली' ने उसी की धरती पर जाकर ढेर किया था। अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में जाकर मिटà¥à¤Ÿà¥€ में मिलाया था। तो आतंकवाद की सरपरसà¥à¤¤à¥€ को लेकर संदेह कैसा!
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login