à¤à¤• तरफ अयोधà¥à¤¯à¤¾ में à¤à¤µà¥à¤¯ राम मंदिर लगà¤à¤— बनकर तैयार है जिसमें 22 जनवरी को शà¥à¤°à¥€ रामलला की पà¥à¤°à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा होगी। वहीं राम मंदिर से लगà¤à¤— 26 किलोमीटर दूर अयोधà¥à¤¯à¤¾ के धनीपà¥à¤° में मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ बिन अबà¥à¤¦à¥à¤²à¥à¤²à¤¾ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ बन रही है। मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की निरà¥à¤®à¤¾à¤£ समिति के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हाजी अरफात शेख à¤à¤µà¥à¤¯ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की विकास योजनाओं के साथ तैयार हैं। शेख ने नà¥à¤¯à¥‚ इंडिया अबà¥à¤°à¥‰à¤¡ के लिठविनोद कà¥à¤®à¤¾à¤° शà¥à¤•à¥à¤²à¤¾ के साथ अपने विचार साà¤à¤¾ किà¤à¥¤ पेश हैं पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अंश :
शेख कहते हैं कि यह à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ होने जा रही है और इसका नाम है मोहमà¥à¤®à¤¦ बिन अबà¥à¤¦à¥à¤²à¥à¤²à¤¾ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦à¥¤ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का नाम पैगंबर मोहमà¥à¤®à¤¦ साहब के नाम पर रखा गया है। पैगंबर मोहमà¥à¤®à¤¦ के पिता का नाम à¤à¥€ इसमें शामिल है। यह अपने आप में खास बात है कि मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का नाम पैगंबर के नाम पर रखा गया है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की समिति का अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· नियà¥à¤•à¥à¤¤ होने के बाद जब मैंने पूरे देश का दौरा किया तो मैंने सà¥à¤¨à¥à¤¨à¥€, तबà¥à¤²à¥€à¤—ी, देवबंदी, पीर और उलेमा से मà¥à¤²à¤¾à¤•ात की और उनसे बात की। मैंने उनसे कहा कि नबी की à¤à¤• à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ है कि आपको उस देश से जहां आप रहते हैं उतना ही पà¥à¤¯à¤¾à¤° करना चाहिà¤, जितना आप अपने धरà¥à¤® से करते हैं। इसका उलà¥à¤²à¥‡à¤– कà¥à¤°à¤¾à¤¨ और हदीस में किया गया है।
मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बताया कि हम बाबर के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ नहीं हैं। वह बस à¤à¤• शासक था जो लूटने के लिठधनà¥à¤·, à¤à¤¾à¤²à¥‡ और तलवारों के साथ à¤à¤¾à¤°à¤¤ आया था। हम गरीब नवाज के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ हैं। हमने नफरत को पà¥à¤¯à¤¾à¤° में बदलने का लकà¥à¤·à¥à¤¯ रखा था, यही नबी की विधि थी जो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हमें सिखाई थी। यह सब देश में शांति लाà¤à¤—ा और जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर हम नमाज पढ़ते हैं वह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ शांतिपूरà¥à¤£ होना चाहिà¤à¥¤ यदि शांति नहीं है, तो नमाज का कोई मतलब नहीं है। शांति पाने और अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के सामने समरà¥à¤ªà¤£ करने के लिठनमाज अदा की जाती है।
शेख ने कहा कि शांतिपूरà¥à¤£ तरीके से किया गया कà¥à¤› à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ है और लोगों ने इसे सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया है। हमने बांदà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤• कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® आयोजित किया जिसमें देश à¤à¤° से पीर और मौलानाओं ने à¤à¤¾à¤— लिया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ लोग शामिल हà¥à¤ जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤•-दूसरे को आंख से आंख मिलाकर नहीं देखा। उस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में लोगों की आंखों में आंसू थे जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की पहली à¤à¤²à¤• मिली और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ दिया और à¤à¤•-दूसरे को गले लगाया। à¤à¤¸à¤¾ पहली बार हà¥à¤† है और हाजी अराफात à¤à¤¸à¤¾ करने में सफल रहे।
इस सवाल पर कि कहा जा रहा है कि तैयार होने पर यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सबसे बड़ी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ होगी, हाजी अरफात शेख ने कहा कि देखिà¤, दो चीजें हैं, à¤à¤• à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• रूप से सबसे बड़ी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ और दूसरी अधिकतम लोगों के आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ से बनी मसà¥à¤œà¤¿à¤¦à¥¤ इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में सà¤à¥€ का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ और पà¥à¤¯à¤¾à¤° होगा जो इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के बारे में खास है। मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ दवा (चिकितà¥à¤¸à¤¾) और दà¥à¤† (आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦) का केंदà¥à¤° होगा। मेरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है कि मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ और असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के बाद उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ से कोई à¤à¥€ कैंसर के इलाज के लिठमà¥à¤‚बई नहीं आà¤à¤—ा।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मà¥à¤‚बई के असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² कैंसर रोगियों से à¤à¤°à¥‡ पड़े हैं। पहली चीज जो हम करना चाहते हैं वह है 500 बिसà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ वाला कैंसर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² बनाना चाहते हैं। वहां किसी à¤à¥€ जाति, धरà¥à¤® का वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चाहे वह हिंदू हो या मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨, उसका इलाज किया जाà¤à¤—ा। कोई à¤à¥€ मà¥à¤‚बई नहीं, बलà¥à¤•ि मोहमà¥à¤®à¤¦ बिन अबà¥à¤¦à¥à¤²à¥à¤²à¤¾ मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में इलाज के लिठजाà¤à¤—ा और वह à¤à¥€ मà¥à¤«à¥à¤¤à¥¤ किसी की मां, बेटा, बेटी या कोई रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° जिसका इलाज होगा, वह निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ देगा।
उन आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ को शिफा (रोगियों का सफलतापूरà¥à¤µà¤• इलाज करने की शकà¥à¤¤à¤¿) देगा। यह हमारा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है। इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में ईद पर नमाज अदा करने वालों की संखà¥à¤¯à¤¾ 9000 होगी। इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की दूसरी विशेषता यह है कि इसमें पांच मीनार होंगी जो इसà¥à¤²à¤¾à¤® के पांच सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों – कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करती हैं।
जब उनसे पूछा गया कि मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की खास बातों के बारे में बताà¤à¤‚, वह आवंटित जमीन के पांच à¤à¤•ड़ में होगी या उससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾? इस सवाल पर शेख ने कहा कि सरकार ने हमें पांच à¤à¤•ड़ जमीन आवंटित की है, लेकिन यह परियोजना बड़ी है। यह लोगों की अनà¥à¤¯ जरूरतों को पूरा करेगी। हम à¤à¤• इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, लॉ कॉलेज, सà¥à¤•ूल और असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² बनाने जा रहे हैं। ये सà¤à¥€ चीजें पांच à¤à¤•ड़ à¤à¥‚मि में संà¤à¤µ नहीं हैं। हम महसूस करते हैं कि हमें 12 से 15 à¤à¤•ड़ à¤à¥‚मि की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी। और अगर और जमीन की जरूरत पड़ी तो हम और जमीन खरीदेंगे जिससे लोगों को उचित सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤à¤‚ मिल सकें।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि हम शाकाहारी रसोई का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ à¤à¥€ कर रहे हैं। यदि आप सूफीवाद की अवधारणा को देखते हैं, खासकर जब आप खà¥à¤µà¤¾à¤œà¤¾ गरीब नवाज जाते हैं, यह देखते हà¥à¤ कि यहां आने वाले लोग हर जाति और धरà¥à¤® से आते हैं, तो वहां à¤à¤• शाकाहारी रसोई à¤à¥€ है। लगà¤à¤— 3000-5000 लोग हर दिन इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ करेंगे। जगह पर आने वाले लोगों का सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया जाà¤à¤—ा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शादी समारोह में किसी का à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया जाता है। हम यहां बनने वाले दà¥à¤¬à¤ˆ से à¤à¥€ बड़े वजू खाना में सबसे बड़े फिश à¤à¤•à¥à¤µà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤® का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करेंगे।
निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कारà¥à¤¯ कब शà¥à¤°à¥‚ होगा और काम पूरा होने में कितना समय लगेगा? इस सवाल के जवाब में शेख ने कहा कि हम इसे इस साल फरवरी से शà¥à¤°à¥‚ करना चाहते थे, लेकिन सà¤à¥€ साथी और सूफी ईंटें लेकर आà¤à¤‚गे जो देश की सà¤à¥€ दरगाहों में जाà¤à¤‚गी, वहां से अजमेर जाà¤à¤‚गी। यह अजमेर से मà¥à¤‚बई पहà¥à¤‚चेगी और मà¥à¤‚बई से साधà¥-संत पहà¥à¤‚चेंगे और नींव रखी जाà¤à¤—ी। जफर फारूकी साहब, मौलाना अबà¥à¤¦à¥à¤² कमर साहब, हम सà¤à¥€ बैठकर विचार-विमरà¥à¤¶ करते हैं और उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि यह रमजान के बाद शà¥à¤°à¥‚ होगा।
इसके निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पर कितना पैसा खरà¥à¤š होने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है और पैसा कहां से आà¤à¤—ा? इस सवाल पर शेख ने कहा कि इस मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के लिठसड़कों पर कोई पैसे मांगने नहीं जाà¤à¤—ा। हम इसके लिठà¤à¤• वेबसाइट लॉनà¥à¤š करने की योजना बना रहे हैं। जो बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ लॉनà¥à¤š की जाà¤à¤—ी। वेबसाइट पर हर विवरण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाà¤à¤—ा। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में कोई à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दान कर सकता है।
अयोधà¥à¤¯à¤¾ में राम मंदिर का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हो रहा है। अयोधà¥à¤¯à¤¾ और उसके आसपास के बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ ढांचे को हवाई अडà¥à¤¡à¥‡ से रेलवे सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ और सड़कों से होटलों तक सजाया गया है। कà¥à¤¯à¤¾ यह किसी à¤à¥€ तरह से मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ की मदद करेगा? इस सवाल पर हाजी अरफात शेख ने कहा कि हमारे पास à¤à¤¸à¥€ चीजों के विकास के लिठबहà¥à¤¤ सकà¥à¤·à¤® पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ हैं। जिस तरह से सरकार देश à¤à¤° में सड़कों, पà¥à¤²à¥‹à¤‚, हवाई अडà¥à¤¡à¥‹à¤‚, असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ और यहां तक कि बिजली के बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ ढांचे पर काम कर रही है, वह हर जाति और धरà¥à¤® के लोगों की मदद कर रही है। इसलिà¤, जब à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤‚दर चीज सामने आà¤à¤—ी, तो इससे सà¤à¥€ को लाठहोगा।
इससे पूरे यूपी के लोगों को सहूलियत होगी। मसà¥à¤œà¤¿à¤¦ का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ हवाई अडà¥à¤¡à¥‡ और राजमारà¥à¤—ों से अचà¥à¤›à¥€ तरह से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। मंदिरों में जाने वाले लोग मसà¥à¤œà¤¿à¤¦à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ दरà¥à¤¶à¤¨ के लिठआ सकते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बहà¥à¤¤ सारे मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ à¤à¥€ राम मंदिर जाते हैं। इस विकास से पूरे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° और कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के लोगों को लाठहोगा।
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