आज जब हम जया बचà¥à¤šà¤¨ के बारे में सोचते हैं तो हमें à¤à¤• बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— महिला की याद आती है जो पैपराजी को सबक सिखाती रहती है और सबसे तीखी बातें कहती है और à¤à¥Œà¤‚हें चढ़ाकर चल देती है। उनके बचà¥à¤šà¥‡ कहते हैं कि वे कà¥à¤²à¥‰à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‹à¤¬à¤¿à¤• (बंद या संकीरà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में होने का असामानà¥à¤¯ डर) हैं, जो उनकी अधीरता को रेखांकित करता है। लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ उस कठोर बाहरी आवरण से परे à¤à¤• 'शरारत' à¤à¥€ à¤à¤¾à¤‚कती है। आंखों में चमक लिठà¤à¤• à¤à¤¸à¥€ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ जो हमें वह सब कà¥à¤› याद दिलाती है जो वह शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ अमिताठबचà¥à¤šà¤¨ बनने से पहले थीं।
बचà¥à¤šà¤¨ परिवार की मà¥à¤–िया जया बचà¥à¤šà¤¨-कई चीजों के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हैं। मगर निकट अतीत में उनमें से अधिकतर चीजें बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ नहीं रही हैं। लेकिन बहà¥à¤¤ कà¥à¤› निराधार बातें à¤à¥€ तैरती रही हैं। रिपोरà¥à¤¤à¤¾à¤œ यह तथà¥à¤¯ है कि लोग à¤à¥‚ल गठहैं कि वह à¤à¤• अà¤à¥‚तपूरà¥à¤µ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने सहज अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ और ओजसà¥à¤µà¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ से अपने समकालीनों को चिंता में डाल दिया था।
वह आदरà¥à¤¶ बचà¥à¤šà¤¨ कà¥à¤²à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ की à¤à¥‚मिका इतनी अचà¥à¤›à¥€ तरह से निà¤à¤¾ रही हैं कि इस सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ को लगà¤à¤— à¤à¥à¤²à¤¾ दिया गया है कि वह à¤à¤• महान अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ थीं। इस à¤à¤«à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆà¤†à¤ˆ सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• का जनà¥à¤® 9 अपà¥à¤°à¥ˆà¤², 1948 को मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के à¤à¤• छोटे से शहर जबलपà¥à¤° में à¤à¤• विशिषà¥à¤Ÿ बंगाली विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ परिवार में हà¥à¤† था।
जया के पिता तरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° à¤à¤¾à¤¦à¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ लेखक थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने चंबल-द वैली ऑफ टेरर की रचना की थी। जया बचà¥à¤šà¤¨ को अकà¥à¤¸à¤° अपने माता-पिता और उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी गई परवरिश के बारे में बात करते हà¥à¤ सà¥à¤¨à¤¾ जाता है। जया बचà¥à¤šà¤¨ का पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ यूं तो पहले ही हो गया था लेकिन उनका à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग करियर उससे कà¥à¤› साल पहले ही शà¥à¤°à¥‚ हो गया था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सतà¥à¤¯à¤œà¥€à¤¤ रे की फिलà¥à¤® महानगर से शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की। यह फिलà¥à¤® उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी पारिवारिक मितà¥à¤° और अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ शरà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¾ टैगोर के सौजनà¥à¤¯ से मिली, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस à¤à¥‚मिका के लिठउनकी सिफारिश की थी।
पहली छाप के बारे में शरà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¾ ने कहा था- 1975 में फरार और चà¥à¤ªà¤•े-चà¥à¤ªà¤•े में पहली बार सह-कलाकार होने से बहà¥à¤¤ पहले हम पारिवारिक मितà¥à¤° थे। मैं अमिताठऔर जया दोनों को कोलकाता से जानती हूं। मैं जया को तब से जानती हूं जब वह 13 साल की थी और वह बहà¥à¤¤ पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ थी। वह उस उमà¥à¤° में à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤° बनना चाहती थी।
गà¥à¤¡à¥à¤¡à¥€ से हà¥à¤† सपना साकार...
13 साल की लड़की ने जो सपना देखा था वह 'गà¥à¤¡à¥à¤¡à¥€' के साथ हकीकत में बदल गया। यह फिलà¥à¤® जया की बॉलीवà¥à¤¡ में पहली फिलà¥à¤® थी। लेकिन वह तो बस शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ थी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने संजीव कà¥à¤®à¤¾à¤° के साथ à¤à¤• यादगार जोड़ी बनाई और साथ में उनकी कà¥à¤› अदà¥à¤à¥à¤¤ फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ हैं। 'कोशिश' में उनके अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ के लिठआज à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खूब सराहना मिलती है।
'कोशिश' में संजीव कà¥à¤®à¤¾à¤° और जया ने à¤à¤• मूक-बधिर जोड़े की à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆà¥¤ यह फिलà¥à¤® उस जो़ड़े के रिशà¥à¤¤à¥‡ और जीवन की यातà¥à¤°à¤¾ की à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ कहानी कहती है। 1979 में आई नौकर में जया ने नौकरानी गीता का किरदार निà¤à¤¾à¤•र सबका दिल जीत लिया था।
जया ने पहली बार बंसी बिरजू में अमिताठबचà¥à¤šà¤¨ के साथ सह-कलाकार की à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ और जब तक उनकी अनà¥à¤¯ फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ आईं तब तक उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤¯à¤¾à¤° हो गया था। मिली, अà¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨, जंजीर और शोले जैसी बड़ी फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ की यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान जया और अमिताठमें पेशेवर और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त केमिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ बढ़ी। 3 जून 1973 में उनकी शादी हो गई! शादी के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¥à¤› फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ कीं। मगर फिर सिलसिला तब बंद हो गया जब उनकी बेटी शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾ ने उनका दà¥à¤ªà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ पकड़कर उनसे घर में रहने की गà¥à¤¹à¤¾à¤° लगाई।
तब मां, पतà¥à¤¨à¥€ और बचà¥à¤šà¤¨ परिवार की सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को पà¥à¤°à¤¿à¤¯ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ पर पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी गई। हालांकि उनके पà¥à¤°à¤¶à¤‚सक उनकी वापसी का इंतजार करते रहे। इस तथà¥à¤¯ के बावजूद कि वह अपने पति की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में बहà¥à¤¤ बड़ी सà¥à¤Ÿà¤¾à¤° थीं उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बाकी सà¤à¥€ चीजों के बजाय पà¥à¤¯à¤¾à¤° को चà¥à¤¨à¤¾à¥¤ आज जिस तरह से वह परिवार को संà¤à¤¾à¤²à¤¤à¥€ हैं उससे साफ है कि उनका फैसला उचित ही थी।
जया वह डोर हैं जो परिवार को बांधे रखती है। लेकिन फिलà¥à¤®à¥‡à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हमेशा पà¥à¤°à¤¿à¤¯ थीं इसलिठयह कोई आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ की बात नहीं है कि वह कà¥à¤› चà¥à¤¨à¤¿à¤‚दा लोगों के लिठसà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर वापसी करती रहीं। वे उनà¥à¤¹à¥‡ मना नहीं कर सकीं। हजार चौरासी की मां, फिजा, कà¤à¥€ खà¥à¤¶à¥€ कà¤à¥€ गम में उनके अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ को पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा मिली और पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार à¤à¥€à¥¤
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 'देख à¤à¤¾à¤ˆ देख नामक' à¤à¤• टेलीविजन शो का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ à¤à¥€ किया जो 1990 के दशक में à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहा। वैसे, यह बात बहà¥à¤¤ कम लोग जानते होंगे कि अमिताठबचà¥à¤šà¤¨ की 1988 की सà¥à¤ªà¤°à¤¹à¤¿à¤Ÿ फिलà¥à¤® शहंशाह की कहानी का शà¥à¤°à¥‡à¤¯ उनकी पतà¥à¤¨à¥€ जया बचà¥à¤šà¤¨ को जाता है।
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