à¤à¤¾à¤°à¤¤ आतंकवाद के खिलाफ अपनी जंग के तीसरे चरण में है। पहला चरण वह था जिसमें पहलगाम हमले के साजिशकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं को सबक सिखाने के लिठ7 मई को पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ और पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के कबà¥à¤œà¥‡ वाले कशà¥à¤®à¥€à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने आतंकी ठिकानों पर पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया था। दूसरे चरण में à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच अधिकतर सीमाई कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सशसà¥à¤¤à¥à¤° संघरà¥à¤· हà¥à¤† और तीन-चार दिन की हिंसक कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ में दोनों ओर से 100 से अधिक जानें जाने के बाद 10 मई को यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम लागू हो गया। यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम के बाद से अब तक जो हो रहा है और आने वाले दिनों में होने वाला है, खास तौर से à¤à¤¾à¤°à¤¤ की ओर से, उसे आतंकवाद के खिलाफ जंग का तीसरा चरण माना जा सकता है। इस चरण को हम सीधे-सीधे राजनयिक घेराबंदी à¤à¥€ कह सकते हैं।
गौरतलब है कि तीसरे चरण की डोर à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से ही थाम कर रखी है। इसीलिठ7 मई के पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° के ततà¥à¤•ाल बाद ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने अमेरिका समेत दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के अधिकांश (जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मितà¥à¤°) राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‚ को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में खà¥à¤¦ ही बताया। अलबतà¥à¤¤à¤¾, जिस दूसरे चरण का अंत à¤à¤¾à¤°à¤¤-पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम से हà¥à¤† उसके अंतिम अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ को लेकर दावे-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¾à¤µà¥‡ और संशय की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है। इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ का कहना है कि यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम की पेशकश पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की ओर से की गई थी और जो फैसला हà¥à¤† वह दोनों देशों के बीच का मसला रहा। वहीं, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ का रà¥à¤– इस मसले पर खà¥à¤²à¤•र सामने नहीं आया। लेकिन अमेरिका ने दावा कर दिया कि यà¥à¤¦à¥à¤§ विराम उसकी कोशिशों का नतीजा है। हालांकि à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने अमेरिका के इस दावे का खंडन किया है।
बहरहाल, तो बात चल रही थी आतंकवाद के खिलाफ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की जंग के तीसरे चरण की। राजनयिक समरà¥à¤¥à¤¨ हासिल करने, तमाम देशों को अपनी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ करने, पड़ोसी पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को बेनकाब करने और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के अपने सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड को साफ करने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ से सात सरà¥à¤µà¤¦à¤²à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤®à¤‚डल दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के तमाम देशों की यातà¥à¤°à¤¾ कर निकल रहे हैं। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤®à¤‚डल के सदसà¥à¤¯ जिन-जिन देशों में जाà¤à¤‚गे वहां सियासी सà¥à¤¤à¤° पर तो अपना काम करेंगे ही यूà¤à¤¨ जैसे अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मंच पर à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की बात सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ से रखी जाà¤à¤—ी। अब आतंकवाद से जंग की राह में पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को सरहदों के पार घेरने की à¤à¤¾à¤°à¤¤ की यह कवायद कà¥à¤¯à¤¾ रंग लाती है यह तो समय आने पर ही पता चलेगा लेकिन इतना तो लग ही रहा है कि इसके (राजनय) जरिये à¤à¤¾à¤°à¤¤ पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल करना चाह रहा है। राजनय के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤¾à¤°à¤¤ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के तमाम देशों को यह à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤¨à¤¾ चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई उसकी अकेले की नहीं है। यह जंग उन तमाम देशों की तो है ही जो इसका दंश à¤à¥‡à¤² चà¥à¤•े हैं, उनकी à¤à¥€ है जो सीधे-सीधे à¤à¤²à¥‡ ही किसी हमले का शिकार न हà¥à¤ हों लेकिन परोकà¥à¤· रूप से उससे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं या हो सकते हैं। शायद इस राजनयिक मà¥à¤¹à¤¿à¤® की जरूरत à¤à¤¾à¤°à¤¤ को इसलिठà¤à¥€ पड़ी कि पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के खिलाफ हालिया टकराव में जिस 'खà¥à¤²à¥‡ समरà¥à¤¥à¤¨' की वह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से आस लगाठबैठा था, वैसा मिला नहीं। उस पर विडंबना यह कि पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को तà¥à¤°à¥à¤•िये और अजरबैजान का खà¥à¤²à¤¾ समरà¥à¤¥à¤¨ मिला और चीन à¤à¥€ उसके पीछे खड़ा दिखा।
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