लेखिका पारà¥à¤² कपूर का पहला उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ 'इनसाइड द मिरर' 1950 के दशक की मà¥à¤‚बई की कहानी है। यह वह दौर था जब उपनिवेशवाद के चंगà¥à¤² से निकला à¤à¤¾à¤°à¤¤ खà¥à¤¦ को नठसिरे से गढ़ने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ में जà¥à¤Ÿà¤¾ है। यह कहानी है दो जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾ बहनों और उनके परिवार के दà¥à¤µà¤‚दà¥à¤µ की है जो महिलाओं के लिठपारंपरिक à¤à¥‚मिकाओं से परे अपनी सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ पर जोर देने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती हैं और उनका विरोध होता है।
जया मेडिकल सà¥à¤•ूल अटेंड करती हैं, लेकिन वह à¤à¤• चितà¥à¤°à¤•ार बनना चाहती हैं। उनकी बहन कमलेश फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ में à¤à¤°à¤¤à¤¨à¤¾à¤Ÿà¥à¤¯à¤® डांस करने का खà¥à¤µà¤¾à¤¬ देखती हैं। वहीं, जया के माता-पिता शादी के लिठà¤à¤• अचà¥à¤›à¥‡ लड़के की तलाश में जà¥à¤Ÿà¥‡ हैं। जया और कमलेश की दादी बेबेजी à¤à¤• पूरà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ सेनानी है। आजादी की लड़ाई के बाद अब वह परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के लिठà¤à¤• नई लड़ाई लड़ती हैं, लेकिन अपनी पोतियों के साथ रूढ़िवादी हैं। यà¥à¤µà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ लड़कियों के लिठसमाज के सखà¥à¤¤ दायरे से बाहर जाने के उनके पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की निंदा करती हैं।
नà¥à¤¯à¥‚ इंडिया अबà¥à¤°à¥‰à¤¡ के साथ à¤à¤• इंटरवà¥à¤¯à¥‚ में लेखिका पारà¥à¤² कपूर ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ विà¤à¤¾à¤œà¤¨ के बाद à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ महिलाओं के जीवन के अंरà¥à¤¤à¤¦à¥à¤µà¤‚दà¥à¤µ के बारे में बात की, यह देखते हà¥à¤ कि उनमें से कई ने सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ के आंदोलन में à¤à¤¾à¤— लिया था, लेकिन फिर à¤à¥€ अपने परिवारों के लिठवे रूढ़िवादी विचार रखते थे।
पारà¥à¤² ने कहा कि जया और कमलेश उस वकà¥à¤¤ सबसे अधिक जीवंत महसूस करती हैं, जब वे अपनी कला का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कर रही होती हैं। उनका अपने माता-पिता या समाज के खिलाफ विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ करना इतना नहीं है, जितना कि यह उनके आंतरिक सपनों का पूरा करना है। इसलिठअगर इसका मतलब है कि वे सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के सामाजिक मानदंडों को तोड़ रही हैं, तो उनकी दादी इसके लिठतैयार नहीं हैं। सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ सेनानी होने का मतलब यह नहीं था कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने परिवार के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दायितà¥à¤µà¥‹à¤‚ की अवहेलना की, à¤à¤²à¥‡ ही वह आंदोलन के लिठजेल गई हों।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि कमलेश के लिठà¤à¤• अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€ या जया के लिठà¤à¤• चितà¥à¤°à¤•ार बनना और शादी नहीं करना और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ वाले इस समूह में शामिल होने से इनकार करना, ये à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ थी जब ये माना जाता था कि आप अपने परिवार को शरà¥à¤®à¤¿à¤‚दा करते हैं। 1950 के दशक के à¤à¤¾à¤°à¤¤ में केवल कà¥à¤› मà¥à¤Ÿà¥à¤ ी à¤à¤° महिला कलाकार थीं।
लेखिका ने कहा कि बेबेजी इसका समरà¥à¤¥à¤¨ नहीं करेंगी, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तब उनका à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤° पारिवारिक जीवन नहीं होगा, जो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज का आधार है। लेकिन इस तरह से वे अपने परिवार को शरà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤° कर रही हैं, अपने परिवार के लिठविनाशकारी हो रही हैं।
विà¤à¤¾à¤œà¤¨ के बाद के यà¥à¤— में उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लेखन ने पारà¥à¤² कपूर को उपनिवेशवाद के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ की अधिक बारीकी से जांच करने की इजाजत दी। पारà¥à¤² ने कहा कि अपने उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ में मैं विà¤à¤¾à¤œà¤¨ पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फोकस नहीं करना चाहती थी। वह उथल-पà¥à¤¥à¤², हिंसा और नरसंहार का दौर था। à¤à¤¸à¥‡ में सामानà¥à¤¯ जीवन वासà¥à¤¤à¤µ में नहीं चल सकता था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, उनके दादा ने उसे विà¤à¤¾à¤œà¤¨ की à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¤à¤¾ के बारे में कई कहानियां सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ थीं।
कपूर ने कहा कि मैं विà¤à¤¾à¤œà¤¨ के बाद के उस दौर के बारे में लिखना चाहती थीं, जहां विà¤à¤¾à¤œà¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ अà¤à¥€ à¤à¥€ लोगों के जीवन में बहà¥à¤¤ महसूस किया जाता था। उनकी आतà¥à¤®-रचना विà¤à¤¾à¤œà¤¨ की इस तà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¦à¥€ से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है, जिसे उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सीधे अनà¥à¤à¤µ नहीं किया है, लेकिन उनके परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने किया है।
पारà¥à¤² ने उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ पर शोध और लेखन में 15 साल से अधिक समय बिताया। पारà¥à¤² ने कहा कि उनका उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ इस उथल-पà¥à¤¥à¤² को देखने के उस घाव से बढ़ती है, अपने रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ की उदासी को देखकर, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने घरों को खो दिया है, परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को खो दिया है। मà¥à¤à¥‡ लगता है कि मà¥à¤à¥‡ वासà¥à¤¤à¤µ में उस इतिहास को समà¤à¤¨à¥‡ में लंबा समय लगा, जहां से ये लड़कियां आ रही हैं।
2022 में अपनी रिलीज से दो साल पहले, 'इनसाइड द मिरर' को उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के लिठà¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ऑफ राइटरà¥à¤¸ à¤à¤‚ड राइटिंग पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®à¥à¤¸ (AWP) पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिला। जसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ बà¥à¤°à¥ˆà¤‚डन हॉबà¥à¤¸à¤¨ ने लिखा 'लालितà¥à¤¯ और सटीकता के साथ तैयार किया गया और पारिवारिक डà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾ की खोज में दिल दहला देने वाला यह उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ का à¤à¤• सà¥à¤‚दर मिशà¥à¤°à¤£ है।' इस उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ को इस साल नारीवादी विषयों को संबोधित करने के लिठMs magazine दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अवशà¥à¤¯ पढ़े जाने वाले के रूप में à¤à¥€ चà¥à¤¨à¤¾ गया था।
लेखिका पारà¥à¤² कपूर का जनà¥à¤® à¤à¤¾à¤°à¤¤ के असम राजà¥à¤¯ में हà¥à¤† है और वह अमेरिका के Connecticut में पली-बढ़ी। इसके बाद वह 1984 में à¤à¤¾à¤°à¤¤ लौट गईं और बॉमà¥à¤¬à¥‡ पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा के लिठलिखते हà¥à¤ मà¥à¤‚बई में रहीं। फिर वह वह अमेरिका लौट आईं और कोलंबिया विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से MFA किया। उनके नाम और काम को कई साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में जगह मिली है, जिनमें द नà¥à¤¯à¥‚ यॉरà¥à¤•र और गà¥à¤à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤•ा शामिल हैं। फिलहाल अब अटलांटा, जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ में रहती हैं।
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