अनमासà¥à¤•, à¤-फेयर विद थिà¤à¤Ÿà¤° (महोतà¥à¤¸à¤µ) 24-26 जनवरी 2025 को बेंगलà¥à¤°à¥ के सेंट जॉन ऑडिटोरियम में शानदार सफलता के साथ शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†à¥¤ इसने शहर के निवासियों को à¤à¤• शानदार रंगमंच पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का अवसर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया।
महोतà¥à¤¸à¤µ ने बेंगलà¥à¤°à¥ निवासियों को डेनà¥à¤œà¤¿à¤² सà¥à¤®à¤¿à¤¥, लिलेट दà¥à¤¬à¥‡, सà¥à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤°à¤¾ पिलà¥à¤²à¤ˆ और सारा हाशमी जैसे शीरà¥à¤· पायदान के अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾à¤“ं के मंतà¥à¤°à¤®à¥à¤—à¥à¤§ कर देने वाले पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ को देखने का मौका दिया। 25 जनवरी को इन कलाकारों ने हॉलीवà¥à¤¡ और बॉलीवà¥à¤¡ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• लिलेट दà¥à¤¬à¥‡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤¤ नाटक ऑटोबायोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ का पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° किया।
ऑटोबायोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ ने दरà¥à¤¶à¤•ों को चार पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के जीवन से रूबरू कराया। इस पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ में उनके जीवन की दयनीयता, ईरà¥à¤·à¥à¤¯à¤¾, कायरता और खोठहà¥à¤ अवसरों को à¤à¤• सूकà¥à¤·à¥à¤® और बहà¥à¤¸à¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ गया है।
नाटक की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ सेनानी, लेखक और कवि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपनी आतà¥à¤®à¤•था लिखने से होती है। मंच को दो à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ किया गया है, जिसके à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ में सेनानी अनंतराव राजाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· की पूरà¥à¤µ पतà¥à¤¨à¥€, उतà¥à¤¤à¤°à¤¾ का बैठक ककà¥à¤· है। दà¥à¤¬à¥‡ ने खà¥à¤¦ पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ लेखक की पतà¥à¤¨à¥€ उतà¥à¤¤à¤°à¤¾ की à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ है। उनका लिविंग रूम मंच के दूसरे आधे हिसà¥à¤¸à¥‡ में है। दोनों के बीच तीस साल तक चली निःसंतान शादी का खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ हà¥à¤†à¥¤
चरà¥à¤šà¤¾ का विषय तलाक की कारà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¹à¥€ के दौरान जोड़े दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किठगठपतà¥à¤°à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤•ाशन है। राजाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· अनजाने में अनà¥à¤°à¥‹à¤§ करके उसे (पतà¥à¤¨à¥€) अपने पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤•ाशित करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है। वह मनमà¥à¤Ÿà¤¾à¤µ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤•दम आगे बढ़ जाती है जिससे दोनों शहर में चरà¥à¤šà¤¾ का विषय बन गठहैं।
जैसे ही दरà¥à¤¶à¤•ों को लगता है कि यह à¤à¤• समय के महान और अब इतने महान लेखक नहीं रहे लेखक की दà¥à¤–द आतà¥à¤®à¤•था के रूप में सामने आने वाली है, कहानी में à¤à¤• अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ मोड़ आ जाता है। राजाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· ने खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ किया कि उनकी पतà¥à¤¨à¥€ उतà¥à¤¤à¤°à¤¾ की छोटी बहन वसंती, जिसका किरदार सà¥à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤°à¤¾ पिलà¥à¤²à¤ˆ ने निà¤à¤¾à¤¯à¤¾ है, का अपनी बहन की नाक के नीचे उनके साथ पà¥à¤°à¥‡à¤® संबंध था।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी किताब में उस दृशà¥à¤¯ को वैसा ही लिखा है जैसी उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दोनों बहनों के बीच होने की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ की थी। 'अà¤à¥€ मेरे घर से बाहर निकलो' वह कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ करता है कि उसकी पतà¥à¤¨à¥€ चिलà¥à¤²à¤¾ रही है> कà¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤® अपनी ताई (बड़ी बहन) को खà¥à¤¦ को आग लगाते हà¥à¤ देखना चाहते हो! बहन अपने पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ के घर चली जाती है। उसी रात उसकी पतà¥à¤¨à¥€ à¤à¥€ उसे छोड़कर चली जाती है।
दोनों बहनें कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ बाद फिर से à¤à¤• साथ याद करती हैं कि वासà¥à¤¤à¤µ में उस रात उनके बीच कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤† था। उसने कहा- उसने कहा परिदृशà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की रात की घटनाओं की चयनातà¥à¤®à¤• सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ के विपरीत होते हैं। नाटक का आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯à¤œà¤¨à¤• अंत दरà¥à¤¶à¤•ों को निराशा से à¤à¤° देता है। खोठहà¥à¤ अवसरों के दà¥à¤ƒà¤– और इस पà¥à¤°à¤•ार खोई हà¥à¤ˆ खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण कà¥à¤› दरà¥à¤¶à¤•ों की आंखों से आंसू बहने लगते हैं।
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