अब वैलेंटाइन डे पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में कैंडल लाइट डिनर, गà¥à¤²à¤¾à¤¬ के गà¥à¤²à¤¦à¤¸à¥à¤¤à¥‡ और हमेशा खà¥à¤¶ रहने की घोषणाओं के साथ मनाया जाता है। जिस कैथोलिक पादरी के नाम पर इस दिन का नाम रखा गया था उसकी याद लगà¤à¤— फीकी पड़ चà¥à¤•ी है। संत वैलेंटाइन तीसरी सदी में रोम में रहते थे। तब समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ कà¥à¤²à¥‰à¤¡à¤¿à¤¯à¤¸ दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ ने यà¥à¤µà¤¾ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को विवाह करने से रोकने के लिठà¤à¤• कानून पारित किया था कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका मानना था कि अविवाहित बेहतर सैनिक बनते हैं।
मगर संत ने इस कानून की अवहेलना की और देशदà¥à¤°à¥‹à¤¹ के आरोप में गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° होने और मौत की सजा सà¥à¤¨à¤¾à¤ जाने से पहले उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गà¥à¤ªà¥à¤¤ रूप से कई यà¥à¤µà¤¾ जोड़ों की शादी करवाई थी। जेल में रहते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कथित तौर पर जेलर की बेटी की नेतà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ का उपचार किया था और अपनी मृतà¥à¤¯à¥ से पहले à¤à¤• पतà¥à¤° में अपने दिल की बात उसके सामने रखी। उस पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किठऔर लिखा- आपके वैलेंटाइन की ओर से।
तब से यह हर रोमियो और जूलियट का हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° बन गया है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में, 14 फरवरी अपने संरकà¥à¤·à¤• संत की यादों को वापस नहीं ला सकता है, लेकिन यह निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ यानी 'सिलà¥à¤µà¤° सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ की वीनस' को याद दिलाता है, जिनके हवा से उड़ते हà¥à¤ बाल, चमकती हà¥à¤ˆ आंखें और मोहक मà¥à¤¸à¥à¤•ान आज à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर किसी की पसंदीदा वैलेंटाइन बनाती है।
अताउलà¥à¤²à¤¾à¤¹ खान और बेगम आयशा की 11 संतानों में सबसे सà¥à¤‚दर मà¥à¤®à¤¤à¤¾à¤œ जहां बेगम देहलवी का जनà¥à¤® 14 फरवरी, 1933 को दिलà¥à¤²à¥€ में हà¥à¤† था और à¤à¤• जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤·à¥€ (कशà¥à¤®à¥€à¤° वाले बाबा) ने उनके नाम, पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§à¤¿ और धन की à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ की थी लेकिन साथ ही यह à¤à¥€ कहा था कि वह कम उमà¥à¤° में ही मर जाà¤à¤‚गी। यदि उनके माता-पिता परामरà¥à¤¶ का खरà¥à¤š उठाने में सकà¥à¤·à¤® होते तो à¤à¤• विशेषजà¥à¤ž चिकितà¥à¤¸à¤• ने à¤à¥€ यही à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ की होती कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मà¥à¤®à¤¤à¤¾à¤œ à¤à¤• 'नीली' बचà¥à¤šà¥€ थी, जो वेंटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤²à¤° सेपà¥à¤Ÿà¤² डिफेकà¥à¤Ÿ (VSD) का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• संकेत था। बोलचाल की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में इसका मतलब है कि उसके दिल में छेद था।
हालांकि जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ हृदय रोग का पता तब तक नहीं चला जब तक वह 21 वरà¥à¤· की नहीं हो गई। 1954 में मà¥à¤®à¤¤à¤¾à¤œ, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ देविका रानी ने मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ नाम दिया था, मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ (अब चेनà¥à¤¨à¤ˆ) में जब à¤à¤¸à¤à¤¸ वासन की फिलà¥à¤® चालाक की शूटिंग कर रही थीं जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अचानक खून की उलà¥à¤Ÿà¥€ होने लगी। जांच पर विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ ने पाया कि ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤ फेफड़ों में वापस पंप किया जा रहा था, जहां यह ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨-रहित रकà¥à¤¤ के साथ मिल जाता था। इससे फेफड़ों में फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ दबाव बढ़ जाता था। शरीर में अतिरिकà¥à¤¤ रकà¥à¤¤ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ न होने के कारण रकà¥à¤¤ नाक और मà¥à¤‚ह से बाहर निकल रहा था।
यह 15 साल की कठिन परीकà¥à¤·à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ थी। मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ ने अपनी जगह किसी और को न लेने के लिठवासन परिवार का हमेशा आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई बार चालाक को पूरा करने की कोशिश की। करीब 12 साल बाद 1966 में à¤à¤• आखिरी कोशिश à¤à¥€ की लेकिन कà¥à¤› दिनों के बाद ही वह टूट गई और अंततः फिलà¥à¤® को बंद कर दिया गया।
हालांकि यà¥à¤µà¤¾ शहजादे आज à¤à¥€ उनकी तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‹à¤‚ पर फिदा हैं, जबकि वह कबà¥à¤° से परे से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 'आà¤à¤—ा... आà¤à¤—ा, आà¤à¤—ा आने वाला, आà¤à¤—ा' कहकर बà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥€ हैं। 1949 की मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• अलौकिक डà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾ फिलà¥à¤® महल, पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ लेखक कमाल अमरोही के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ की पहली फिलà¥à¤® थी। कमाल ने मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ को चà¥à¤¨à¤•र अपने करियर को जोखिम में डाला था कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तब मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ बॉकà¥à¤¸-ऑफिस कà¥à¤µà¥€à¤¨ सà¥à¤°à¥ˆà¤¯à¤¾ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत नई थीं। कमाल ने उनकी सà¥à¤‚दरता से मंतà¥à¤°à¤®à¥à¤—à¥à¤§ होकर, उनके चेहरे पर घूंघट लपेटने और उनके उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ को निखारने में घंटों बिताà¤à¥¤
सà¥à¤Ÿà¥‚डियो के किसà¥à¤¸à¥‡-कहानियों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बहà¥à¤¤ समय पहले ही कà¥à¤²à¥€à¤¨ और विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ ने उस किशोरी को अपना दिल दे दिया, जिसने उनकी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं का उतनी ही उतà¥à¤¸à¥à¤•ता से जवाब दिया। कथित तौर पर इस जोड़े को उसके पिता का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था। à¤à¤•मातà¥à¤° अड़चन यह थी कि अमरोही पहले से ही शादीशà¥à¤¦à¤¾ और पिता थे। मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ उनकी दूसरी पतà¥à¤¨à¥€ नहीं बनना चाहती थीं इसलिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने निकाह से पहले तलाक पर जोर दिया। वह इसके लिठसहमत नहीं हà¥à¤† और अंततः कमाल और मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ के रासà¥à¤¤à¥‡ अलग हो गà¤à¥¤
कà¥à¤› समय बाद मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ की मà¥à¤²à¤¾à¤•ात 1951 की à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ रोमांस फिलà¥à¤® बादल के सेट पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सैमसन यानी पà¥à¤°à¥‡à¤® नाथ से हà¥à¤ˆà¥¤ मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ ने अपने हेयरडà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤° के हाथ पà¥à¤°à¥‡à¤® नाथ को à¤à¤• गà¥à¤²à¤¾à¤¬ à¤à¥‡à¤œà¤¾à¥¤ साथ में à¤à¤• नोट à¤à¥€ था जिसमें लिखा था कि वे फूल तà¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार करें उनको उससे पà¥à¤¯à¤¾à¤° हो। पà¥à¤°à¥‡à¤® नाथ ने गà¥à¤²à¤¾à¤¬ रख लिया और उनका पà¥à¤¯à¤¾à¤° तब तक पनपता रहा जब तक कि अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ ने सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ से यह पता लगाने के बाद कि उनका दोसà¥à¤¤ दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° à¤à¥€ उससे पà¥à¤¯à¤¾à¤° करता है, उससे दूर नहीं हो गया। पà¥à¤°à¥‡à¤® नाथ ने बीना राय से शादी की लेकिन मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ और वह दोसà¥à¤¤ बने रहे और सालों बाद जब मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ के पिता बीमार पड़े तो (उनके बेटे मोंटी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°) पà¥à¤°à¥‡à¤® नाथ ने चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª अताउलà¥à¤²à¤¾à¤¹ खान के तकिठके नीचे 1 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का चेक छोड़ दिया।
पांच साल बाद मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ ने चलती का नाम गाड़ी में अपने सह-कलाकार किशोर कà¥à¤®à¤¾à¤° के साथ चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª निकाह कर लिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने घर में à¤à¤• साथ अपना जीवन शà¥à¤°à¥‚ किया लेकिन जलà¥à¤¦ ही मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ की हालत खराब हो गई और किशोर, जो अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ और संगीत के कामों के कारण अकà¥à¤¸à¤° बाहर रहते थे, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनके पिता के घर छोड़ गठजहां उनकी बहनें उनका साथ दे सकती थीं। वह नौ साल तक जीवित रहीं और 1966 में जब दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° ने सायरा बानो से शादी की, तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनसे मिलने की इचà¥à¤›à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ की। जब वह फिर से उनके घर गठतो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कथित तौर पर उनसे कहा- वह खà¥à¤¶ हैं कि हमारे शहजादे को उनकी शहजादी मिल गई है। वह तीन साल बाद, 23 फरवरी, 1969 को, अपने 36वें जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ के तà¥à¤°à¤‚त बाद दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से चली गईं।
साल 2010 में उनकी कबà¥à¤° को धà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ कर दिया गया। शायद वह नहीं चाहती थीं कि लोग उनकी मौत को याद रखें। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तब और खà¥à¤¶à¥€ होती जब 12 नवंबर 2004 को मà¥à¤—ल-à¤-आजम 44 साल बाद सिनेमाघरों में लौटती और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फिर से परà¥à¤¦à¥‡ पर दिखाती। यह डिजिटल रूप से रंगीन होने वाली पहली बà¥à¤²à¥ˆà¤•-à¤à¤‚ड-वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ हिंदी फिलà¥à¤® थी और किसी à¤à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में थिà¤à¤Ÿà¤° में फिर से रिलीज होने वाली पहली फिलà¥à¤® थी। कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤• को फिर से बनाने और पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€à¤µà¤¿à¤¤ करने का विचार दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° का था। अनारकली और सलीम की तरह कà¥à¤› पà¥à¤°à¥‡à¤® कहानियां, मधà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¾ और दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° की तरह, अधूरी होने पर à¤à¥€ अविसà¥à¤®à¤°à¤£à¥€à¤¯ बनी रहती हैं।
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