मॉडरà¥à¤¨ और कंटेमà¥à¤ªà¤°à¥‡à¤°à¥€ नॉन वेसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¨ आरà¥à¤Ÿ गैलरी Aicon ने रॉकफेलर पà¥à¤²à¤¸ इंडिया à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤¬à¤¿à¤¶à¤¨ की घोषणा की है। इसमें à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ कलà¥à¤šà¤°à¤² काउंसिल से अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ यानी रॉकफेलर गà¥à¤°à¤¾à¤‚ट पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कलाकारों की कलाकृतियों की पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ लगाई जाà¤à¤—ी।
बताया गया कि फà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼ मासà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ 2024 पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में à¤à¤•ॉन की तरफ से कलाकारों की कृतियों का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया जाà¤à¤—ा। इनमें नटवर à¤à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤°, मकबूल फिदा हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨, कृषà¥à¤£ शामराव कà¥à¤²à¤•रà¥à¤£à¥€, राम कà¥à¤®à¤¾à¤°, सैयद हैदर रजा और मोहन सामंत जैसे चरà¥à¤šà¤¿à¤¤ कलाकार शामिल हैं।
बता दें कि ये सà¤à¥€ कलाकार 1963 और 1970 के बीच अमेरिका आठथे और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रॉकफेलर गà¥à¤°à¤¾à¤‚ट से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया जा चà¥à¤•ा है। इनकी कलाकृतियों का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ फà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼ मासà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ का आयोजिन लंदन के रीजेंट पारà¥à¤• में सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड डी11 में 9 से 13 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर तक किया जाà¤à¤—ा। à¤à¤•ॉन मंगलवार से शनिवार तक सà¥à¤¬à¤¹ 10 बजे से शाम 6 बजे तक अपॉइंटमेंट के आधार पर खà¥à¤²à¤¾ रहेगा।
à¤à¤•ॉन आरà¥à¤Ÿ की वेबसाइट के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, इस पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में चरà¥à¤šà¤¿à¤¤ चितà¥à¤°à¤•ार मकबूल फिदा हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ की पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ अनटाइटलà¥à¤¡ थà¥à¤°à¥€ हॉरà¥à¤¸à¥‡à¤œ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ की जाà¤à¤—ी। 1980 के करीब चारकोल से लाइनेन कैनवास पर तैयार ये कृति हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ की मशहूर कृतियों में से à¤à¤• है।
नटवर à¤à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤° à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी कलाकार हैं जो अपने अमूरà¥à¤¤ अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¥€ और रंग कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिठचरà¥à¤šà¤¿à¤¤ हैं। 1934 में गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ में जनà¥à¤®à¥‡ नटवर 1960 के दशक की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में अमेरिका चले गठथे और जलà¥à¤¦à¥€ ही नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• सà¥à¤•ूल ऑफ कलरिसà¥à¤Ÿà¥à¤¸ में à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बन गà¤à¥¤
सैयद हैदर रज़ा à¤à¤• महान à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कलाकार हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने वैशà¥à¤µà¤¿à¤• मंच पर आधà¥à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कला को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ है। 1922 में उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के रामपà¥à¤° में जनà¥à¤®à¥‡ रज़ा अमूरà¥à¤¤ अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¦ और जà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥€à¤¯ कला के अगà¥à¤°à¤£à¥€ थे।
कृषà¥à¤£ शामराव कà¥à¤²à¤•रà¥à¤£à¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ लघॠचितà¥à¤°à¤•ार हैं, जो दकà¥à¤•न कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की पारंपरिक शैली में अपने उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठजाने जाते हैं। 1949 में जनà¥à¤®à¥‡ कà¥à¤²à¤•रà¥à¤£à¥€ ने इस कला के रूप को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने और बढ़ावा देने के लिठअपना जीवन समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया।
राम कà¥à¤®à¤¾à¤° à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कलाकार हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आधà¥à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कला के विकास में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ है। 1924 में जनà¥à¤®à¥‡ रामकà¥à¤®à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤—तिशील कलाकारों के आंदोलन में अहम हिसà¥à¤¸à¤¾ थे, जिसने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कला को आधà¥à¤¨à¤¿à¤• बनाने और पारंपरिक शैलियों से अलग होने की मांग की।
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