à¤à¤¾à¤°à¤¤ के महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° राजà¥à¤¯ में à¤à¤• छोटे से खेत पर काम करने वाली मीराबाई खिंदकर ने बताया कि सूखे के कारण फसलें खराब होने और उनके पति दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ कर लेने के बाद उनकी जमीन पर केवल करà¥à¤œ ही पैदा हà¥à¤†à¥¤
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में किसानों की आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ का à¤à¤• लंबा इतिहास रहा है, जहां कई किसान à¤à¤• फसल खराब होने के बाद à¤à¥€ संकट में फंस जाते हैं, लेकिन जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ के कारण होने वाले चरम मौसम ने नठदबाव को और बढ़ा दिया है।
पानी की कमी, बाढ़, बढ़ते तापमान और अनियमित वरà¥à¤·à¤¾ के कारण घटती पैदावार और साथ ही à¤à¤¾à¤°à¥€ करà¥à¤œ ने उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर à¤à¤¾à¤°à¥€ असर डाला है, जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ के 1.4 बिलियन लोगों में से 45 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ को रोजगार देता है।
मीराà¤à¤¾à¤ˆ के पति अमोल पर तीन à¤à¤•ड़ (à¤à¤• हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤°) सोयाबीन, बाजरा और कपास की फसल à¤à¥€à¤·à¤£ गरà¥à¤®à¥€ में सूख जाने के बाद करà¥à¤œ हो गया, जो उनके खेत की वारà¥à¤·à¤¿à¤• आय से सैकड़ों गà¥à¤¨à¤¾ अधिक था। पिछले साल उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जहर खा लिया था।
मीराबाई (30) ने रà¥à¤‚धे गले से कहा कि जब वह (उसके पति) असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में थे तो मैंने सà¤à¥€ देवताओं से उनको बचाने की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की। अमोल की मृतà¥à¤¯à¥ à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद हो गई। अमोल अपने पीछे मीराबाई और तीन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को छोड़ गया। उसके साथ उसकी अंतिम बातचीत करà¥à¤œ के बारे में थी।
अमोल की वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त तà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¦à¥€ महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° के करीब 1 करोड़ 80 लाख की आबादी वाले मराठवाड़ा कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दोहराई जाती है। मराठवाड़ा कà¤à¥€ उपजाऊ कृषि à¤à¥‚मि के लिठजाना जाता था।
नई दिलà¥à¤²à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सेंटर फॉर साइंस à¤à¤‚ड à¤à¤¨à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤¨à¤®à¥‡à¤‚ट रिसरà¥à¤š गà¥à¤°à¥à¤ª के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पिछले साल à¤à¤¾à¤°à¤¤ à¤à¤° में चरम मौसम की घटनाओं ने 32 लाख हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° (79 लाख à¤à¤•ड़) फसल à¤à¥‚मि को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया। यह कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° बेलà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤® से à¤à¥€ बड़ा है। इसमें से 60 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में था।
अमोल के à¤à¤¾à¤ˆ और साथी किसान बालाजी खिंदकर ने कहा कि गरà¥à¤®à¥€ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है और अगर हम जो à¤à¥€ ज़रूरी है, वह करते हैं, तो à¤à¥€ उपज परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं होती है। खेतों की सिंचाई के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी नहीं है। ठीक से बारिश à¤à¥€ नहीं होती।
जोखिम का सबब
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कृषि मंतà¥à¤°à¥€ शिवराज सिंह चौहान के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 2022 और 2024 के बीच मराठवाड़ा में 3,090 किसानों ने आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ की, जो औसतन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ लगà¤à¤— तीन है। सरकारी आंकड़े यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं करते कि किसानों ने आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की, लेकिन विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤• कई संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कारकों की ओर इशारा करते हैं।
टाटा इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट ऑफ सोशल साइंसेज में विकास अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° आर. रामकà¥à¤®à¤¾à¤° ने बताया कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में किसानों की आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ आय, निवेश और उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता के संकट का परिणाम हैं, जो कृषि में हैं।
कई à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ छोटे किसान बड़े पैमाने पर सदियों से पारंपरिक खेती करते हैं। और यह सही समय पर सही मौसम पर अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• निरà¥à¤à¤° है।
रामकà¥à¤®à¤¾à¤° ने कहा कि जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ और इसकी कमजोरियों और परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ ने खेती में जोखिम बढ़ा दिया है। इससे फसलों की विफलता, अनिशà¥à¤šà¤¿à¤¤à¤¤à¤¾à¤à¤‚ बढ़ रही हैं जो छोटे और सीमांत किसानों के लिठखेती के अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° को और कमजोर कर रही हैं।
रामकà¥à¤®à¤¾à¤° ने कहा कि सरकार चरम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिठबेहतर बीमा योजनाओं के साथ-साथ कृषि अनà¥à¤¸à¤‚धान में निवेश करके किसानों का समरà¥à¤¥à¤¨ कर सकती है। कृषि और मानसून के बीच जà¥à¤† नहीं होना चाहिà¤à¥¤
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