अमेरिका समेत कई देशों में बसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€, खासतौर पर महिलाà¤à¤‚, जब वैवाहिक जीवन में तनाव या हिंसा का सामना करती हैं, तो उनके लिठयह संघरà¥à¤· सिरà¥à¤« à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• नहीं होता — बलà¥à¤•ि यह कानूनी धमकियों, इमिगà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की अनिशà¥à¤šà¤¿à¤¤à¤¤à¤¾ और सांसà¥à¤•ृतिक अपराधबोध से à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है।
“अगर छोड़ा तो डिपोरà¥à¤Ÿ कर देंगे”, “बचà¥à¤šà¥‡ से कà¤à¥€ नहीं मिल पाओगी”, “समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ करो, वरना लोग कà¥à¤¯à¤¾ कहेंगे” — ये शबà¥à¤¦ हैं उन लोगों के, जो न केवल घरेलू हिंसा के शिकार हà¥à¤, बलà¥à¤•ि à¤à¥‚ठी जानकारी और डर के माहौल में जीने को मजबूर हो गà¤à¥¤
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