टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ में à¤à¤• à¤à¥€à¤·à¤£ सड़क दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में à¤à¤• महिला समेत चार à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ की मौत हो गई। ये सà¤à¥€ à¤à¤• कारपूलिंग à¤à¤ª के माधà¥à¤¯à¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ थे और अरकंसास के बेंटनविले जा रहे थे।
कॉलिन काउंटी शेरिफ ऑफिस के हवाले से डेकà¥à¤•न हेरालà¥à¤¡ की रिपोरà¥à¤Ÿ में बताया गया है कि ये हादसा शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को 3.30 बजे के करीब वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ से आगे हà¥à¤† था। मृतकों की पहचान आरà¥à¤¯à¤¨ रघà¥à¤¨à¤¾à¤¥ ओरमपति, फारूक शेख, लोकेश पलाचरला और दरà¥à¤¶à¤¿à¤¨à¥€ वासà¥à¤¦à¥‡à¤µà¤¨ के रूप में हà¥à¤ˆ है।
बताया जा रहा है कि पांच वाहनों की ये à¤à¥€à¤·à¤£ टकà¥à¤•र इतनी à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ थी कि जिस à¤à¤¸à¤¯à¥‚वी में ये सà¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सवार थे, उसमें आग लग गई और उनके शरीर जल गà¤à¥¤ तेज़ रफ़à¥à¤¤à¤¾à¤° टà¥à¤°à¤• ने à¤à¤¸à¤¯à¥‚वी को पीछे से टकà¥à¤•र मारी थी।
रिपोरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, ओरमपति और उनका दोसà¥à¤¤ शेख डलास में अपने चचेरे à¤à¤¾à¤ˆ से मिलने के बाद लौट रहे थे। लोकेश अपनी पतà¥à¤¨à¥€ से मिलने बेंटनविले जा रहे थे। टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से मासà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ पूरा करने के बाद अमेरिका में ही जॉब कर रही दरà¥à¤¶à¤¿à¤¨à¥€ बेंटनविले में अपने चाचा से मिलने जा रही थीं। इन सà¤à¥€ ने à¤à¤• कारपूलिंग à¤à¤ª की मदद ली थी।
हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ टाइमà¥à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, दरà¥à¤¶à¤¿à¤¨à¥€ के पिता ने तीन दिन पहले टà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¤° पर à¤à¤• पोसà¥à¤Ÿ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ विदेश मंतà¥à¤°à¥€ à¤à¤¸ जयशंकर को टैग करके अपनी बेटी का पता लगाने में मदद मांगी थी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने लिखा था कि मेरी बेटी दरà¥à¤¶à¤¿à¤¨à¥€ तीन साल से से यूà¤à¤¸à¤ में हैं और फà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•ो टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ में रहती हैं। à¤à¤• दिन पहले शाम करीब तीन बजे वह तीन अनà¥à¤¯ लोगों के साथ कार पूलिंग करके निकली थी। शाम चार बजे तक वह लगातार मैसेज कर रही थी, लेकिन उसके बाद उससे कोई संपरà¥à¤• नहीं हो रहा है।
ओरमपति के पिता सà¥à¤à¤¾à¤· चंदà¥à¤° रेडà¥à¤¡à¥€ हैदराबाद में मैकà¥à¤¸ à¤à¤—à¥à¤°à¥€ जेनेटिकà¥à¤¸ कंपनी के मालिक हैं। ओरमपति के दोसà¥à¤¤ शेख à¤à¥€ हैदराबाद के रहने वाले थे और इस समय बेंटनविले में रह रहे थे। आरà¥à¤¯à¤¨ ने कोयंबटूर के अमृता विशà¥à¤µ विदà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€à¤ म से इंजीनियरिंग की डिगà¥à¤°à¥€ ली है। तमिलनाडॠकी रहने वाली दरà¥à¤¶à¤¿à¤¨à¥€ टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ के फà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•ो में रह रही थीं।
à¤à¤• रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° के हवाले से मीडिया रिपोरà¥à¤Ÿ में कहा गया है कि आरà¥à¤¯à¤¨ के माता-पिता मई में टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में दीकà¥à¤·à¤¾à¤‚त समारोह में शामिल हà¥à¤ थे। समारोह के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आरà¥à¤¯à¤¨ से à¤à¤¾à¤°à¤¤ लौटने को कहा था लेकिन उसने दो साल और अमेरिका में काम करने की बात कही थी।
फारूक शेख के पिता मसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ वली ने बताया कि वह तीन साल पहले à¤à¤®à¤à¤¸ की डिगà¥à¤°à¥€ पूरी करने अमेरिका गठथे। हाल ही में उनकी डिगà¥à¤°à¥€ पूरी हो गई थी। वली à¤à¤• रिटायरà¥à¤¡ करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ हैं। उनका परिवार बीà¤à¤šà¤ˆà¤à¤² हैदराबाद में रहता है।
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