हारà¥à¤µà¤°à¥à¤¡ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के 374वें दीकà¥à¤·à¤¾à¤‚त समारोह में मà¥à¤–à¥à¤¯ वकà¥à¤¤à¤¾ रहे सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤¨à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° डॉ अबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤® वरà¥à¤—ीस अमेरिकी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवा में विदेशी मूल के पेशेवरों की आवशà¥à¤¯à¤• à¤à¥‚मिका पर जोर दिया। समारोह में अपने à¤à¤¾à¤·à¤£ के दौरान पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° वरà¥à¤—ीज ने बताया कि à¤à¤• वकà¥à¤¤ à¤à¤¸à¤¾ था जब अमेरिकी मेडिकल सà¥à¤•ूल देश की जरूरतों को पूरा करने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ संखà¥à¤¯à¤¾ में सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• नहीं थे। लेकिन अब हालात बदल चà¥à¤•े हैं। देश में à¤à¤• चौथाई से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिकितà¥à¤¸à¤• विदेशी मेडिकल सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• हैं, उनमें से कई बाद में à¤à¤¸à¥€ जगहों पर बस जाते हैं जो दूसरों को शायद उतनी वांछनीय न लगे।
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