(मालविका चौधरी)
अमेरिका में à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ खासकर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के लोगों के खिलाफ नफरती à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤‚ लगातार बढ़ रही हैं। à¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡ से खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ हà¥à¤† है कि लगà¤à¤— à¤à¤• तिहाई अमेरिकी मानते हैं कि देश में रहने वाले à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ मूल के अमेरिकियों के खिलाफ नफरत में बढ़ोतरी हà¥à¤ˆ है। वहीं à¤à¤¸à¤¾ मानने वाले à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों की संखà¥à¤¯à¤¾ 61 फीसदी है। हालांकि इसके बावजूद अमेरिकी इसे लेकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फिकà¥à¤°à¤®à¤‚द नहीं हैं।
यह दावा द à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ अमेरिकन फाउंडेशन (TAAF) की चौथी सालाना STAATUS Index (सोशल टà¥à¤°à¥ˆà¤•िंग ऑफ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ अमेरिकंस इन द यूà¤à¤¸) में किया गया है। यह अमेरिका में राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर किया जाने वाला à¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡ है, जिसमें à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकी, नेटिव हवाइयन और पैसिफिक आइलैंडरà¥à¤¸ (AANHPI) के बारे में अमेरिकियों की राय लेकर निषà¥à¤•रà¥à¤· निकाले जाते हैं।
इस अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से पिछले साल à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ को लेकर परेशान करने वाले आंकड़े सामने आठहैं। 32 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लोगों ने माना कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपमानजनक अपशबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का सामना करना पड़ा था। वहीं 29 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ ने बताया कि उनके साथ मौखिक उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨ या दà¥à¤°à¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° किया गया था।
इतना ही नहीं, 41 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लोगों ने आशंका जताई कि अगले पांच वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के अंदर उनके ऊपर उनकी जाति, समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ या धरà¥à¤® के कारण शारीरिक हमले किठजा सकते हैं। 59 फीसदी लोगों ने डर जताया कि आने वाले समय में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी जिंदगी में à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ का सामना करना पड़ सकता है।
असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ और हाशिठपर पहà¥à¤‚चने की इस à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पीछे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारणों में समाज में à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों की कम संखà¥à¤¯à¤¾ और उनका परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ न होना है। महज 38 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों ने ही अमेरिका में अपनेपन का अहसास होने की बात कबूली। केवल 18 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लोग ही मानते हैं कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनकी अलग नसà¥à¤²à¥€à¤¯ पहचान के बावजूद अमेरिका में पूरी तरह सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया गया है।
TAAF के सीईओ नॉरà¥à¤®à¤¨ चेन ने कहा कि हमारी 2024 की रिपोरà¥à¤Ÿ परेशान करने वाली पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ की तरफ इशारा करती है। अमेरिकियों के à¤à¤• बड़े हिसà¥à¤¸à¥‡ को à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों पर हालिया हमलों से कोई लेना देना नहीं है। वहीं समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के बहà¥à¤¤ से सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ à¤à¤• वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• चिंता बनी हà¥à¤ˆ है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ नफरत और अविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ लगातार बढ़ता जा रहा है। समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ और सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ का अà¤à¤¾à¤µ à¤à¤¸à¤¾ माहौल बना रहा है जिसमें कई लोग खà¥à¤¦ को बहिषà¥à¤•ृत, उपेकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ महसूस कर रहे हैं।
गौरतलब है कि STAATUS इंडेकà¥à¤¸ सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अमेरिकियों के सामने आने वाली चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और उनका समाधान करने की सरकारी नीति तैयार करने के लिठठोस माधà¥à¤¯à¤® का काम करती है। टीà¤à¤à¤à¤« का लकà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ समाज का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने के लिठAANHPI की आवाज को बà¥à¤²à¤‚द करना है जहां समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के सà¤à¥€ सदसà¥à¤¯ बिना à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ और बिना डर के अपनेपन और समृदà¥à¤§à¤¿ के साथ जीवन बिता सकें।
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