à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अपनी मांगों को लेकर पिछले à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ से सड़कों पर उतरकर पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ कर रहे किसानों को अमेरिका से à¤à¥€ समरà¥à¤¥à¤¨ मिला है। अमेरिकन गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धक कमिटी (AGPC) और सिख कोऑरà¥à¤¡à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ कमिटी ईसà¥à¤Ÿ कोसà¥à¤Ÿ (SCCEC) जैसे संगठन पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¤•ारी किसानों के सपोरà¥à¤Ÿ में आगे आठहैं।
अमेरिका के नà¥à¤¯à¥‚जरà¥à¤¸à¥€ में गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दशमेश दरबार में हाल ही में सिख संगठनों में à¤à¤• बैठक का आयोजन किया था। इसमें दिलà¥à¤²à¥€ चलो का नारा देते हà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में आंदोलन कर रहे किसानों का समरà¥à¤¥à¤¨ की घोषणा की गई। संगठनों ने पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ पास करके à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार से मांग की कि वह किसानों की à¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ यानी नà¥à¤¯à¥‚नतम समरà¥à¤¥à¤¨ मूलà¥à¤¯ जैसी मांगों को पूरा करने के लिठकानून बनाà¤à¥¤ इसके तहत à¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ में सà¤à¥€ लागत को कवर करते हà¥à¤ 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ अतिरिकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤® की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की जाà¤à¥¤ à¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ कानून 23 फसलों पर लागू किया जाà¤à¥¤
सिख संगठनों की बैठक में à¤à¤• अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ पारित करके केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ मंतà¥à¤°à¥€ अजय मिशà¥à¤° टेनी को बरà¥à¤–ासà¥à¤¤ करने की मांग की गई। संगठन के नेता अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 2021 में उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के लखीमपà¥à¤° में टेनी के बेटे आशीष मिशà¥à¤°à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कार से किसानों को कà¥à¤šà¤²à¤¨à¥‡ के मामले में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ न होने से नाराज हैं। ये किसान पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करके लौट रहे थे, उसी समय ये वारदात हà¥à¤ˆ थी। अमेरिकी सिख संगठनों ने लखीमपà¥à¤° मामले में किसानों पर दरà¥à¤œ सà¤à¥€ आपराधिक मामले वापस लेने की à¤à¥€ सरकार से मांग की।
जानकारी के लिठबता दें कि मूल रूप से पंजाब के किसान इन दिनों अपनी करीब 12 मांगों को लेकर दिलà¥à¤²à¥€-हरियाणा सीमा पर पिछले कई दिनों से डेरा डाले हà¥à¤ हैं। इन किसानों की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– मांगों में फसलों पर à¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ की गारंटी के लिठकानून बनाने और सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤¨à¤¾à¤¥à¤¨ आयोग की सिफारिशों को लागू करना आदि शामिल हैं। इस बार के आंदोलन में 50 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संगठन शामिल हैं। हालांकि जिन किसान संगठनों ने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में दिलà¥à¤²à¥€ सीमा पर जोरदार पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया था, वे इस बार आंदोलन से दूरी बनाठहà¥à¤ हैं।
आंदोलनकारी किसानों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के कई मंतà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ चार दौर की वारà¥à¤¤à¤¾ हो चà¥à¤•ी है। सरकार की तरफ से पांच साल तक पांच फसलों को à¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ पर खरीद के कॉनà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ दिया गया है। हालांकि किसान इस पर राजी नहीं है और वह 23 फसलों के लिठà¤à¤®à¤à¤¸à¤ªà¥€ कानून पर अड़े हà¥à¤ हैं। पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¤•ारी किसान इसे पिछले दरवाजे से कॉनà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग लागू करने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ की तरह देख रहे हैं।
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