à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—राज शहर में 12 साल में लगने वाला à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• महाकà¥à¤‚ठचल रहा है। तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¥€, जो महाकà¥à¤‚ठजाने का विचार कर रहे हैं, अकà¥à¤¸à¤° यातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤à¤µ जानने के लिठआतà¥à¤° रहते हैं। पेश हैं महाकà¥à¤‚ठका पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· अनà¥à¤à¤µ...
राजेशà¥à¤µà¤° सà¥à¤¬à¤¹ 9:30 बजे निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ समय से à¤à¤• घंटे पहले ही पहà¥à¤‚च गà¤à¥¤ वह "à¤à¤¨à¥‡à¤•à¥à¤¡à¥‹à¤Ÿà¥à¤¸ जरà¥à¤¨à¥€à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿ" नामक यातà¥à¤°à¤¾ समूह के लिठगाइड हैं, जो पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—राज, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के आलीशान शिवादà¥à¤¯ टेंट सिटी कैंप में तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सहायता के लिठनियà¥à¤•à¥à¤¤ किठगठहैं। ताज़ा परोसे गठगोà¤à¥€ पराठों का आनंद लेकर, मेहमान ई-रिकà¥à¤¶à¤¾ में सवार हà¥à¤, जिसे राजेशà¥à¤µà¤° ने उनके लिठकिराठपर लिया था। रिकà¥à¤¶à¥‡ पर वह आवशà¥à¤¯à¤• सà¥à¤Ÿà¥€à¤•र लगा था, जिससे उसे उन सड़कों पर जाने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ थी, जहां नदी के पार अखाड़े सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं।
जूना अखाड़ा की यातà¥à¤°à¤¾
14 अखाड़ों में सबसे बड़े, जूना अखाड़ा (सेकà¥à¤Ÿà¤° 19) की ओर समूह ने यातà¥à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ की। महाकà¥à¤‚ठमेला, जो 42 किलोमीटर में फैला है, 25 सेकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ है।
साधà¥à¤“ं के आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ और à¤à¥‡à¤‚ट का आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨
अखाड़े के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ दà¥à¤µà¤¾à¤° पर, आगंतà¥à¤•ों ने रासà¥à¤¤à¥‡ के दोनों ओर à¤à¤¸à¥à¤® से ढके साधà¥à¤“ं को रà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤•à¥à¤· की माला और नà¥à¤¯à¥‚नतम वसà¥à¤¤à¥à¤° धारण किठदेखा। वे अपनी छोटी-छोटी à¤à¥‹à¤ªà¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में चिलम पीते हà¥à¤ और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करते हà¥à¤ बैठे थे। वे हवन कà¥à¤‚ड (धारà¥à¤®à¤¿à¤• अगà¥à¤¨à¤¿-कà¥à¤‚ड) के सामने बैठे हà¥à¤ थे। तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने अपने जूते उतारकर, à¤à¤•-à¤à¤• à¤à¥‹à¤ªà¤¡à¤¼à¥€ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ किया और साधà¥à¤“ं से à¤à¤¸à¥à¤® का तिलक लगाने की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की। बदले में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥‡à¤‚ट दी।
साधà¥à¤“ं को à¤à¥‡à¤‚ट
कà¥à¤› साधॠबड़े कंबल में लिपटे हà¥à¤ थे, जबकि अधिकांश बिना किसी संकोच के नगà¥à¤¨ थे। साधॠखà¥à¤¦ à¤à¥€ गाने वाले मंडली और विकà¥à¤°à¥‡à¤¤à¤¾à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥‡à¤‚ट देने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किठगà¤à¥¤ मंडली के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– ने गाया, “वो कैलाश परà¥à¤µà¤¤ पर रहते हैं। वो à¤à¤—वान शिव की पूजा करते हैं।” अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने सà¥à¤° मिलाते हà¥à¤ गाया, “उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ adversity (कठिनाई) का कोई à¤à¤¯ नहीं है।”
अखाड़ों का इतिहास
नागा साधà¥à¤“ं ने तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को डांटते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेलपतà¥à¤° खाने और दिन में à¤à¤• ही बार à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने की सलाह दी। मोरपंख की à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¥‚ से तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की ‘आà¤à¤¾’ को शà¥à¤¦à¥à¤§ किया गया। साधॠजीप और मोटरसाइकिल से सामान ढोते हà¥à¤ à¤à¥€ दिखे।
निरंजनी अखाड़ा के महा मंडलेशà¥à¤µà¤° परमानंद पà¥à¤°à¥€ अरà¥à¤œà¥€à¤µà¤¾à¤²à¥‡ हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ मंदिर, उजà¥à¤œà¥ˆà¤¨ ने समà¤à¤¾à¤¯à¤¾, “कà¥à¤¶à¥à¤¤à¥€ की परंपरा से अखाड़ों का जनà¥à¤® हà¥à¤†à¥¤ “पहले नागा साधॠआà¤, फिर पंच, कोतवाल, थानापति इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤ इसी से संरचना बनी। 1700 के दशक में, जब अहमद शाह अबà¥à¤¦à¤¾à¤²à¥€ ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ किया, तो नागा साधà¥à¤“ं ने शासà¥à¤¤à¥à¤° से शसà¥à¤¤à¥à¤° की ओर बढ़कर धरà¥à¤® की रकà¥à¤·à¤¾ की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अबà¥à¤¦à¤¾à¤²à¥€ की विशाल सेना का सामना किया और मथà¥à¤°à¤¾ की रकà¥à¤·à¤¾ की।”
महिला à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ की किनà¥à¤¨à¤° अखाड़े में à¤à¥€à¤¡à¤¼
सेकà¥à¤Ÿà¤° 6 में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ किनà¥à¤¨à¤° अखाड़ा, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का पहला टà¥à¤°à¤¾à¤‚सजेंडर मठहै और अखाड़ों में नवीनतम है। यह जूना अखाड़ा के अंतरà¥à¤—त सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया गया है। इसका नेतृतà¥à¤µ बॉलीवà¥à¤¡ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤° लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ नारायण तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी, आचारà¥à¤¯ महामंडलेशà¥à¤µà¤°, करती हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, “हमारे पास इसलिठन आà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हम किनà¥à¤¨à¤° हैं। हमारे पास इसलिठआà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हम साधॠहैं।”
गंगा आरती
गंगा नदी के दूसरे किनारे पर शंकराचारà¥à¤¯, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ और शकà¥à¤¤à¤¿à¤ªà¥€à¤ के मंदिर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं। यहां शाम 7 बजे गंगा आरती होती है। पहली बार, यà¥à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ आरती में à¤à¤¾à¤— लेते देखा गया।
शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ और यातà¥à¤°à¤¾ का समापन
शिवादà¥à¤¯ कैंप के पास तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने पवितà¥à¤° गंगा में डà¥à¤¬à¤•ी लगाई और फिर गरà¥à¤® सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ का आनंद लिया। यमà¥à¤¨à¤¾, गंगा और सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ का संगम तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठआतà¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¤µ का केंदà¥à¤° रहा। महीने के अंत में, साधॠकाशी की ओर पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ करते हैं। तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने अपने पाप धोकर और अनमोल यादें संजोकर लौटने की तैयारी की।
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