मधà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤°à¤¤ का दूसरा सबसे बड़ा राजà¥à¤¯ बिहार कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से बिजली चोरी की समसà¥à¤¯à¤¾ से जूठरहा था। यह कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° कृषि-पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ है और यहां बड़ी आबादी रहती है। इसलिठबिना रेवेनà¥à¤¯à¥‚ पर असर पड़े सà¤à¥€ शहरी और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ घरों और उदà¥à¤¯à¥‹à¤—ों को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बिजली सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना जरूरी था। कà¥à¤› महीने पहले, बिहार राजà¥à¤¯ विदà¥à¤¯à¥à¤¤ होलà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) ने राजà¥à¤¯ में बिजली चोरी का पता लगाने और उसे ठीक करने के लिठAI का उपयोग करने का à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ लिया। हालांकि, पहला कदम राजà¥à¤¯ में सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• तरीके से सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿ मीटरों का तेजी से पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° था। अगला कदम मीटरों से कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ योगà¥à¤¯ डेटा और इनसाइट पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना था और चोरी और दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— को कम करने की योजना बनाना था।
Bidgely के सीईओ अà¤à¤¯ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ कहते हैं कि बिजली चोरी लगà¤à¤— 20 से 30 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ राजसà¥à¤µ हानि का कारण बनती है। फिर à¤à¥€ लीकेज को रोकने और चोरी को रोकने की मौजूदा रणनीतियां औसतन केवल 10 से 20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ परिणाम देती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में BSPHCL अब केवल सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ खà¥à¤«à¤¿à¤¯à¤¾ जानकारी और ऑन-साइट निरीकà¥à¤·à¤£ पर निरà¥à¤à¤° रहने के बजाय ऊरà¥à¤œà¤¾ चोरी का पता लगाने के लिठAI तकनीकों का उपयोग तेजी से और अधिक सटीकता से कर सकता है। इससे राजसà¥à¤µ बचत के अलावा, बचाठगठशà¥à¤°à¤® घंटे से उपà¤à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं के लिठबेहतर सेवाओं को à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
Bidgely की AI तकनीक सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿ मीटर डेटा का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ करके उपà¤à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¾ के बिजली के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में असामानà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° और पैटरà¥à¤¨ का पता लगाती है। इसने पहले ही चोरी के 136 से अधिक संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ मामलों को चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ कर लिया है। सà¤à¥€ मामलों का निरीकà¥à¤·à¤£ किया गया और लगà¤à¤— 63 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ टैरिफ दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— मामलों में मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन किया गया। मीटर बाईपासिंग और रात में चोरी में 51 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लीड सही पाठगà¤à¥¤ चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ मामलों के 41 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ में सफल बà¥à¤•िंग की गई। कà¥à¤² मिलाकर, उपयोग के à¤à¤• महीने के à¤à¥€à¤¤à¤° 57 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बà¥à¤• किठगठथे। बिजली चोरी से संबंधित और वाणिजà¥à¤¯à¤¿à¤• नà¥à¤•सान को कम करने के लिठAI का उपयोग करने वाली BSPHCL à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पहला उपकà¥à¤°à¤® है।
Bidgely कंपनी का मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ सिलिकॉन वैली में है और इसका सबसे बड़ा इंजीनियरिंग केंदà¥à¤° बेंगलà¥à¤°à¥, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में है। Bidgely के पास 16 से अधिक ऊरà¥à¤œà¤¾ पेटेंट, 75M+ डॉलर की फंडिंग और 30+ डेटा वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों है। यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में आवासीय और वाणिजà¥à¤¯à¤¿à¤• गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤•ों की सेवा करने वाली उपयोगिताओं के लिठAI के लिठसाथ काम करती है।
बिहार पायलट पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ का बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µ है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह सही समय पर शà¥à¤°à¥‚ किया गया था। पहला, गरà¥à¤®à¥€ के महीने बिजली की कमी के लिठबदनाम है। इस कारण बिजली चोरी अधिक होती है। साथ ही, इसका काम देश के चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ से पहले के हफà¥à¤¤à¥‹ में किया गया था, जो सतà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥‚ॠसरकार के लिठबिजली अनà¥à¤•ूलन और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ आपूरà¥à¤¤à¤¿ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करने का à¤à¤• बेहतरीन अवसर था।
BSPHCL में CMD, संजीव हंस का कहना है कि सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿ मीटर में निवेश ऊरà¥à¤œà¤¾ खपत की दिशा में पहला कदम था। इसके बाद हम AI/ML डेटा à¤à¤¨à¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ का लाठउठा रहे हैं जो हमें विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ उपयोग मामलों को चलाने के लिठअगले सà¥à¤¤à¤° पर ले जाà¤à¤—ा। सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿ मीटर डेटा का लाठउठाà¤à¤—ा, जैसे राजसà¥à¤µ रिसाव, मांग का आकलन, ऊरà¥à¤œà¤¾ की जरूरत, गà¥à¤°à¤¿à¤¡ संपतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठवितरण नेटवरà¥à¤• योजना शामिल है। अतिरिकà¥à¤¤ निगरानी सबसे अहम पहलू है। यह वह जगह है जहां हम Bidgely जैसी कंपनी के साथ साà¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ कर रहे हैं ताकि राजसà¥à¤µ नà¥à¤•सान का हल निकाल सकें।
जहां बिजली चोरी का पता लगाने के पारंपरिक तरीकों के लिठबड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में मैनà¥à¤…ल हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª की à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, AI उस à¤à¥‚मिका को निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है जिससे लीकेज का पता कम समय में लगाया जा सके। à¤à¤¸à¤¾ लग रहा है कि बिहार à¤à¤• वैशà¥à¤µà¤¿à¤• संकट से निपटने के लिठसही तकनीक का उपयोग करने वाला अगà¥à¤°à¤£à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ राजà¥à¤¯ बनने के लिठतैयार है। अगर देश का बाकी हिसà¥à¤¸à¤¾ à¤à¥€ इसी तरह की तकनीकों का पालन करना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है, तो बिजली की कमी शायद अतीत की बात हो जाà¤à¤—ी।
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