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'मरणासन्न' इमिग्रेशन बिल पर डेमोक्रेट्स सख्त तो रिपब्लिकंस बने रोड़ा

सीनेट में पेश इमिग्रेशन बिल में 'कैच एंड रिलीज' सिस्टम को खत्म करने का प्रावधान है, जो अमेरिका में शरण पाने की आस लिए सीमा पर पहुंचने वाले हजारों पंजाबी प्रवासियों की उम्मीदों को भी तोड़ देगा।

नए इमिग्रेशन बिल के पास होने से शरणार्थी बनकर अमेरिका में घुसने वालों की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी। / Facebook @ U.S. Customs and Border Protection

अमेरिका में अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने के लिए इस चुनावी साल में एक कड़ा विधेयक सीनेट में पेश किया गया है। डेमोक्रेट्स सांसदों द्वारा समर्थित इस बिल का जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है, हालांकि रिपब्लिकन आश्चर्यजनक रूप से इसकी राह में रोड़ा बनकर खड़े हो गए हैं। उनका मानना है कि यह एक 'मरणासन्न' बिल से ज्यादा कुछ नहीं है। इस तरह इसके सीनेट में वोटिंग तक पहुंचने के आसार कम ही लग रहे हैं।

अमेरिका में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इमिग्रेशन का मुद्दा गरमाता जा रहा है। वैसे तो इस पर हमेशा से ही विवाद होता रहा है, लेकिन अब चुनावी राजनीति इस पर केंद्रित होती नजर आ रही है। रिपब्लिकन आरोप लगा रहे हैं कि बाइडेन सरकार हजारों प्रवासियों को असुरक्षित सीमाओं से बेरोकटोक आवाजाही का मौका दे रही है। हाउस में रिपब्लिकंस ने तो अभूतपूर्व कदम उठाते हुए होमलैंड सिक्योरिटी के सेक्रेटरी एलेजान्द्रो मायोर्कास को महाभियोग को जरिए हटाने तक की कवायद कर दी। सेक्रेटरी पर आरोप लगाया गया कि वह मेक्सिको बॉर्डर को सील करने में नाकाम रहे हैं, जिससे अधिकतर प्रवासी शरण लेने के लिए अमेरिका में दाखिल होते हैं। हालांकि महाभियोग की ये कार्रवाई 6 फरवरी को सदन में वोटिंग के दौरान सिरे नहीं चढ़ पाई। 

प्रस्तावित इमिग्रेशन बिल में यूक्रेन और इजराइल को फंडिंग का भी प्रस्ताव है। इस बिल में कैच एंड रिलीज यानी पकड़ो और छोड़ो के प्रावधान पर सबसे ज्यादा चिंताएं उठ रही हैं। इस प्रावधान के तहत बॉर्डर के अधिकारियों को यह तय करने का अधिकार होगा कि वे तय कर सकें कि किसी प्रवासी को अमेरिका में शरण पाने योग्य है या नहीं। अगर उन्हें लगता है कि कोई प्रवासी शरण के लिए योग्य है तो वह उसे कम्युनिटी के साथ रहने के लिए शर्तों के साथ रिहा कर सकते हैं। इस तरह वह तब तक अमेरिका में रहने के योग्य हो जाता है, जब तक उसकी शरण संबंधी अर्जी पर फैसला नहीं हो जाता। ये एक तरह से इमिग्रेशन और कस्टम एनफोर्समेंट डिटेंशन में रखने जैसा है। 

पूर्व डेमोक्रेट और अब निर्दलीय बन चुकी कर्स्टन सिनेमा ने हाल ही में फेस द नेशन में एक इंटरव्यू में कहा था कि जो लोग अपने अमेरिकन ड्रीम को पूरा करने या यहां पर काम करने के लिए अमेरिका के दरवाजे पर आते हैं, उन्हें हम इकोनोमिक माइग्रेंट्स कहते हैं और शर्तों के साथ देश में प्रवेश की छूट दे देते हैं। लेकिन नए बिल में प्रावधान है कि ऐसे लोग देश में एंट्री न कर पाएं। ऐसे लोग शरणार्थी सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं, ऐसे में उन्हें उनके मूल देश लौटाने का नियम है। 

इस 'कैच एंड रिलीज' नियम के खत्म होने से उन हजारों भारतीयों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी होने वाली है, जो अमेरिका में प्रवेश पाने की उम्मीद लिए अक्सर छह महीने या उससे भी ज्यादा समय तक, पैदल रास्ते से कनाडा या मेक्सिको से सटी अमेरिकी सीमा तक पहुंचते हैं। कस्टम एंड बॉर्डर पैट्रोल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल इस तरह करब 97 हजार भारतीय शरण पाने की उम्मीद लिए सीमा तक पहुंचे थे। इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साल 2020 में इनकी संख्या महज 20 हजार थी। भारतीय प्रवासी शरण लेकर अपने अमेरिकन ड्रीम का सफर पूरा करने के लिए स्मगलर्स को 60 लाख से लेकर एक करोड़ रूपये तक देते हैं। 

शरण पाने के इच्छुक भारतीयों में अधिकतर पंजाब के रहने वाले होते हैं। लेकिन अब इस प्रवृत्ति में बदलाव आ रहा है। जनवरी 2023 में गुजरात का एक परिवार कनाडा से अवैध रूप से अमेरिकी बॉर्डर पार करने की कोशिश में बर्फ में जमकर खत्म हो गया था। 

इस नए बिल के पास होने से शरणार्थी बनकर अमेरिका में घुसने वालों की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी। जो थोड़े बहुत लोग शरण पाने के पात्र माने जाएंगे, उन्हें आईसीई के डिटेंशन में तब तक रहना होगा, जब तक कि उनके केस पर सुनवाई नहीं हो जाती। 

हालांकि ये बिल से कुछ ऐसे भारतीयों को फायदा होगा, जो रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के इंतजार में हैं। साल 2025 से 2029 तक ऐसे 18 हजार भारतीयों को ग्रीन कार्ड दिए जाएंगे। इस बिल में, इन वर्षों के दौरान प्रिफरेंस कैटिगरी में फैमिली बेस्ड ग्रीन कार्ड की लिमिट 32 हजार बढ़ाने का भी प्रावधान है। हालांकि गौर करने की बात ये है कि 15 लाख से ज्यादा भारतीय पिछले कुछ दशकों से ग्रीन कार्ड की वेटिंग लिस्ट में अटके हुए हैं। इसकी वजह प्रति देश के लिए हर साल 7 प्रतिशत ग्रीन कार्ड कोटा आवंटित करने का नियम है। 

इमिग्रेशन मामलों के अटॉर्नी साइरस मेहता ने ट्वीट में कहा था कि इस बिल में पसंद और नापसंद करने जैसा कुछ नहीं है। संगठन एशियन अमेरिकंस एडवांसिंग जस्टिस तो अपने बयान में आरोप लगा चुका है कि सीनेट में पेश ये बिल अपमानजनक, अनैतिक और अप्रभावी है जो विदेशी फंडिंग के बदले शरणार्णी सिस्टम को तबाह कर देगा। 

संगठन का कहना है कि राष्ट्रपति बाइडेन संकेत दे चुके हैं कि कांग्रेस से पास होने पर वह इस बिल पर दस्तखत कर देंगे। यह एक तरह से इंसानी गरिमा को कायम रखने की अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाने जैसा होगा। 
 

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