यूरोपीय संघ (EU) ने 16 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को उन 7 देशों की à¤à¤• लिसà¥à¤Ÿ जारी की है जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वो 'सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤' मानता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकिया गया है ताकि इन देशों के लोगों के लिठयूरोप में शरण (Asylum) मांगना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाठऔर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वापस उनके देश à¤à¥‡à¤œà¤¾ जा सके। इस लिसà¥à¤Ÿ में कोसोवो, बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶, कोलंबिया, मिसà¥à¤°, à¤à¤¾à¤°à¤¤, मोरकà¥à¤•ो और टà¥à¤¯à¥‚नीशिया शामिल हैं। हालांकि ये लिसà¥à¤Ÿ अà¤à¥€ लागू नहीं होगी, इसके लिठयूरोपीय संघ की संसद और सदसà¥à¤¯ देशों की मंजूरी की जरूरत है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे यूरोपीय देश इन देशों के नागरिकों के शरण के आवेदनों को जलà¥à¤¦à¥€ निपटा सकेंगे। यूरोपीय संघ मान लेगा कि इन देशों के लोगों के शरण के दावे सही नहीं हैं। यूरोपीय संघ के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ आयà¥à¤•à¥à¤¤ मैगà¥à¤¨à¤¸ बà¥à¤°à¥‚नर ने कहा, 'कई देशों में शरण के आवेदनों का बहà¥à¤¤ बड़ा बैकलॉग है। इसलिà¤, जलà¥à¤¦à¥€ फैसले लेने में मदद करने के लिठयह जरूरी है।'
कई देशों में दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤ªà¤‚थी पारà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का उदय हà¥à¤† है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लोगों का पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ को लेकर नजरिया बदल गया है। इसलिठबà¥à¤°à¥à¤¸à¥‡à¤²à¥à¤¸ पर गैरकानूनी तरीके से आने वालों पर नकेल कसने और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वापस à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ का दबाव है।
यूरोपीय संघ ने कहा कि जो देश यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिठआवेदन कर रहे हैं, वो à¤à¥€ मूल रूप से इन 'सेफ' देशों की सूची में आ सकते हैं। लेकिन यदि किसी देश में यà¥à¤¦à¥à¤§ या संघरà¥à¤· हो, तो उसे इस सूची से बाहर रखा जाà¤à¤—ा। मिसाल के तौर पर यूकà¥à¤°à¥‡à¤¨ को शामिल नहीं किया जाà¤à¤—ा।
यूरोपीय संघ ने 2015 में à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• सूची जारी की थी, लेकिन तà¥à¤°à¥à¤•ी को शामिल करने या न करने को लेकर काफी विवाद हà¥à¤† था, इसलिठउस योजना को छोड़ दिया गया था। 16 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को जारी सूची में आगे और देशों को जोड़ा या हटाया जा सकता है। यह सूची उन देशों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर बनाई गई है जहां से शरण मांगने वालों की संखà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है।
कई यूरोपीय देशों की अपनी-अपनी सूची है जिन देशों को वो 'सेफ' मानते हैं। मिसाल के तौर पर, फà¥à¤°à¤¾à¤‚स की सूची में मंगोलिया, सरà¥à¤¬à¤¿à¤¯à¤¾ और केप वरà¥à¤¡à¥‡ शामिल हैं। यूरोपीय संघ का मकसद नियमों को à¤à¤• जैसा बनाना है ताकि सà¤à¥€ देशों के पास à¤à¤• ही आधार हो। देश अपनी तरफ से इस सूची में देश जोड़ सकते हैं, लेकिन हटा नहीं सकते। यूरोपीय संघ ने कहा कि हर शरणारà¥à¤¥à¥€ के मामले की अलग से जांच की जाà¤à¤—ी। मौजूदा सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ नियमों का पालन किया जाà¤à¤—ा और शरणारà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बिना जांच के सीधे खारिज नहीं किया जाà¤à¤—ा।
कà¥à¤› संगठनों का कहना है कि टà¥à¤¯à¥‚नीशिया और मिसà¥à¤° जैसे देशों को इस सूची में शामिल करना गलत है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वहां मानवाधिकारों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ ठीक नहीं है। इंटरनेशनल रेसà¥à¤•à¥à¤¯à¥‚ कमिटी की मेरोन अमà¥à¤¹à¤¾ निकमैन ने इस पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ को शरणारà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अधिकारों को कम करने और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डराने की कोशिश बताया। यूरोपीय आयोग ने कहा कि टà¥à¤¯à¥‚नीशिया में राजनीतिक लोगों, वकीलों, जजों और पतà¥à¤°à¤•ारों को गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° किया गया है। मिसà¥à¤° में मानवाधिकार कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं और विपकà¥à¤·à¥€ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं को मनमाने ढंग से गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° करके पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤¡à¤¼à¤¿à¤¤ किया जाता है। लेकिन आयोग का कहना है कि आम लोगों को पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾ या गंà¤à¥€à¤° नà¥à¤•सान का कोई खतरा नहीं है।
टà¥à¤¯à¥‚नीशिया के à¤à¤• गैर-सरकारी संगठन टà¥à¤¯à¥‚नीशियन फोरम फॉर इकोनॉमिक à¤à¤‚ड सोशल राइटà¥à¤¸ ने à¤à¤à¤«à¤ªà¥€ को बताया, 'यह à¤à¤• मौलिक मानवाधिकार, शरण का अधिकार, का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ उलà¥à¤²à¤‚घन है।' उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यूरोपीय संघ की योजना की निंदा की। इटली, डेनमारà¥à¤• और नीदरलैंड जैसे देशों के नेताओं ने अकà¥à¤Ÿà¥‚बर में वापसी की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को तेज करने और अवैध पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ को रोकने के लिठनठकानून बनाने की मांग की थी।
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