सà¥à¤®à¤¿à¤¤ कौशिक : हाल के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ में यà¥à¤µà¤¾, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤¶à¤¾à¤²à¥€ और जीवंत फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं की à¤à¤• लहर उà¤à¤°à¥€ है। ये अपनी रà¥à¤šà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और नठविचारों के साथ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके फिलà¥à¤® इंडसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤—ति कर रही है। ये उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ नठनजरिये और अà¤à¤¿à¤¨à¤µ कहानी बयां करने की तकनीक को सामने ला रहे हैं, जो à¤à¤• गतिशील और विकसित सिनेमाई परिदृशà¥à¤¯ बना रहे हैं।
à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¤• फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ हैं अनहद मिशà¥à¤°à¤¾à¥¤ उनकी लघॠफिलà¥à¤® 'खिड़की' का पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° 1 जून को मैनहटà¥à¤Ÿà¤¨ के ईसà¥à¤Ÿ विलेज में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• इंडियन फिलà¥à¤® फेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤² (NYIFF) में हà¥à¤† था। यह फेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤² लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ और आकरà¥à¤·à¤£ बढ़ा रहा है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° से दरà¥à¤¶à¤•ों और फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर रहा है। 'खिड़की' में नसीरà¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ शाह जैसे दिगà¥à¤—ज और मंà¤à¥‡ हà¥à¤ कलाकार का होना अनहद के समरà¥à¤ªà¤£ और रचनातà¥à¤®à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ है।
यह फिलà¥à¤® बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¥‡ में लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ विकसित होने वाले सरल, रोजमरà¥à¤°à¤¾ के लगाव में तलà¥à¤²à¥€à¤¨ होती है। परिवार, सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ और अकेलेपन के विषयों की पड़ताल करती है। जब हम यà¥à¤µà¤¾ होते हैं तो हम धन, सफलता और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा के पीछे à¤à¤¾à¤—ते हैं। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम महसूस करते हैं कि परिवार और छोटे-छोटे सà¥à¤–, जैसे सà¥à¤¬à¤¹ की चाय का पà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ या लिविंग रूम की खिड़की से दिखने वाला दृशà¥à¤¯, सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मायने रखते हैं।
अनहद इस विचार को मूरà¥à¤¤ रूप देने के लिठसà¥à¤°à¥‡à¤¶ के किरदार को विकसित करना चाहते थे। हालांकि सà¥à¤°à¥‡à¤¶ अपने परिवार को नहीं रख सका, लेकिन जिस महिला से वह पà¥à¤¯à¤¾à¤° करता था, उसकी यादे साथ देती हैं। अनहद जो लिखते हैं उसे निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤¤ करना पसंद करते हैं। उनके पास कहानी को कैसे दिखाया जाना चाहिà¤, इसका à¤à¤• सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण है। इसके अलावा, à¤à¤• नठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• के रूप में, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जलà¥à¤¦à¥€ ही सीख लिया कि अगर आप निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ करना चाहते हैं, तो आपको लिखना ही होगा।
अनहद मिशà¥à¤°à¤¾ का लकà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤¸à¥€ फिलà¥à¤® बनाना था जिसे वे खà¥à¤¦ देखना पसंद करेंगे। à¤à¤• सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ के रूप में सà¥à¤Ÿà¥‚डियो सिसà¥à¤Ÿà¤® में बंधे होने की बजाय वह उन कहानियों को बताने की सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ चाहते थे जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पसंद हैं। लेकिन à¤à¤• बार फिलà¥à¤® रिलीज हो जाने के बाद यह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤ªà¤°à¤• हो जाती है, खिड़की दरà¥à¤¶à¤•ों से विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करती है। खिड़की बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¥‡, पारिवारिक संबंधों, सरल चीजों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लगाव और आधà¥à¤¨à¤¿à¤• समाज में अकेलेपन के बारे में सवाल उठाती है। इसका उतà¥à¤¤à¤° दरà¥à¤¶à¤• के मन में है, मूल संदेश अंततः दरà¥à¤¶à¤•ों को तय करना है।
नसीरà¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ शाह को फिलà¥à¤® में शामिल करना अनहद के लिठसपना सच होने जैसा था। अनहद ने मà¥à¤‚बई में अपने सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के दौरान खिड़की लिखी थी। सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿ खतà¥à¤® करने के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शाह को मà¥à¤–à¥à¤¯ किरदार निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ की। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ अनà¥à¤à¤µà¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ के बावजूद अनहद के दृढ़ संकलà¥à¤ª ने रंग लाया और शाह à¤à¤¾à¤— लेने के लिठतैयार हो गà¤à¥¤ उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय रूप से शाह ने अपने पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के लिठà¤à¤• पैसा à¤à¥€ नहीं लिया, जो उनकी उदारता और कला में महारत का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ है।
खिड़की (Window) शीरà¥à¤·à¤• नायक के दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को देखने के तरीके के लिठà¤à¤• रूपक के रूप में काम करता है। जैसे-जैसे सà¥à¤°à¥‡à¤¶ अपने दिन अपनी खिड़की के बाहर की जिंदगी देखने में बिताते हैं, यह बाहरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से उसका जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ बन जाता है और उनके अकेलेपन के असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में आराम का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ बन जाता है। खिड़की दरà¥à¤¶à¤• को सà¥à¤°à¥‡à¤¶ के जीवन और अपने बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¥‡ में à¤à¤¸à¥€ ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना कर रहे अनगिनत अनà¥à¤¯ लोगों के जीवन में à¤à¤¾à¤‚कने का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• à¤à¥€ है।
यह फिलà¥à¤® बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सामना किठजाने वाले अकà¥à¤¸à¤° अनदेखे मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर रोशनी डालती है। जैसे अकेलापन, परिवार से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ की कमी और अपने बाद के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में जीवन का मकसद खोजने के लिठसंघरà¥à¤·à¥¤ फिलà¥à¤® दरà¥à¤¶à¤•ों को अपने जीवन में बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के साथ अपने संबंधों पर विचार करने और पà¥à¤¯à¤¾à¤°, समरà¥à¤¥à¤¨ और साथ देने के महतà¥à¤µ पर विचार करने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करती है। सà¥à¤°à¥‡à¤¶ के चरितà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से 'खिड़की' बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के जीवन को उजागर करती है। यह दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है कि वे जीवन के सरल सà¥à¤–ों में कैसे आराम और अरà¥à¤¥ पाते हैं।
NYIFF à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं की विविध और समà¥à¤®à¥‹à¤¹à¤• कहानियों को पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ करने के लिठà¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ मंच बन गया है, जो इसके बढ़ते पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ और अपील को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। अनहद मिशà¥à¤°à¤¾ की 'खिड़की' à¤à¤¾à¤°à¤¤ के यà¥à¤µà¤¾ फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठजा रहे अà¤à¤¿à¤¨à¤µ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— का à¤à¤• शानदार उदाहरण है।
-लेखक सà¥à¤®à¤¿à¤¤ कौशिक, ओ.पी. जिंदल गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में पीà¤à¤šà¤¡à¥€ के छातà¥à¤° और सोशल इंपैकà¥à¤Ÿ कंसलà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट हैं।
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