à¤à¤¾à¤°à¤¤ à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° लेकिन अकà¥à¤¸à¤° नजरअंदाज किठगठसारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संकट का सामना कर रहा है। हाल ही में पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, देश में 45 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के लगà¤à¤— हर दो में से à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ (47%) को जोड़ों के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ दरà¥à¤¦ की शिकायत है। इसके बावजूद अधिकांश लोग समय पर चिकितà¥à¤¸à¤•ीय सहायता नहीं ले रहे, जिससे विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ ने इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को “साइलेंट à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥‡à¤®à¤¿à¤•” यानी à¤à¤• मौन महामारी करार दिया है।
BMC Geriatrics में पà¥à¤°à¤•ाशित इस विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में 36 राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और केंदà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ के 58,000 से अधिक लोगों की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ किया गया। इसमें 31.7% लोगों ने लगातार पीठदरà¥à¤¦ की शिकायत की, जबकि 20% ने टखनों और पैरों में दरà¥à¤¦ की बात कही। हैरानी की बात यह है कि इतने वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• दरà¥à¤¦ के बावजूद अधिकतर लोग घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ों, दरà¥à¤¦ निवारक दवाओं या लापरवाही पर निरà¥à¤à¤° हैं।
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