International Booker Prize 2025: कà¥à¤² 6 पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों को इस बार बà¥à¤•र अवॉरà¥à¤¡ के लिठचà¥à¤¨à¤¾ गया। बà¥à¤•र पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ारों की लिसà¥à¤Ÿ में पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• 'हारà¥à¤Ÿ लैंप' à¤à¥€ शामिल है, जो कनà¥à¤¨à¤¡ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में लिखी गई है। यह à¤à¤• शॉरà¥à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ है। पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• की लेखिका बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• हैं। दीपा à¤à¤·à¥à¤ ी ने बाद में इसका अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ किया है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लंदन के टेट मॉडरà¥à¤¨ में हà¥à¤ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में अवॉरà¥à¤¡ मिला है।
लंदन के मशहूर जीबीपी 50,000 में अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीतने वाली पहली कनà¥à¤¨à¤¡à¤¼ किताब बन चà¥à¤•ी है। इससे पहले बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• कई बार करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• साहितà¥à¤¯ अकादमी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार विजेता à¤à¥€ रह चà¥à¤•ी हैं। बानू ने जिस संदीदगी से हारà¥à¤Ÿ लैंप को लिखा, उसी को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ दीपा à¤à¤·à¥à¤ ी इसका अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ à¤à¥€ किया। दरअसल, दीपा à¤à¤·à¥à¤ ी इस किताब के लिठअवॉरà¥à¤¡ जीतने वाली पहली à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टà¥à¤°à¤¾à¤‚सलेटर हैं।
बानू और दीपिका को 50,000 पाउंड का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार
बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• और दीपा à¤à¤·à¥à¤ ी ने मंगलवार को लंदन के टेट मॉडरà¥à¤¨ में हà¥à¤ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में अवॉरà¥à¤¡ रिसीव किया। दोनों को 50,000 पाउंड (52.95 लाख रà¥à¤ªà¤) की पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार राशि à¤à¥€ मिली है, जो लेखक और टà¥à¤°à¤¾à¤‚सलेटर के बीच बराबर-बराबर बांटी जाती है। मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• ने हारà¥à¤Ÿ लैंप किताब में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पितृ सतà¥à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• समाज में रहने वाली मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® महिलाओं की कठिनाइयों को मारà¥à¤®à¤¿à¤• ढंग से दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ है।
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मैकà¥à¤¸ पोरà¥à¤Ÿà¤° ने की दीपिका à¤à¤·à¥à¤ ी की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा
बà¥à¤•र पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार को लेकर गठित जूरी ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ मानदंडों पर नामित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों को परखा। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार के निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• मंडल के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· मैकà¥à¤¸ पोरà¥à¤Ÿ ने à¤à¤• बयान में कहा, " पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• हारà¥à¤Ÿ लैंप अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ पाठकों के लिठवासà¥à¤¤à¤µ में कà¥à¤› नया है। कनà¥à¤¨à¤¡à¤¼ à¤à¤¾à¤·à¥€ जीवन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ इस कहानी को अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में समठà¤à¤• चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ पूरà¥à¤£ कारà¥à¤¯ था, जिसे बखूबी किया गया है।ये सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ महिलाओं के जीवन, पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अधिकारों, आसà¥à¤¥à¤¾, जाति, शकà¥à¤¤à¤¿ और उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨ को विषय पर फोकसà¥à¤¡ हैं।"
कौन हैं बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤•?
हारà¥à¤Ÿ लैंप की लेखिका बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• की मशहूर कनà¥à¤¨à¤¡à¤¼ à¤à¤¾à¤·à¤¾ की राइटर हैं। इसके अलावा वे वकील व सामाजिक कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ हैं। हारà¥à¤Ÿ लैंप के पहले à¤à¥€ उनकी कई रचनाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ˆ है। बानू को लेखिका के अलावा महिला अधिकारों की वकालत करने और à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ पर सवाल उठाने के उनके कानूनी काम के लिठà¤à¥€ जाना जाता है।
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बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• का जीवन
बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• के à¤à¤• छोटे से कसà¥à¤¬à¥‡ में मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® इलाके में पली-बढ़ीं और अपने आसपास की अधिकांश लड़कियों की तरह उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥€ सà¥à¤•ूल में उरà¥à¤¦à¥‚ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में क़à¥à¤°à¤¾à¤¨ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया। उनके पिता सरकारी करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ रहे उनके पिता चाहते थे कि बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• आम सà¥à¤•ूल में पढ़ें। जब वह आठसाल की थीं, तब उनके पिता ने उनका दाख़िला à¤à¤• कॉनà¥à¤µà¥‡à¤‚ट सà¥à¤•ूल में करवाया जहां कनà¥à¤¨à¤¡à¤¼ à¤à¤¾à¤·à¤¾ में पढ़ाई होती थी। 26 साल की उमà¥à¤° में अपनी पसंद के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से शादी के à¤à¤• साल बाद उनकी लघॠकथा à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ मैगà¥à¤œà¥€à¤¨ में छपी। हालांकि उनका शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ विवाहित जीवन संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ और कलह वाला रहा।
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