à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की छातà¥à¤°à¤¾ तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¾ दलपति की à¤à¤• रिसरà¥à¤š सामने आई है, जो चिकितà¥à¤¸à¤¾ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में नठआयाम गढ़ने के लिठमेडिकल à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ के लिठअहम साबित हो सकती है। मूल रूप से पशà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल की रहने वाली तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¾ दलपति डà¥à¤¯à¥‚क यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में à¤à¤®.डी./पी.à¤à¤š.डी. की सà¥à¤Ÿà¥‚डेंट हैं। संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोगों में उनकी अकादमिक रà¥à¤šà¤¿ जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆà¥¤ यहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मलेरिया का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया। दूसरा मौका उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डà¥à¤¯à¥‚क यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में मिला, जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ के साथ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ को कैसे वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ चिकितà¥à¤¸à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में नवाचार किया जा सकता है, इस पर जोर दिया है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login