रिजरà¥à¤µ बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR-B) डिपॉजिट पर बैंकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी जाने वाली बà¥à¤¯à¤¾à¤œ दर को बढ़ा दिया है। ये कदम इसलिठउठाया गया है ताकि विदेशी मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ का आना बॠसके। हाल के दिनों में डॉलर के मà¥à¤•ाबले रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ की कीमत में गिरावट आई है। यह ऑल टाइम लो पर पहà¥à¤‚च गई है।
FCNR-B à¤à¤• तरह का टरà¥à¤® डिपॉजिट अकाउंट होता है। जहां पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ विदेशी मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में इसे खोल सकते हैं। चूंकि ये अकाउंट विदेशी मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में होता है, इसलिठजो पैसा जमा करता है उसे à¤à¤•à¥à¤¸à¤šà¥‡à¤‚ज रेट के रिसà¥à¤• से कोई लेना-देना नहीं होता। यही बात इसे à¤à¤¨à¤†à¤°à¤†à¤ˆ के लिठआकरà¥à¤·à¤• बनाती है।
रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ पर दबाव के समय, सेंटà¥à¤°à¤² बैंक पहले à¤à¥€ इसी तरीके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर चà¥à¤•ा है। मिसाल के तौर पर, जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 2013 में जब देश के कमजोर मैकà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤•ॉनॉमिक फंडामेंटलà¥à¤¸ की वजह से रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ पर बहà¥à¤¤ दबाव था, तब à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ ही किया गया था। हाल ही में, जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 2022 में à¤à¥€ RBI ने इसी तरह की छूट दी थी।
RBI के गवरà¥à¤¨à¤° शकà¥à¤¤à¤¿à¤•ांत दास ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट में बताया कि अब बैंक à¤à¤• से तीन साल की अवधि के लिठसरकारी तय रेफरेंस रेट से 400 बेसिस पॉइंटà¥à¤¸ (4%) जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥à¤¯à¤¾à¤œ दे सकेंगे। वहीं, तीन से पांच साल की अवधि के लिठबैंक रेफरेंस रेट से 500 बेसिस पॉइंटà¥à¤¸ (यानी 5%) जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥à¤¯à¤¾à¤œ दे सकेंगे। ये नया बदलाव 200 बेसिस पॉइंटà¥à¤¸ (यानी 2%) का इजाफा है। इससे उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि à¤à¤¨à¤†à¤°à¤†à¤ˆ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पैसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जमा करेंगे और रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ को सहारा मिलेगा।
Emkay Global की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ माधवी अरोड़ा का कहना है कि रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ की कमजोरी को रोकने के लिà¤, RBI ने पिछले दो महीनों में बहà¥à¤¤ सारा पैसा खरà¥à¤š किया है। ये खरà¥à¤š डॉलर बेचकर किया गया है। लगà¤à¤— 35 से 40 अरब डॉलर। इसके अलावा, RBI ने à¤à¤• तरह की 'डॉलर की कमी' वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ बनाई है, ताकि आगे रà¥à¤ªà¤¯à¤¾ और न गिरे। अब RBI ने बà¥à¤¯à¤¾à¤œ दरें बढ़ाने का फैसला इसलिठलिया है ताकि विदेशों से और पैसे आà¤à¤‚ और रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ को सपोरà¥à¤Ÿ मिले।
रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ पर कई मोरà¥à¤šà¥‹à¤‚ से दबाव है। अमेरिकी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ डोनालà¥à¤¡ टà¥à¤°à¤®à¥à¤ª की टैरिफ नीतियों, पोरà¥à¤Ÿà¤«à¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¥‹ आउटफà¥à¤²à¥‹, à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ देशों की मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤“ं में कमजोरी और धीमी आरà¥à¤¥à¤¿à¤• वृदà¥à¤§à¤¿ से रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ को नà¥à¤•सान हो रहा है। मंगलवार को रà¥à¤ªà¤¯à¤¾, अमेरिकी डॉलर के मà¥à¤•ाबले अपने अब तक के सबसे निचले सà¥à¤¤à¤° 84.7575 पर पहà¥à¤‚च गया था। फिलहाल यह 84.6200 पर टिका हà¥à¤† है।
SBM बैंक इंडिया के टà¥à¤°à¥‡à¤œà¤°à¥€ हेड मंदार पिटाले नहीं मानते कि RBI के इस कदम से रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ को मजबूती मिलेगी। उनका कहना है, 'मà¥à¤à¥‡ नहीं लगता कि इस कदम से विदेशी मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ जमा में कोई खास इजाफा होगा। इससे उन बैंकों को फायदा हो सकता है जिनके पास पहले से ही इस तरह के जमा की मांग है। लेकिन बाकी बैंक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ बाजार से ससà¥à¤¤à¥‡ में धन जà¥à¤Ÿà¤¾ सकते हैं, इसलिठउनके लिठबà¥à¤¯à¤¾à¤œ दरों को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ का कोई फायदा नहीं है।'
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