à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉ. अशà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ केशवन बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ की उन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित रिसरà¥à¤š टीम में शामिल हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डिमेंशिया की बीमारी की आशंका को और समà¤à¤¨à¥‡ और इसका निदान पेश करने के लिठहाल में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ मिला है। अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ का मकसद इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हाल में मिली सफलताओं का आगे बढ़ाना और अगले पांच वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के à¤à¥€à¤¤à¤° इन परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• उपयोग को सकà¥à¤·à¤® बनाने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• सबूत जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¤¾ है। डिमेंशिया (मनोà¤à¥à¤°à¤‚श) à¤à¤¸à¥€ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की बीमारी है जिसके कारण याददाशà¥à¤¤ कमजोर हो जाती है।
यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ कॉलेज लंदन (UCL) में à¤à¤• सीनियर कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤•ल रिसरà¥à¤š फेलो और मानद सलाहकार नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉ. अशà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ केशवन, अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° रोग के लिठà¤à¤• आशाजनक बायोमारà¥à¤•र p-tau217 पर शोध को आगे बढ़ाने के लिठà¤à¤• टीम के साथ सहयोग कर रही हैं।
ऑकà¥à¤¸à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡ और कैमà¥à¤¬à¥à¤°à¤¿à¤œ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ के शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं की à¤à¤• अनà¥à¤¯ टीम डिमेंशिया का कारण बनने वाली अलग-अलग पà¥à¤°à¤•ार की बीमारियों का पता लगाने के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के संबंध में परीकà¥à¤·à¤£ करेगी। ये दोनों टीम निदान के तरीकों को किफायती बनाने और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवा (NHS) में शामिल किठजाने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ के साथ पूरे बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों की à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ करेंगी।
डॉ. केशवन का कहना है कि डिमेंशिया, विशेष रूप से अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° रोग का कारण बनने वाली विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की बीमारियों का आधार बनने वाले पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का अब खून में पता लगाया जा सकता है। दोनों रिसरà¥à¤š टीम इसी दिशा में अनà¥à¤¸à¤‚धान करेंगे, जिसके लिठ‘बà¥à¤²à¤¡ बायोमारà¥à¤•र चैलेंज’ अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ के जरिठवितà¥à¤¤à¥€à¤¯ मदद मिली है।
रिसरà¥à¤š का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ में इस बीमारों को लेकर बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ की उपयोगिता का आकलन करना है। ये अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करेंगे कि कà¥à¤¯à¤¾ खून का परीकà¥à¤·à¤£ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ चरण के डिमेंशिया का अनà¥à¤à¤µ करने वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में इन बीमारियों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ या अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ कर सकता है या नहीं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि हम यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना चाहते हैं कि हमारा शोध बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ की जातीय और सामाजिक आरà¥à¤¥à¤¿à¤• विविधता को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करेगा और इन परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ तक पहà¥à¤‚च को वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• बनाà¤à¤—ा। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि महंगे होने की वजह से इन बीमारियों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करने के लिठपरीकà¥à¤·à¤£ मानक वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ के सà¤à¥€ रोगियों के लिठसà¥à¤²à¤ नहीं हैं। डॉ. केशवन का कहना है कि अगर हमारे रिसरà¥à¤š से साबित होता है कि ये परीकà¥à¤·à¤£ चिकितà¥à¤¸à¤•ीय रूप से उपयोगी और किफायती हैं, तो इससे इसे बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ की मानक देखà¤à¤¾à¤² पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनाने में मदद मिलेगी।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login