à¤à¤¾à¤°à¤¤ में आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के जनक और पूरà¥à¤µ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ डॉ. मनमोहन सिंह की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में वॉशिंगटन डीसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दूतावास की तरफ से शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि सà¤à¤¾ का आयोजन किया जाà¤à¤—ा। इस बीच कई लोगों ने मनमोहन सिंह के निधन पर शोक संदेश दिया है।
à¤à¤‚बेसी के 2107 मैसाचà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¤µà¥‡à¤¨à¥à¤¯à¥‚ वॉशिंगटन डीसी कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में 30-31 दिसंबर को सà¥à¤¬à¤¹ 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक à¤à¤• शोक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¿à¤•ा à¤à¥€ रखी जाà¤à¤—ी, जिसमें लोग अपनी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि दरà¥à¤œ कर सकेंगे।
इस बीच 92 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ मनमोहन सिंह के 26 दिसंबर को निधन के बाद शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करने वालों का तांता लगा हà¥à¤† है। पॉल हेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚गà¥à¤¸ में पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी पà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¶à¤¨à¤° रौनक डी. देसाई ने कहा कि डॉ. सिंह का निधन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ इतिहास के à¤à¤• असाधारण अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ का अंत है।
देसाई ने कहा कि 1991 में à¤à¤¾à¤°à¤¤ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पतन के कगार पर था, जिसे मनमोहन सिंह ने अपनी बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¤à¥à¤¤à¤¾ और धैरà¥à¤¯ के बलबूले पर न सिरà¥à¤« बाहर निकाला बलà¥à¤•ि सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ की नई शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ करके à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अंतरà¥à¤®à¥à¤–ी अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को वैशà¥à¤µà¤¿à¤• ताकत में बदल दिया। उनका योगदान सिरà¥à¤« आरà¥à¤¥à¤¿à¤• नहीं था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ को देखने का नजरिया ही बदल दिया।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि à¤à¤¸à¤¾ कम ही होता है कि किसी à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ने राषà¥à¤Ÿà¥à¤° की दशा-दिशा को बदल दिया हो। 1991 के आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ से लेकर 2008 में à¤à¤¾à¤°à¤¤-अमेरिका परमाणॠकरार पर देसाई ने कहा कि मनमोहन सिंह ने à¤à¤¸à¥‡ समय साहस के साथ निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• फैसले किà¤, जब à¤à¤¾à¤°à¤¤ का बहà¥à¤¤ कà¥à¤› दांव पर लगा हà¥à¤† था। उनके निधन ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ राजनीति में à¤à¤• खालीपन पैदा कर दिया है।
गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° बोसà¥à¤Ÿà¤¨ में यूà¤à¤¸à¤-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमरà¥à¤¸ (यूà¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¸à¥€) के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· करà¥à¤£ ऋषि ने अपनी संवेदनाà¤à¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हà¥à¤ कहा कि मनमोहन सिंह बायोफारà¥à¤®à¤¾ में वैशà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤¾à¤—ीदारी और नवाचार के पà¥à¤°à¤¬à¤² समरà¥à¤¥à¤• थे। 18 साल पहले बोसà¥à¤Ÿà¤¨ में यूà¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¸à¥€ की पहली बायोफारà¥à¤®à¤¾ समिट में उनका पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¨ संदेश हमें आज तक पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है।
ऋषि ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह à¤à¤• महान इंसान, दूरदरà¥à¤¶à¥€ नेता और à¤à¤• उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ राजनेता थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अमेरिका-à¤à¤¾à¤°à¤¤ संबंधों को अगले सà¥à¤¤à¤° तक ले जाने की मजबूत नींव रखी थी। वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साà¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ के सबसे महान चैंपियनों में से à¤à¤• थे। उनका निधन से बनी शूनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ को अरसे तक महसूस किया जाता रहेगा, लेकिन उनकी विरासत कायम रहेगी।
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