à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अंतरिकà¥à¤· अनà¥à¤¸à¤‚धान संगठन (इसरो) ने शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उपलबà¥à¤§à¤¿ हासिल की। उसने अपने पहले पà¥à¤¨: इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किठजा सकने वाले पà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ªà¤£ यान (आरà¤à¤²à¤µà¥€) के लैंडिंग मिशन को सटीकता के साथ अंजाम दिया। इस यान का नाम पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• रखा गया है।
करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• के चितà¥à¤°à¤¦à¥à¤°à¥à¤— के करीब चलà¥à¤²à¤¾à¤•ेरे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤¯à¤°à¥‹à¤¨à¥‰à¤Ÿà¤¿à¤•ल टेसà¥à¤Ÿ रेंज (à¤à¤Ÿà¥€à¤†à¤°) में इसरो के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· à¤à¤¸. सोमनाथ और अनà¥à¤¯ अधिकारियों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में इसका सफल परीकà¥à¤·à¤£ किया गया।
RLV-LEX-02:
— ISRO (@isro) March 22, 2024
The approach and the landing. pic.twitter.com/hI9k86KiBv
अंतरिकà¥à¤· संगठन इसरो की तरफ से à¤à¤•à¥à¤¸ पर जानकारी देते हà¥à¤ कहा गया कि इसरो ने à¤à¤• बार फिर कर दिखाया! पंखों वाला यान पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• (आरà¤à¤²à¤µà¥€-टीडी) ऑफ-नॉमिनल सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से रिलीज किठजाने के के बाद रनवे पर सटीकता के साथ खà¥à¤¦ ब खà¥à¤¦ उतरने में कामयाब रहा।
इसरो के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• यान को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वायà¥à¤¸à¥‡à¤¨à¤¾ के चिनूक हेलीकॉपà¥à¤Ÿà¤° की मदद से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ दिया गया था। वहां से वह खà¥à¤¦ नीचे आया और रनवे से 4 किमी की दूरी पर पहà¥à¤‚चने के बाद अपने आप रासà¥à¤¤à¥‡ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करते हà¥à¤ रनवे तक पहà¥à¤‚चा। यह रनवे पर बिलà¥à¤•à¥à¤² सटीक तरीके से उतरा। इस दौरान उसने बà¥à¤°à¥‡à¤• पैराशूट, लैंडिंग गियर बà¥à¤°à¥‡à¤• और नोज वà¥à¤¹à¥€à¤² सà¥à¤Ÿà¥€à¤¯à¤°à¤¿à¤‚ग सिसà¥à¤Ÿà¤® का अचà¥à¤›à¥‡ से इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया।
पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• आरà¤à¤²à¤µà¥€ à¤à¤• अनोखा रॉकेट है जिसे बार बार इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। इसे à¤à¤• ही सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में ऑरà¥à¤¬à¤¿à¤Ÿ तक पहà¥à¤‚चाने के लिठडिजाइन किया गया है। पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• आरà¤à¤²à¤µà¥€ अंतरिकà¥à¤· अनà¥à¤µà¥‡à¤·à¤£ पà¥à¤°à¥Œà¤¦à¥à¤¯à¥‹à¤—िकी में अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¥à¤¨à¤¿à¤• तकनीक का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। इसे पिछले यानों से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ लेकर उनà¥à¤¨à¤¤ तकनीक के जरिठतैयार किया गया है।
पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• की यह तीसरी उड़ान है जो इसकी विकास यातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ मील का पतà¥à¤¥à¤° साबित हà¥à¤ˆ है। पिछले à¤à¤• दशक में इस पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ ने कई बदलाव देखे हैं। कई परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बाद रोबोट लैंडिंग कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं को बढ़ाने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से इसमें कई परिवरà¥à¤¤à¤¨ किठगठहैं।
पिछले साल अपà¥à¤°à¥ˆà¤² में पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• के विकास में उस समय महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सफलता हासिल हà¥à¤ˆ थी, जब इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वायॠसेना के चिनूक हेलीकॉपà¥à¤Ÿà¤° से छोड़ने के बाद यह अपने आप उतरने में कामयाब हà¥à¤† था। इस कामयाबी से यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हो गया था कि यह धरती की ककà¥à¤·à¤¾ में पà¥à¤¨: पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ के लायक है।
इसका नाम पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• रामायण काल के पौराणिक 'पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• विमान' से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ लेकर रखा गया है। यह इसरो के इनोवेशन का नया उदाहरण है। इस पंख वाले आरà¤à¤²à¤µà¥€ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤• को अलग अलग तकनीकों के परीकà¥à¤·à¤£ के लिहाज से तैयार किया गया है। इनमें हाइपरसोनिक उड़ान कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤à¤‚, अपने आप लैंडिंग सिसà¥à¤Ÿà¤® और कà¥à¤°à¥‚ज उड़ान कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ शामिल हैं।
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