à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की पलà¥à¤²à¤µà¥€ सिंह को सोसायटी फॉर à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‡à¤°à¤¿à¤®à¥‡à¤‚टल बायोलॉजी (SEB) पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट मेडल से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ करेगी। 2 से 5 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ तक पà¥à¤°à¤¾à¤— में होने वाले SEB समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ में पलà¥à¤²à¤µà¥€ को समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया जाà¤à¤—ा। पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट मेडल पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤°à¥à¤· उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ वाले यà¥à¤µà¤¾ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों को पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किठजाते हैं।
पलà¥à¤²à¤µà¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पली-बढ़ी हैं और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के लखनऊ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से बीà¤à¤¸à¤¸à¥€ (वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, रसायन विजà¥à¤žà¤¾à¤¨) और à¤à¤®à¤à¤¸à¤¸à¥€ (जैव रसायन) की है। वरà¥à¤· 2011 में पलà¥à¤²à¤µà¥€ को नेशनल इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट ऑफ पà¥à¤²à¤¾à¤‚ट जीनोम रिसरà¥à¤š, नई दिलà¥à¤²à¥€ में पीà¤à¤šà¤¡à¥€ करने के लिठसीà¤à¤¸à¤†à¤ˆà¤†à¤°-जूनियर रिसरà¥à¤š फेलोशिप पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की गई थी। पलà¥à¤²à¤µà¥€ के शोध कारà¥à¤¯ को à¤à¤¾à¤°à¤¤ में विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ अकादमी से INSA और NASI यंग साइंटिसà¥à¤Ÿ अवारà¥à¤¡à¥à¤¸ (2019, 2017) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी गई है।
अकà¥à¤¤à¥‚बर 2015 में वह चावल पर शोध कारà¥à¤¯ करने के लिठकॉरà¥à¤¨à¥‡à¤² यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ से जà¥à¤¡à¤¼ गईं और फिर 2017 में पलà¥à¤²à¤µà¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° जूलियन हिबरà¥à¤¡ के साथ काम करने के लिठकैमà¥à¤¬à¥à¤°à¤¿à¤œ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ (UK) चली गईं। 2018 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इमैनà¥à¤à¤² कॉलेज में जॉन हेनरी कोटà¥à¤¸ रिसरà¥à¤š फेलो नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। कैमà¥à¤¬à¥à¤°à¤¿à¤œ में उनका शोध C4 पà¥à¤°à¤•ाश संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ के टà¥à¤°à¤¾à¤‚सकà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¶à¤¨à¤² विनियमन पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ था।
सितंबर 2022 से पलà¥à¤²à¤µà¥€ à¤à¤¸à¥‡à¤•à¥à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ (UK) में वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¾ के रूप में काम कर रही हैं। उनका शोध समूह फसल पौधों में जल उपयोग रणनीतियों के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ है। पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला का लकà¥à¤·à¥à¤¯ कारà¥à¤¬à¤¨ लाठके साथ पौधों की जल आपूरà¥à¤¤à¤¿ को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ करने, जल उपयोग दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ को अधिकतम करने की पूरक आवशà¥à¤¯à¤•ता पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करके पà¥à¤°à¤•ाश संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤• उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता को बढ़ाना है।
पलà¥à¤²à¤µà¥€ सिंह के शोध का वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• लकà¥à¤·à¥à¤¯ अधिक जल-कà¥à¤¶à¤² फसलें विकसित करना और जलवायà¥-मितà¥à¤° कृषि को बढ़ावा देना है। SEB की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ 1923 में लंदन के बिरà¥à¤•बेक कॉलेज में अपनी सà¤à¥€ शाखाओं में पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤—िक जीव विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की कला और विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ को बढ़ावा देने के लिठकी गई थी।
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